मणिपुर के सेनापति जिले में बंदूकधारियों ने एक बार फिर खूनी खेल खेला है, जिसमें दो नागा नागरिकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई और दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। नागा बहुल इलाके में हुई इस वारदात से पूरे राज्य में रोष है। मुख्यमंत्री यमनम खेमचंद सिंह सहित कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं ने इस हिंसक घटना की तीखे शब्दों में निंदा की है और इसे मासूम लोगों पर कायराना हमला बताया है।
सेनापति में हुई गोलीबारी का पूरा ब्योरा
यह दुखद घटना शनिवार दोपहर करीब 3 बजे सेनापति जिले के कालाजान गांव में हुई। शुरुआत में प्रशासनिक अधिकारियों ने इस जगह की पहचान पड़ोसी कोंगपोकपी जिले के कलेंनजांग गांव के रूप में की थी, लेकिन बाद में इसकी सही लोकेशन स्पष्ट हुई। इस हमले में अपनी जान गंवाने वाले नागरिकों की पहचान रॉकी माओ और कुमार पौमई के रूप में की गई है। दोनों के शवों को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए सेनापति जिला अस्पताल भेज दिया गया है।
वहीं, इस गोलीबारी में दो अन्य लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं, जिनकी पहचान 33 वर्षीय अदानी मानियो और 49 वर्षीय अशीहो सानी के रूप में हुई है। इन दोनों घायलों को इलाज के लिए सेनापति के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सुरक्षा पर उठते सवाल
घटना के बाद मुख्यमंत्री यमनम खेमचंद सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने इस घातक हमले को मासूम जिंदगियों के खिलाफ हिंसा की एक कायरतापूर्ण हरकत बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने भी इस घटना को लेकर गंभीर चिंता जताई और लगातार हो रही हिंसा पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने मृतकों के बारे में अतिरिक्त जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि रॉकी सेनापति जिले के चाओवैनामई गांव के रहने वाले थे, जबकि कुमार इसी जिले के लाई शिराफी गांव के निवासी थे। एन. बीरेन सिंह ने दावा किया कि हथियारबंद हमलावर पीड़ितों के घर में घुस गए और जब वे सो रहे थे, तभी उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर क्षोभ जताते हुए उन्होंने लिखा, "इस साल की शुरुआत से अब तक 60 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, और हिंसा का यह दौर बिना किसी रोक-टोक के लगातार जारी है।" उन्होंने मांग की कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दी जाए और राज्य में कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त किया जाए।
कामजोंग जिले में भी हुआ था बड़ा हमला
सेनापति में हुई यह वारदात कामजोंग जिले में हुई एक अन्य खूनी घटना के ठीक दो दिन बाद सामने आई है। वहां भी संदिग्ध उग्रवादियों ने नागा समुदाय के चार लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी थी। शुक्रवार को पुलिस ने कामजोंग जिले में इन चारों लोगों के शव बरामद किए। मृतकों की पहचान तंगखुल नागा समुदाय के सदस्यों के रूप में हुई है, जिनके नाम बेटरसन जाजो, वरेशिम जाजो, उनके बेटे फामी जाजो और निंगथम कशाक हैं।
इंफाल के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि तलाशी अभियान के बाद इन सभी के गोली लगे शव म्यांमार सीमा के पास स्थित एक सुदूर पिलोंग गांव से बरामद किए गए। यह स्थान कामजोंग जिला मुख्यालय से लगभग 34 किलोमीटर दूर है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पड़ोसी देश म्यांमार के संदिग्ध उग्रवादी भारतीय सीमा में घुस आए थे और उन्होंने गुरुवार, 24 सितंबर को पांच ग्रामीणों के एक समूह पर घात लगाकर हमला कर दिया था। इस हमले के दौरान एक ग्रामीण किसी तरह बचकर भागने में सफल रहा और उसने तुरंत प्रशासन को इसकी सूचना दी, जिसके बाद यह खोजबीन शुरू की गई थी।
सितंबर महीने में गहराया सुरक्षा संकट
मणिपुर में सितंबर का महीना सुरक्षा के लिहाज से बेहद अशांत रहा है। इस महीने के दौरान तामेंगलोंग, कोंगपोकपी, नोनी और कामजोंग जिलों में संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा किए गए अलग-अलग हमलों में कम से कम 13 लोगों की जान जा चुकी है। लगातार हो रही इन वारदातों ने स्थानीय आबादी में गहरा डर पैदा कर दिया है और नागरिक समाज लगातार सरकार से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और उग्रवादियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग कर रहा है।



















