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कोटा अस्पताल में 5 प्रसूताओं की मौत: डायनोप्रोस्टोन जेल का बैच जांच में फेल, राजस्थान में बिक्री पर पाबंदीराजस्थान
8 जुल॰ 2026, 10:59 am (45 दिन पहले)· 2

कोटा अस्पताल में 5 प्रसूताओं की मौत: डायनोप्रोस्टोन जेल का बैच जांच में फेल, राजस्थान में बिक्री पर पाबंदी

कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पांच महिलाओं की मौत के मामले में एक बड़ी जानकारी सामने आई है। प्रसव के दौरान उपयोग की जाने वाली दवा का एक बैच सरकारी लैब की जांच में मानक के अनुरूप नहीं पाया गया है।

कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद पांच महिलाओं की मृत्यु के दुखद मामले में अब एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। अस्पताल में उपयोग की गई डायनोप्रोस्टोन जेल का एक विशेष बैच गुणवत्ता परीक्षण में विफल साबित हुआ है। इस रिपोर्ट के आने के बाद ड्रग कंट्रोल विभाग ने पूरे राजस्थान में उक्त बैच की बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश दे दिया है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि इन प्रसूताओं की मृत्यु का एकमात्र कारण यही दवा थी। मामले की व्यापक जांच अभी भी प्रक्रिया में है।

जांच में बैच H-084 निकला खराब

इस घटना की शुरुआत तब हुई जब ड्रग कंट्रोल विभाग ने 17 मई को कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल से डायनोप्रोस्टोन जेल के बैच नंबर H-084 के नमूने एकत्र किए थे। इन सैंपल्स को परीक्षण के लिए जयपुर स्थित राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में भेजा गया था। प्रयोगशाला की विस्तृत जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि यह बैच निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में असमर्थ रहा। इस रिपोर्ट के प्राप्त होते ही विभाग ने सक्रियता दिखाई और पूरे राज्य में इस विशिष्ट बैच के स्टॉक को हटाने के निर्देश जारी किए।

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1117 पैकेट जब्त और कानूनी कार्रवाई

ड्रग कंट्रोल विभाग ने कोटा के नयापुरा स्थित एमसीडीडब्ल्यू स्टोर पर छापेमारी कर इस बैच के 1117 पैकेट जब्त कर लिए हैं। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया है कि निर्माता कंपनी के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत वैधानिक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। अब विभाग इस बात का पता लगाने में जुटा है कि इस बैच की सप्लाई राज्य के किन-किन अन्य अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों तक की गई थी, ताकि आगे किसी भी अनहोनी को रोका जा सके।

मौतों के बाद चर्चा में आया मामला

यह पूरा विवाद तब गहराया जब न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक के बाद एक पांच प्रसूताओं की जान चली गई। इन मौतों ने पूरे चिकित्सा जगत में हड़कंप मचा दिया था, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की गहन समीक्षा शुरू की। शुरुआती जांच में इलाज की प्रक्रिया, अस्पताल का प्रोटोकॉल, संक्रमण की संभावना और दवाओं की गुणवत्ता जैसे कई बिंदुओं को आधार बनाया गया था। सरकार ने एक विशेषज्ञ टीम गठित कर अस्पताल प्रशासन से इस पूरी घटनाक्रम पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी।

डायनोप्रोस्टोन जेल की उपयोगिता

जांच के क्रम में यह जानकारी मिली थी कि जिन महिलाओं की मृत्यु हुई, उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू करने और गर्भाशय ग्रीवा को तैयार करने के लिए इसी बैच नंबर H-084 की डायनोप्रोस्टोन जेल दी गई थी। प्रसूति विज्ञान में यह दवा एक सामान्य हिस्सा है, जिसका उपयोग लेबर पेन को प्रेरित करने में किया जाता है। ऐसे में, इस दवा का एक बैच गुणवत्ता परीक्षण में फेल होना स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

अंतिम निष्कर्ष का इंतजार

फिलहाल स्वास्थ्य और ड्रग कंट्रोल विभाग अलग-अलग पहलुओं पर अपनी जांच जारी रखे हुए हैं। अधिकारियों का मानना है कि दवाओं की गुणवत्ता और मौतों के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध है या नहीं, यह अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा। विभाग ने आश्वासन दिया है कि यदि जांच के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी पाई गई, तो जिम्मेदार व्यक्तियों और निर्माता कंपनी के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सवाल-जवाब

कोटा अस्पताल के मामले में कौन सी दवा जांच में फेल हुई है?
जांच के दौरान डायनोप्रोस्टोन जेल का बैच नंबर H-084 गुणवत्ता परीक्षण में विफल पाया गया है।
ड्रग कंट्रोल विभाग ने क्या कार्रवाई की है?
विभाग ने पूरे राजस्थान में इस बैच की बिक्री और वितरण पर तत्काल रोक लगा दी है और 1117 पैकेट जब्त किए हैं।
क्या इसी दवा की वजह से मौतें हुई हैं?
अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने इसकी पुष्टि नहीं की है, इस पर जांच चल रही है कि क्या दवा की गुणवत्ता और मौतों में कोई संबंध है।
डायनोप्रोस्टोन जेल का उपयोग किस लिए किया जाता है?
यह जेल प्रसव पीड़ा शुरू करने और प्रसव के लिए गर्भाशय ग्रीवा को तैयार करने में इस्तेमाल की जाती है।
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