शेयर बाजार में एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) के जरिए सोने और चांदी में निवेश करने वाले रिटेल निवेशकों के लिए नियामक स्तर पर एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की गई है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ETF की वर्तमान ट्रेडिंग व्यवस्था और मूल्य निर्धारण प्रणाली में सुधार करने का फैसला लिया है। यह नई व्यवस्था 1 सितंबर 2026 से पूरे बाजार में प्रभावी रूप से लागू होगी। इस नीतिगत बदलाव का मुख्य उद्देश्य शेयर बाजार पर ट्रेड होने वाले ETF की कीमतों को उनके वास्तविक एसेट वैल्यू (NAV) के अधिक निकट रखना है, ताकि निवेशकों को किसी भी प्रकार की मूल्य विषमता का सामना न करना पड़े।
पुरानी T-2 व्यवस्था में बदलाव और नया रेफरेंस प्राइस
वर्तमान में लागू ट्रेडिंग प्रणाली के अंतर्गत ETF के प्राइस बैंड की सीमाएं तय करने के लिए T-2 नेट एसेट वैल्यू (NAV) का उपयोग किया जाता है। इसका तात्पर्य यह है कि बाजार में आज ट्रेड हो रहे फंड का रेफरेंस प्राइस दो कारोबारी दिन पुराना होता है। इस समयांतराल के कारण कई बार वैश्विक परिसंपत्ति बाजार में आए त्वरित बदलावों का असर ETF की बाजार कीमत पर सही समय पर नहीं दिखता था, जिससे फंड की बाजार कीमत और उसके पोर्टफोलियो में मौजूद वास्तविक परिसंपत्तियों के मूल्य में अंतर पैदा हो जाता था। नए नियमों के तहत सेबी ने अधिक ताजा और प्रासंगिक रेफरेंस प्राइस का प्रावधान जोड़ा है। अब ETF की विशिष्ट श्रेणी के आधार पर पिछले कारोबारी दिन का क्लोजिंग NAV या वास्तविक समय के मूल्यांकन मापदंडों का उपयोग किया जाएगा।
डायनेमिक प्राइस बैंड का नया ढांचा
मौजूदा समय में अधिकांश ETF श्रेणी के उत्पादों पर अधिकतम 20 प्रतिशत का एक निश्चित प्राइस बैंड लागू होता है। 1 सितंबर 2026 से इस पुरानी सीमा को समाप्त कर दिया जाएगा और इसकी जगह डायनेमिक प्राइस बैंड व्यवस्था लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था में संबंधित ETF जिस मूल संपत्ति को ट्रैक करता है, उसकी अंतर्निहित प्रकृति, तरलता और बाजार में उतार-चढ़ाव की तीव्रता के आधार पर प्राइस बैंड की सीमाओं को स्वचालित रूप से समायोजित किया जाएगा। इससे ट्रेडिंग सत्र के दौरान अंतरराष्ट्रीय या घरेलू बाजार में अचानक तेज हलचल होने पर ETF की कीमतों में प्रभावी और तार्किक समायोजन हो सकेगा।
गोल्ड और सिल्वर ETF के लिए प्री-ओपन कॉल ऑक्शन
विशेष रूप से कमोडिटी पर आधारित ETF जैसे गोल्ड ETF और सिल्वर ETF के लिए सेबी ने प्री-ओपन कॉल ऑक्शन सत्र शुरू करने की अनुमति दी है। चूंकि कीमती धातुओं की अंतरराष्ट्रीय कीमतें भारतीय बाजार बंद होने के बाद भी रात भर बदलती रहती हैं, इसलिए अगले दिन सामान्य ट्रेडिंग खुलने से पहले सही मूल्य का निर्धारण करना एक बड़ी चुनौती रहा है। प्री-ओपन ऑक्शन सत्र के माध्यम से बाजार के आधिकारिक रूप से खुलने से पहले ही मांग और आपूर्ति के आधार पर बेहतर और पारदर्शी मूल्य खोज संभव हो सकेगी, जिससे शुरुआती मिनटों में होने वाली अत्यधिक अस्थिरता पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
निवेशकों के लिए संभावित लाभ और बाजार तरलता
नियामक के इन सुधारात्मक कदमों से व्यक्तिगत निवेशकों और संस्थागत प्रतिभागियों दोनों को कई व्यावहारिक लाभ मिलने की उम्मीद है। जब ETF का बाजार मूल्य उसके वास्तविक NAV के अधिक करीब रहेगा, तो निवेशकों को अकारण बहुत ज्यादा प्रीमियम देने या भारी डिस्काउंट पर फंड बेचने की मजबूरी नहीं रहेगी। इसके अतिरिक्त, ज्यादा सटीक मूल्य निर्धारण से बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम और तरलता में सुधार होगा। निवेशक अपनी पोर्टफोलियो रणनीति को अधिक दक्षता के साथ निष्पादित कर सकेंगे और निष्पक्ष ट्रेडिंग माहौल का लाभ उठा सकेंगे।



















