राज्य के प्रशासनिक तंत्र को तंदुरुस्त बनाने और कर्मचारियों के खान-पान की आदतों में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब राज्य के सभी सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्यालयों में आयोजित होने वाली आधिकारिक बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सम्मेलनों तथा परिसर में संचालित कैंटीन के भोजन मेन्यू को पूरी तरह बदल दिया जाएगा। अब इन स्थानों पर पारंपरिक तले-भुने और अत्यधिक वसा वाले व्यंजनों की जगह संतुलित और पौष्टिक आहार को प्राथमिकता दी जाएगी। इस फैसले का प्राथमिक उद्देश्य दफ्तरों में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ अपनी समस्याओं को लेकर प्रतिदिन शासकीय परिसरों में आने वाले आम नागरिकों को भी स्वास्थ्यवर्धक भोजन के विकल्प मुहैया कराना है।
बढ़ती बीमारियों पर लगाम लगाने की पहल
महाराष्ट्र सरकार ने इस महत्वपूर्ण कदम के पीछे आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को मुख्य कारण बताया है। वर्तमान समय में दफ्तरी कामकाज के दौरान शारीरिक गतिविधि में कमी और असंतुलित खान-पान के कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और हृदय रोग जैसी गैर-संचारी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इन बीमारियों के बढ़ते प्रकोप को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह अनिवार्य किया है कि शासकीय संस्थानों में दिए जाने वाले जलपान और भोजन में पोषक तत्वों का विशेष संतुलन बनाए रखा जाए।
सरकारी दिशा-निर्देशों में साफ कहा गया है कि अत्यधिक चीनी, नमक और तेल वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाई जाएगी। इसके अलावा, डिब्बाबंद और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के इस्तेमाल को भी चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह समाप्त करने की योजना तैयार की गई है, ताकि दफ्तर के माहौल में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को बढ़ावा दिया जा सके।
सुबह के जलपान और नाश्ते में मिलेंगे ये विकल्प
शासकीय बैठकों और दैनिक नाश्ते के समय अब पौष्टिक और सुपाच्य पदार्थों का समावेश किया जाएगा। पूर्व में परोसे जाने वाले अनहेल्दी स्नैक्स के स्थान पर प्राकृतिक और पारंपरिक आहार को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। नाश्ते की तालिका में निम्नलिखित प्रमुख खाद्य पदार्थ शामिल रहेंगे
- मौसमी फल: ताजे और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विभिन्न फल तथा फ्रूट सलाद।
- अंकुरित अनाज और चने: भुने या उबले हुए चने, कम नमक वाली मूंगफली और अंकुरित अनाज की सलाद।
- पारंपरिक और मिलेट व्यंजन: सब्जियों से भरपूर पोहा, उपमा, इडली-सांभर, मिलेट खिचड़ी तथा महाराष्ट्र का पारंपरिक थालीपीठ।
- प्रोटीन युक्त आहार: उबले हुए अंडे और ड्राई फ्रूट्स।
पेय पदार्थों में हर्बल और प्राकृतिक ड्रिंक्स को प्राथमिकता
बैठकों और सम्मेलनों के दौरान अत्यधिक चीनी वाली चाय, कॉफी या पैक्ड सॉफ्ट ड्रिंक्स की जगह प्राकृतिक पेय पदार्थों को परोसा जाएगा। सरकार ने कैंटीन प्रबंधकों और आयोजन समितियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले पेय पदार्थों से परहेज करें। मेन्यू में शामिल पेय पदार्थ इस प्रकार हैं
- ताजा नारियल पानी और छाछ।
- महाराष्ट्र का पारंपरिक स्वास्थ्यवर्धक पेय सोलकढ़ी।
- बिना चीनी वाला गर्म दूध।
- ग्रीन टी और हर्बल टी के विकल्प।
- कम चीनी या गुड़ के साथ तैयार किया गया नींबू पानी।
दोपहर और रात के भोजन में मोटे अनाज तथा हरी सब्जियों पर जोर
कार्यालयीन कैंटीन में दोपहर और रात के मुख्य भोजन के लिए भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। लंच और डिनर की थाली में रिफाइंड अनाज के बजाय पोषक तत्वों से भरपूर मोटे अनाज (मिलेट्स) और ताजा सब्जियों को अनिवार्य रूप से जगह दी जाएगी। भोजन में निम्नलिखित विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे
- मोटे अनाज की रोटियां: ज्वार, बाजरा और रागी से तैयार रोटियां तथा मल्टीग्रेन चपाती।
- चावल के पौष्टिक विकल्प: सेहत के लिए फायदेमंद ब्राउन राइस और पारंपरिक रूप से हाथ से कुटा चावल।
- दाल और उसल: प्रोटीन से भरपूर दालें और अंकुरित कठोल से बनी उसल।
- सब्जियां और अन्य उत्पाद: ताजा हरी सब्जियां, मौसमी सब्जियां, ताजा दही, छाछ और हरी सलाद।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से न केवल कर्मचारियों का शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि दफ्तरों में काम करने की दक्षता और सकारात्मक ऊर्जा में भी वृद्धि होगी।



















