महाराष्ट्र में अब विभिन्न पर्वों के मौके पर खाद्य सुरक्षा और मिलावटखोरी की जांच के लिए अलग-अलग और तात्कालिक फरमान जारी करने की परंपरा खत्म कर दी गई है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने पूरे बारह महीने के लिए एक व्यापक और सुनियोजित आदेश जारी कर दिया है। इसके तहत अब ईद से लेकर दिवाली तक हर छोटे-बड़े त्योहार के लिए एक जैसी और स्पष्ट कार्यप्रणाली लागू कर दी गई है। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त तुकाराम मुंडे ने मीडिया को जानकारी दी कि पूरे भारत के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी राज्य में इस तरह का पूरे साल का कड़ा एक्शन प्लान तैयार किया गया है।
सालभर की कार्ययोजना और त्योहारों का वर्गीकरण
अब महाराष्ट्र की भौगोलिक सीमा के भीतर साल के हर महीने आने वाले आयोजनों और पर्वों के लिए खाद्य सुरक्षा की पुख्ता रूपरेखा पहले ही तय कर ली गई है। ईद, होली, दिवाली और बकरीद जैसे तमाम प्रमुख त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए नियमों का एक ढांचा बना दिया गया है। तुकाराम मुंडे ने स्पष्ट किया कि इस पूरी कवायद का मूल उद्देश्य यही है कि राज्य के नागरिकों को हर उत्सव के दौरान मिलावट रहित और स्वास्थ्यवर्धक भोजन मिल सके।
हर त्योहार के लिए एक समान नियम
तुकाराम मुंडे ने अपने संबोधन में बताया कि उन्होंने राज्य में सेफ फूड और सेफ ड्रग कॉन्सेप्ट की शुरुआत की थी। त्योहारों के इस दौर में खाने-पीने की चीजों की मांग अचानक आसमान छूने लगती है, जिसके चलते अक्सर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की जाती है। हालांकि पर्वों को लेकर नियम पहले से भी मौजूद थे और महाराष्ट्र में भी कानूनी प्रावधान हैं, लेकिन वे अमूमन घटना के बाद या समय-विशेष की स्थिति के आधार पर लागू होते थे। पूरे बारह महीने के लिए ऐसा कोई सतत नियम नहीं था। इसी कमी को दूर करने के लिए 3 सितंबर से यह नया आदेश लागू किया गया है जो हर धर्म और हर उत्सव पर समान रूप से प्रभावी होगा।
त्योहारों को दिए गए स्टार और मिलावट की आशंका
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने हर महीने के पर्वों और उनमें उपयोग होने वाली सामग्रियों में मिलावट की आशंकाओं का बारीकी से अध्ययन किया है। इसी आधार पर त्योहारों को अलग-अलग स्टार श्रेणियों में बांटा गया है। उदाहरण के तौर पर मकर संक्रांति के पर्व पर तिलगुड़ में मिलावट होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इसी तरह होली अथवा ईद के समय मिठाइयों और मालपुआ की गुणवत्ता बिगड़ने की आशंका बनी रहती है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए त्यौहारों के दौरान आयोजित होने वाले सार्वजनिक भंडारों के लिए भी विशेष कार्यप्रणाली तय कर दी गई है। अब हर बड़े आयोजन और वहां पर परोसे जाने वाले भोजन की पूरी जानकारी समय रहते एफडीए को देना अनिवार्य कर दिया गया है।
तीन स्तरों पर त्योहारों का नियोजन और चार चरणों में जांच
जनवरी से लेकर दिसंबर तक खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता परखने के लिए इस आदेश में त्योहारों को कुल तीन स्तरों पर नियोजित किया गया है। इसका आधार यह तय किया गया है कि किस पर्व के दौरान कितनी बड़े पैमाने पर मिलावट की संभावना रहती है। इसके अलावा खाने-पीने की चीजों की सैंपलिंग और जांच चार अलग-अलग लेवल्स पर पूरी की जाएगी। त्योहारों के स्वरूप के हिसाब से जांच में शामिल होने वाली खाद्य सामग्रियां भी बदलती रहेंगी। उदाहरण के लिए व्रत और उपवास के दौरान खाए जाने वाले विशेष भोजन की जांच अलग तरीके से की जाएगी। इसके साथ ही खाद्य तेलों, मेवों, बेकरी उत्पादों और ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के जरिए मंगाए जाने वाले खान-पान की निगरानी के लिए बिल्कुल अलग और सख्त व्यवस्था बनाई गई है। मंदिरों के महाप्रसाद, सार्वजनिक भंडारों और लंगर में बनने वाले भोजन की भी सघन जांच की जाएगी तथा इसके आयोजकों को नियमित रूप से विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
चार चरणों में होगी फूड सैंपलिंग और चेकिंग
महाराष्ट्र में पर्वों के सीजन के दौरान अब चार स्पष्ट चरणों में खाद्य पदार्थों की जांच का अभियान चलाया जाएगा। पहले चरण में राज्य स्तर के बड़े आयोजनों जैसे कि गणेश उत्सव और नवरात्रि को शामिल किया गया है। इन उत्सवों के लिए पंद्रह से इक्कीस दिन पहले से ही विशेष प्लानिंग शुरू कर दी जाती है जिसके दौरान नियमों का बेहद सख्ती के साथ पालन कराया जाता है। इसके पश्चात दूसरे चरण में महाशिवरात्रि और मकर संक्रांति जैसे पर्वों को रखा गया है जिनके लिए एक से चौदह दिन की कार्ययोजना बनाई जाती है। तीसरे चरण के अंतर्गत स्थानीय मिठाई की दुकानों और बेकरी यूनिट्स को रखा गया है, जबकि चौथे चरण में त्योहार समाप्त होने के तीस दिन बाद तक प्रशासनिक कार्रवाई और मॉनिटरिंग जारी रखने की प्लानिंग की गई है।
तुकाराम मुंडे का तीखा बयान और कामकाज में सुधार
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए तुकाराम मुंडे ने एक खास टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें अच्छी तरह से मालूम है कि वे कोई भगवान नहीं हैं। उनके इस बयान को हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा की गई एक टिप्पणी से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें अदालत ने सुनवाई के दौरान उनसे सवाल किया था कि क्या वे खुद को भगवान समझते हैं जो कुछ भी कर सकते हैं। मुंडे ने इस बात का भी खुलासा किया कि जब से उन्होंने खाद्य एवं औषधि प्रशासन आयुक्त के पद का कार्यभार संभाला है, तब से विभाग के कुल कामकाज और कार्रवाई की रफ्तार में तीन सौ प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है।





















