महाराष्ट्र के नागपुर शहर में एक ई-स्कूटर में अचानक भीषण आग लगने के बाद उस समय स्थिति तनावपूर्ण और अजीब हो गई, जब मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की गाड़ी से पानी का छिड़काव ही नहीं हो पाया। नागपुर महानगरपालिका का दमकल वाहन आग बुझाने के लिए घटनास्थल पर समय पर तो पहुंच गया, लेकिन ऐन मौके पर उपकरण काम न करने से वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शी और स्थानीय नागरिक हैरान रह गए। पानी की बौछार शुरू न होने पर वहां अफरा-तफरी मच गई और लोगों के बीच यह अफवाह और चर्चा जोर पकड़ने लगी कि दमकल विभाग की गाड़ी में पानी ही मौजूद नहीं था, जिसकी वजह से ई-स्कूटर जलता रहा और आग पर काबू नहीं पाया जा सका।
दमकल विभाग की सफाई और तकनीकी खराबी का विवरण
सार्वजनिक रूप से उठे सवालों के बाद नागपुर महानगरपालिका के दमकल विभाग ने पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने गाड़ी में पानी खत्म होने की खबरों का पूरी तरह खंडन करते हुए कहा कि दमकल वाहन में पानी का पूरा स्टॉक मौजूद था। अधिकारियों के मुताबिक समस्या पानी की किल्लत की नहीं, बल्कि गाड़ी के वाटर पंप में आई अचानक तकनीकी खराबी की थी। मिनी टेंडर के मुख्य इंजन से पीटीओ के जरिए वाटर पंप को बिजली की सप्लाई की जाती है। उसी इलेक्ट्रिकल सर्किट का फ्यूज अचानक उड़ गया था, जिसके कारण पंप का स्टार्ट होना बंद हो गया और पानी का छिड़काव संभव नहीं हो सका।
स्थानीय निवासियों का प्रयास और वैकल्पिक व्यवस्था
वाहन के पंप में आई इस अचानक खराबी को देखते हुए दमकल विभाग ने बिना समय गंवाए कंट्रोल रूम से एक दूसरे बड़े दमकल वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया। हालांकि, जब तक दूसरा दमकल वाहन मौके पर पहुंच पाता, तब तक वहां मौजूद स्थानीय लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए खुद ही पानी और उपलब्ध साधनों की मदद से आग पर पूरी तरह काबू पा लिया था। दमकल अधिकारियों ने बताया कि गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी भी नागरिक को कोई शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा और ना ही कोई बड़ी अनहोनी हुई, जिससे प्रशासन ने बड़ी राहत की सांस ली।
वाहनों के रखरखाव और आपातकालीन तैयारियों पर उठे सवाल
भले ही इस हादसे में किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन नागपुर की इस घटना ने दमकल विभाग की गाड़ियों की नियमित तकनीकी जांच, मेंटेनेंस और आपातकालीन परिस्थितियों में उनकी तैयारियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि आपातकालीन वाहनों का हर समय दुरुस्त रहना अनिवार्य है ताकि ऐन वक्त पर ऐसी विफलता न देखने को मिले। अधिकारियों ने तर्क दिया कि खराबी आते ही बैकअप वाहन भेजने की मानक प्रक्रिया का मुस्तैदी से पालन किया गया था। ध्यान देने योग्य है कि इससे पहले महाराष्ट्र के अमरावती में महिला अस्पताल के चाइल्ड वार्ड में वेंटिलेटर फटने से हुए भयानक हादसे में तीन नवजात बच्चों की जान चली गई थी। इस तरह की घटनाएं आपातकालीन स्वास्थ्य और अग्नि सुरक्षा तंत्र को हमेशा चाक-चौबंद रखने की आवश्यकता को दर्शाती हैं।


















