महाराष्ट्र के पूर्वी हिस्से में स्थित गढ़चिरौली जिले में गुरुवार तड़के अचानक जमीन हिलने से स्थानीय नागरिकों में अफरा-तफरी मच गई। सुबह-सुबह आए इस भूकंप का झटका काफी स्पष्ट महसूस किया गया, जिसके कारण नींद में सो रहे कई लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 3.6 दर्ज की गई है। शुरुआती विवरण के अनुसार झटके तड़के 4 बजकर 36 मिनट पर आए, जिसने सिरोंचा और आसपास के इलाकों को प्रभावित किया।
भूकंप की तीव्रता, केंद्र और प्रभावित क्षेत्र
भूवैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक, गढ़चिरौली जिले के सिरोंचा-अहेरी इलाके में आए इस भूकंप का केंद्र धरती की सतह से लगभग 10 किलोमीटर नीचे स्थित था। भूकंप का मुख्य केंद्र बिंदु सिरोंचा तालुका के अंतर्गत आने वाले एक आरक्षित वन क्षेत्र में पाया गया है। तड़के करीब 4:36 बजे जब ज्यादातर लोग गहरी नींद में थे, अचानक धरती में कंपन महसूस हुआ। सिरोंचा के अलावा नागेपल्ली क्षेत्र में भी लोगों ने इस हलचल को महसूस किया।
राहत की बात यह रही कि इस भूकंप की तीव्रता अपेक्षाकृत कम थी। स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों से मिली अब तक की सूचना के अनुसार, इस घटना में किसी भी तरह के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है। न तो किसी इमारत को नुकसान पहुंचने की खबर है और न ही कोई व्यक्ति घायल हुआ है। हालांकि, सुबह के वक्त अचानक महसूस हुए इन झटकों ने लोगों के बीच कुछ समय के लिए डर का माहौल पैदा कर दिया था।
महाराष्ट्र और आसपास के राज्यों में लगातार आ रहे झटके
हाल के दिनों में महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में बार-बार भूकंपीय गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। इससे पहले 14 अगस्त को राज्य के नासिक जिले में भी जमीन कांपी थी, जहां रिक्टर स्केल पर 3.4 तीव्रता का भूकंप मापा गया था। नासिक की इस घटना से ठीक तीन दिन पहले, यानी 11 अगस्त को तटीय जिले पालघर में एक ही दिन में भूकंप के दो लगातार झटके महसूस किए गए थे। पालघर में आए इन झटकों की तीव्रता क्रमशः 3.2 और 3.4 दर्ज की गई थी, जिससे तटीय इलाकों में दहशत फैल गई थी।
केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया के कई हिस्सों में पिछले कुछ हफ्तों से भूगर्भीय हलचल तेज हुई है। अगस्त के मध्य में हिमाचल प्रदेश और पड़ोसी देश अफगानिस्तान में भी चार बार धरती कांपने की घटनाएं सामने आई थीं। भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार आ रहे इन झटकों के कारण लोगों के मन में बड़े भूकंप को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं।
धरती के नीचे क्यों आते हैं भूकंप?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत कई बड़ी और छोटी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी हुई है। ये प्लेटें हमेशा बहुत धीमी गति से तैरती या खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के ऊपर चढ़ती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो उनके किनारों पर भारी दबाव और तनाव पैदा होता है।
दीर्घकाल तक दबाव जमा होने के बाद जब चट्टानें इस तनाव को सहन नहीं कर पातीं, तो धरती के भीतर संचित ऊर्जा अचानक बाहर की ओर मुक्त होती है। ऊर्जा की यह तीव्र तरंगें पृथ्वी की सतह तक पहुंचती हैं और हमें भूकंपीय झटकों के रूप में महसूस होती हैं। भूवैज्ञानिकों के अनुसार, 3.6 जैसी कम तीव्रता वाले भूकंप आमतौर पर गंभीर तबाही नहीं मचाते, लेकिन यह इस बात का संकेत होते हैं कि धरती के भीतर प्लेटों की हलचल निरंतर जारी है।





















