राम मंदिर में चंदे की चोरी से जुड़ी हालिया घटनाओं के बाद अब देश भर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में दान प्रबंधन और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में स्थित मां बगलामुखी मंदिर से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां भक्तों द्वारा दिए गए दान और बहुमूल्य धातुओं की हेराफेरी की गई है।
अनियमितताओं का बड़ा खुलासा
मां बगलामुखी मंदिर में हुई धांधली तब प्रकाश में आई जब कलेक्टर प्रीति यादव ने अचानक वहां का निरीक्षण किया। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि मंदिर परिसर में सरकारी प्रबंधन समिति के अतिरिक्त एक अनधिकृत और निजी समिति सक्रिय थी। यह समिति न केवल श्रद्धालुओं से नगदी और सोने-चांदी के आभूषण स्वीकार कर रही थी, बल्कि उस पैसे को सरकारी कोष में जमा करने के बजाय अपने निजी बैंक खातों में स्थानांतरित कर रही थी। गर्भगृह के सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्यों में भी इसी निजी गुट द्वारा वित्तीय लेन-देन करने की जानकारी मिली है, जिसका कोई अधिकृत हिसाब-किताब प्रशासन के पास मौजूद नहीं है।
प्रशासन का सख्त एक्शन
मंदिर की असली सरकारी देखरेख समिति को किनारे करके एक समानांतर व्यवस्था चलाने के इस कृत्य को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। भक्तों की आस्था के साथ हुए इस खिलवाड़ की जांच के लिए कलेक्टर प्रीति यादव ने 7 जुलाई 2026 को एक विशेष आदेश जारी किया है। इस मामले की तह तक जाने के लिए तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया है, जिसे एक सप्ताह की समय सीमा के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
जांच टीम की संरचना
प्रशासन द्वारा गठित की गई टीम में जिले के तीन महत्वपूर्ण अधिकारियों को शामिल किया गया है ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके:
- बी.एस. सोलंकी: अध्यक्ष (सीईओ, जिला पंचायत, आगर-मालवा)
- मनीष सोलंकी: सदस्य (जिला कोषालय अधिकारी, आगर-मालवा)
- मिनी अग्रवाल: सदस्य (मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नलखेड़ा)
यह जांच टीम अब उन सभी वित्तीय लेनदेन का बारीकी से परीक्षण करेगी जो कथित निजी समिति के माध्यम से किए गए थे। प्रशासन इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि यह अपंजीकृत समिति कब से और किसके इशारे पर मंदिर के चढ़ावे को सीधे अपने निजी खातों में ले रही थी।











