मणिपुर के सीमावर्ती कामजोंग इलाके में स्थित पिलोंग नगा गांव में गुरुवार शाम अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा की गई भारी गोलीबारी में चार स्थानीय नागरिकों की जान चली गई। मारे गए सभी ग्रामीण तंगखुल नगा समुदाय के सदस्य थे, जिनमें एक पिता और उनका बेटा भी शामिल है। सीमावर्ती इलाके में अचानक हुए इस जानलेवा हमले से पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया है और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
सीमा के निकट तलाशी अभियान में मिले गोलियों से छलनी शव
यह दुखद घटना जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर अंतरराष्ट्रीय सीमा के बिल्कुल नजदीक बसे गांव में घटी। स्थानीय निवासियों के अनुसार, जब यह घात लगाकर किया गया हमला हुआ, उस समय वहां कुल पांच ग्रामीण मौजूद थे। गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच एक व्यक्ति किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागने में सफल रहा और उसने तुरंत सुरक्षा बलों तथा प्रशासन को पूरी घटना की जानकारी दी।
सूचना मिलते ही पुलिस दल और स्थानीय ग्रामीणों ने सीमा से सटे दुर्गम जंगलों में तलाशी अभियान शुरू किया। गहन खोजबीन के बाद देर रात करीब 1:30 बजे जिला मुख्यालय से लगभग 34 किलोमीटर दूर एक सुनसान जगह से चार शव बरामद किए गए। सभी शवों पर गोलियों के गहरे निशान थे। मृतकों की पहचान वरीशिम जाजो, फामी जाजो, बेटरसन जाजो और निंगथेम कशक के रूप में हुई है। कानूनी औपचारिकताओं और पोस्टमार्टम परीक्षण के लिए सभी शवों को कामजोंग जिला मुख्यालय अस्पताल भेजा गया।
सीमा पार के उग्रवादी संगठन पर संदेह और बंद का आह्वान
पुलिस के अनुसार, अत्याधुनिक हथियारों से लैस हमलावरों के म्यांमार स्थित संगठन कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा (KNA-B) से जुड़े होने का अंदेशा जताया गया है। नगा नागरिक संगठनों ने भी इसी गुट पर हमले का आरोप लगाया है, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस वीभत्स घटना पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए तंगखुल नगा लोंग की कार्यसमिति ने सीमा पार आतंकवाद और इन मौतों के लिए सरकार को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है। संगठन ने शुक्रवार सुबह 7 बजे से अपने पूरे प्रभाव क्षेत्र में 24 घंटे के आपातकालीन बंद का ऐलान किया। संगठन के सचिव थानरिंगम मुइवा ने एक आधिकारिक नोटिस जारी कर स्पष्ट किया कि यह पूर्ण बंद निर्दोष नागरिकों की नृशंस हत्या के विरोध में दर्ज कराया जा रहा है।





















