मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जस्टिस विशाल मिश्रा को फोन कॉल और मैसेज भेजने के आरोप में चल रहे आपराधिक अवमानना मामले में भाजपा विधायक संजय पाठक बुधवार को खुद अदालत में पेश हुए। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया की डिवीजन बेंच के सामने उन्होंने बिना किसी शर्त के हलफनामा दाखिल किया और अपनी गलती मानते हुए माफी मांग ली। इस पूरे विवाद ने पिछले कुछ महीनों से मध्य प्रदेश की न्यायपालिका और राजनीति दोनों में हलचल मचा रखी है।
हलफनामे में संजय पाठक ने क्या सफाई दी
संजय पाठक की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया कि जस्टिस विशाल मिश्रा को उनकी तरफ से जो कॉल गया था, वह गलती से लग गया था और इसके पीछे कोई मंशा नहीं थी। उन्होंने यह भी बताया कि बाद में भेजा गया मैसेज सिर्फ अपना परिचय देने के मकसद से भेजा गया था। हलफनामे में यह बात खास तौर पर रखी गई कि जस्टिस के मोबाइल फोन पर सिर्फ एक बार, वह भी सिंगल रिंग के लिए घंटी बजी थी, यानी कोई बातचीत नहीं हुई थी।
कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, टिप्पणी भी की
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और संजय पाठक की माफी दर्ज करने के बाद हाईकोर्ट ने अपना आदेश फिलहाल सुरक्षित रख लिया है। अधिवक्ता आर्यन उरमालिया के मुताबिक, विवादित कॉल और मैसेज का कोई रिकॉर्ड अदालत के सामने पेश नहीं किया जा सका। इसके बावजूद बेंच ने मौखिक तौर पर साफ किया कि सिर्फ कॉल लग जाना अलग बात हो सकती है, लेकिन उसके बाद जानबूझकर मैसेज भेजकर खुद का परिचय देना न्यायिक मर्यादा के खिलाफ है। कोर्ट ने इसे कोर्ट की अवमानना से जुड़ा गंभीर मुद्दा करार दिया।
नंबर कैसे मिला, इस पर संजय पाठक चुप
सुनवाई खत्म होने के बाद जब मीडिया ने संजय पाठक से पूछा कि जस्टिस विशाल मिश्रा का निजी मोबाइल नंबर उन्हें आखिर कहां से मिला, तो उन्होंने इस सवाल पर कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि अब इस मामले में आगे क्या होना है, यह तय करना अदालत का काम है।
1 सितंबर 2025 को कैसे सामने आया था मामला
यह पूरा विवाद 1 सितंबर 2025 की एक घटना से जुड़ा है, जब जस्टिस विशाल मिश्रा ने खुली अदालत में बताया था कि किसी विधायक ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की है। उस वक्त उनके सामने उसी विधायक के परिवार से जुड़े कथित अवैध खनन के एक मामले की सुनवाई चल रही थी। न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जस्टिस मिश्रा ने खुद ही उस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
कटनी के आशुतोष मनु दीक्षित की याचिका पर शुरू हुई कार्रवाई
इसके बाद कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इसे न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए संजय पाठक को नोटिस जारी किया था। इससे पहले संजय पाठक ने व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट मांगी थी, लेकिन अदालत ने वह मांग भी ठुकरा दी थी।
आशुतोष मनु दीक्षित की ही शिकायत पर संजय पाठक के परिवार से जुड़ी अलग अलग कंपनियों पर करीब 430 करोड़ रुपए की पेनल्टी लगाए जाने का जिक्र विधानसभा में भी हो चुका है। अब पूरे देश की नजर इस बात पर है कि हाईकोर्ट इस अवमानना मामले में आखिर में क्या फैसला सुनाता है।











