वैश्विक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में यूरोपीय मुद्रा ने कमजोर आर्थिक आंकड़ों के झटके को दरकिनार करते हुए ब्रिटिश पाउंड के सामने अपनी बढ़त को मजबूती से थामे रखा है। शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान EUR/GBP क्रॉस तीन सप्ताह के नए उच्च स्तर 0.8610 को छूने के बाद 0.8600 के अहम स्तर से ऊपर स्थिर बना रहा। दूसरी ओर, बैंक ऑफ इंग्लैंड की सख्त नीतिगत बयानबाजी के बावजूद पाउंड को अपेक्षित सहारा नहीं मिल सका। इसके विपरीत जर्मनी के उपभोक्ता भरोसे में आई ताजा गिरावट ने घरेलू मांग को लेकर नई चिंताएं जरूर पैदा की हैं, लेकिन निवेशकों ने फिलहाल यूरो पर इसका नकारात्मक असर नहीं पड़ने दिया है।
जर्मन उपभोक्ता धारणा में तेज गिरावट और घरेलू बजट पर दबाव
न्यूरेमबर्ग इंस्टीट्यूट फॉर मार्केट डिसीजन्स और जीएफके मार्केट रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि जर्मनी में उपभोक्ता धारणा को गहरा झटका लगा है। अक्टूबर महीने के लिए उपभोक्ता विश्वास सूचकांक गिरकर -30.6 पर आ गया, जो पिछले पांच महीनों का सबसे कमजोर स्तर है। यह आंकड़ा पिछले महीने के -26.6 से काफी नीचे है और बाजार विश्लेषकों के -27.4 के अनुमान से कहीं अधिक बदतर साबित हुआ है। बाजार विशेषज्ञों को उम्मीद थी कि गिरावट सीमित रहेगी, लेकिन वास्तविक रिपोर्ट ने सुस्त रिकवरी का संकेत दिया है।
जीएफके रिपोर्ट में विशेष रूप से रेखांकित किया गया है कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें आम परिवारों की खर्च योग्य आय को तेजी से निगल रही हैं। परिवारों को लग रहा है कि यह वित्तीय दबाव आने वाले महीनों में भी बना रहेगा। इसी आशंका के चलते आय अपेक्षाओं का सब-इंडेक्स सितंबर के 1.7 से सीधे लुढ़ककर -15.0 पर पहुंच गया। जब आय पर अनिश्चितता बढ़ती है, तो उपभोक्ता बड़े खर्चों को टालने लगते हैं। आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ताओं की बचत करने की प्रवृत्ति पिछले महीने के 15.5 से उछलकर 21.5 हो गई है, जबकि खरीद योजनाओं और नए सामान लेने की तैयारी में सीधी गिरावट दर्ज की गई है।
ब्रिटिश अर्थव्यवस्था की चुनौतियां और बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीतिगत सीमाएं
जर्मनी के कमजोर आंकड़ों के बावजूद ब्रिटिश पाउंड का यूरो के मुकाबले कमजोर रहना ब्रिटेन की अंतर्निहित आर्थिक परिस्थितियों को दर्शाता है। आर्थिक मूल्यांकन के मुताबिक, यूनाइटेड किंगडम की अर्थव्यवस्था पहले से ही अपनी पूरी क्षमता से नीचे काम कर रही है। बैंक ऑफ इंग्लैंड की बैंक दर वर्तमान में 3.75% पर है, जो केंद्रीय बैंक द्वारा अनुमानित 2% से 4% के तटस्थ दायरे की ऊपरी सीमा के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी है।
इसके साथ ही, आने वाले समय में राजकोषीय नीति के और अधिक प्रतिबंधात्मक होने के आसार हैं। यह पूरा घटनाक्रम स्पष्ट संकेत देता है कि ब्याज दरों में और अधिक बढ़ोतरी की गुंजाइश बेहद सीमित है, जबकि मौजूदा वित्तीय बाजार पहले से ही काफी सख्ती की उम्मीद लगाए बैठे थे। जब केंद्रीय बैंक के पास दरें बढ़ाने का दायरा सीमित हो जाता है, तो मुद्रा के लिए अतिरिक्त तेजी दिखाना कठिन हो जाता है, जिसका सीधा फायदा यूरो को मिला है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की तेजी से डॉलर को भारी मजबूती
विदेशी मुद्रा बाजार के व्यापक परिदृश्य पर नजर डालें तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और कच्चे तेल की कीमतों में आई उछाल ने पूरे माहौल को प्रभावित किया है। ऊर्जा की कीमतें एक बार फिर $100 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई हैं। इसके साथ ही अमेरिका के पीएमआई आंकड़े कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंचे हैं और फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी के सदस्य भविष्य की ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं। इन मिले-जुले कारकों ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड को दोनों छोरों पर कई वर्षों के नए उच्च स्तर पर धकेल दिया है।
ट्रेजरी नोट्स कुल विपणन योग्य ट्रेजरी का लगभग 52% हिस्सा बनाते हैं, इसलिए बॉन्ड यील्ड में होने वाला यह तेज उछाल अमेरिकी राजकोषीय दृष्टिकोण के लिए भी विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। बढ़ते बॉन्ड प्रतिफल और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशकों ने अमेरिकी डॉलर का रुख किया है, जिससे डॉलर इंडेक्स लगभग दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
प्रमुख मुद्रा जोड़ों और सोने पर डॉलर की मजबूती का प्रभाव
अमेरिकी डॉलर के मजबूत रुख का सीधा असर अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और कमोडिटी बाजार पर देखने को मिला है
- ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में तेज गिरावट: एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान AUD/USD गिरकर अगस्त की शुरुआत के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गया। रातभर के कारोबार में 200-दिवसीय एसएमए से नीचे फिसलने के बाद यह जोड़ी 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पास बेहद कमजोर दिखाई दे रही है। तेल की वजह से फिर से उभरी महंगाई की चिंताओं और डॉलर के उछाल ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ओर से दरें बढ़ाने की संभावनाओं को पूरी तरह ढक दिया है।
- जापानी येन और हस्तक्षेप की आशंका: USD/JPY जोड़ी शुक्रवार को एशियाई सत्र में हल्की सुस्ती के साथ कारोबार करती दिखी। हाल ही में 159.00 के तीन सप्ताह के उच्च स्तर को छूने के बाद येन में बिकवाली करने वाले ट्रेडर सरकारी हस्तक्षेप के डर से सतर्क हो गए हैं। बैंक ऑफ जापान ने पिछले हफ्ते नीतिगत सामान्यीकरण की दिशा में एक और कदम उठाते हुए 7-2 के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया था, जो बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था। हालांकि इस कदम के बावजूद अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल के दबाव में जापानी मुद्रा कमजोर बनी हुई है।
- सोने की कीमतों में ठहराव: कमजोर बुनियादी माहौल के बीच सोने की कीमतों में सुस्ती बनी हुई है और यह पिछले दिन दर्ज किए गए साप्ताहिक निचले स्तर के करीब सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। डॉलर की तेज रैली में हल्का ठहराव सोने को निचली सतह पर थोड़ा सहारा जरूर दे रहा है, लेकिन फेड की सख्त नीतियों और ऊंचे बॉन्ड यील्ड के कारण सर्राफा बाजार में तेजी की गुंजाइश सीमित बनी हुई है।
लाइव तकनीकी विश्लेषण और यूरो का समग्र आउटलुक
विदेशी मुद्रा बाजार के लाइव आंकड़ों के अनुसार, EUR/USD का मौजूदा भाव 1.14 के स्तर पर चल रहा है, जो पिछले बंद स्तर 1.14 के मुकाबले 0.04% की मामूली बढ़त दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 1.13 से 1.20 के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत के 1.00x के बराबर है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 27 के स्तर पर है, जो ओवरसोल्ड स्थिति को दर्शाता है। मूविंग एवरेज में ईएमए20 1.15, ईएमए50 1.15 और ईएमए200 1.16 पर स्थित हैं, जहां ईएमए50 का ईएमए200 से नीचे जाना डेथ क्रॉस और लंबी अवधि के मंदी के रुझान की पुष्टि करता है।
बोलिंजर बैंड्स (20,2) 1.14 से 1.17 के बीच फैले हैं और भाव बैंड के अंदर ही बना हुआ है। एडीएक्स 33 पर मजबूत ट्रेंड का संकेत दे रहा है, जबकि 14-दिवसीय एटीआर 0.01 पर है। आगामी सत्रों के लिए पिवट स्तर 1.14 पर है, जिसके साथ पहला रेजिस्टेंस 1.14 और सपोर्ट 1.14 के आसपास टिका हुआ है। मुद्रा बाजार में ऊर्जा लागत और केंद्रीय बैंकों के नीतिगत निर्णयों के बीच आने वाले दिनों में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।


















