मणिपुर के राजनीतिक परिदृश्य में एक नए राजनीतिक दल की औपचारिक एंट्री हुई है, जिसका नाम पीपुल्स रिफॉर्मेशन पार्टी यानी पीआरपी है। गुरुवार को इस नवपंजीकृत राजनीतिक संगठन ने अपने औपचारिक गठन की घोषणा की और यह साफ कर दिया कि वह राज्य में होने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों में पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरेगा। भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड में इस दल को फिलहाल पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में दर्ज किया गया है।
मई 2023 के जातीय तनाव के बीच राजनीतिक विकल्प
इस नए दल का उभार मणिपुर में बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण समय में हुआ है। राज्य मई 2023 से ही लंबे समय से चले आ रहे गंभीर जातीय संघर्ष और अस्थिरता का सामना कर रहा है। ऐसे तनावपूर्ण माहौल के बीच पार्टी ने जनता के सामने एक नया रास्ता पेश करने का दावा किया है। संगठन ने अपना 13 सूत्रीय घोषणापत्र भी सामने रखा है, जिसमें राज्य के भीतर शांति और सार्वजनिक व्यवस्था को फिर से बहाल करने, मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने, हथियार-मुक्त मणिपुर का निर्माण करने और विस्थापित हुए लोगों की समस्याओं का समाधान निकालने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
घाटी की 40 सीटों पर नजर और उम्मीदवारों की कड़ी जांच
मणिपुर विधानसभा की कुल 60 सीटें हैं, जिनमें से पीआरपी ने 40 निर्वाचन क्षेत्रों पर अपने उम्मीदवार उतारने की योजना बनाई है। पार्टी का मुख्य ध्यान मुख्य रूप से घाटी के इलाकों पर रहेगा। संगठन की पहली मीडिया बातचीत में पार्टी अध्यक्ष मांगसाताबाम एंडी ने राजनीतिक कार्यप्रणाली को लेकर अपना दृष्टिकोण साफ किया। एंडी के अनुसार केवल पुराने चेहरों को बदलकर नए चेहरे ले आना ही वास्तविक राजनीतिक बदलाव नहीं है, बल्कि बेहतर शासन देना और सार्वजनिक जीवन में सक्षम प्रतिनिधियों को आगे बढ़ाना ही असली सुधार ला सकता है।
दल के भीतर आम सदस्यता सभी के लिए खुली रहेगी, लेकिन चुनावी टिकट बांटने को लेकर बेहद सख्त मानदंड तय किए गए हैं। उम्मीदवारों का चयन गहन जांच-पड़ताल और उपयुक्तता की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किया जाएगा। इसके साथ ही प्रत्याशियों की पृष्ठभूमि, कार्यशैली और योग्यता से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक जांच के लिए उपलब्ध रहेंगे ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
गठबंधन से साफ इनकार और अकेले दम पर उतरने का संकल्प
पीआरपी ने चुनावी राजनीति को लेकर किसी भी तरह के समझौते से पूरी तरह इनकार किया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले या चुनाव के बाद किसी भी अन्य दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। अध्यक्ष एंडी ने साफ शब्दों में कहा कि यदि 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है, तो वह किसी के साथ मिलकर सरकार बनाने की बजाय विपक्ष में बैठना पसंद करेगी।
इसके अलावा पार्टी ने राजनीतिक फंडिंग को पूरी तरह पारदर्शी बनाने, सिर्फ नारों की बजाय ठोस नतीजों के आधार पर प्रदर्शन का आकलन करने और चुने हुए जन प्रतिनिधियों द्वारा निजी या राजनीतिक लाभ के लिए दल-बदल करने पर रोक लगाने के कदम उठाने का भी प्रस्ताव रखा है। राज्य के संसाधनों को लेकर एंडी ने इस धारणा को खारिज कर दिया कि मणिपुर में पर्याप्त संसाधनों की कमी है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कमियां और अकुशल शासन ही राज्य की अधिकांश समस्याओं की असली जड़ हैं, जिन्हें अधिक जिम्मेदार प्रशासन और कुशल शासन के जरिए पूरी तरह सुधारा जा सकता है।





















