भारतीय सर्राफा बाजार में सोने के भाव लगातार दूसरे सत्र में भी भारी दबाव में नजर आ रहे हैं। वैश्विक स्तर पर कमजोर रुख और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नीतिगत संकेतों के चलते कीमतों में यह भारी फिसलन देखने को मिली है। बाजार के जानकारों के अनुसार निवेशकों की धारणा में आए बदलाव का सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ रहा है।
वैश्विक बाजार में सोने और चांदी का हाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना गिरकर अपने साप्ताहिक निचले स्तर 4,560 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। जैक्सन होल में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श के आक्रामक रुख वाले भाषण के बाद यह गिरावट आई है। इस बयान के बाद सितंबर महीने में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़कर लगभग 50 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। इसके साथ ही हाजिर चांदी में भी भारी बिकवाली देखने को मिली और यह 4.5 प्रतिशत लुढ़ककर 66 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
एमसीएक्स पर वायदा कारोबार का हाल
घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर भी कीमती धातुओं में भारी गिरावट दर्ज की गई है। एमसीएक्स पर सोने और चांदी के वायदा भाव में रातों-रात करीब 2 प्रतिशत की गिरावट आई है। वर्तमान में एमसीएक्स पर सोना लगभग 1,56,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है, जबकि एमसीएक्स पर चांदी फिसलकर 2,36,651 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है।
केविन वॉर्श का सख्त बयान और महंगाई का मुद्दा
मई में कार्यभार संभालने के बाद यह केविन वॉर्श का पहला बड़ा भाषण था, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी है कि महंगाई में कोई खास कमी नहीं आई है। उन्होंने कहा कि नीति निर्माताओं को इस बात के स्पष्ट प्रमाण की आवश्यकता है कि जमीनी स्तर पर मूल्य दबाव कम हो रहे हैं, अन्यथा केंद्रीय बैंक को अभी और कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। उन्होंने फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के महंगाई लक्ष्य को बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया और इसे एक दृढ़ लक्ष्य बताया। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वित्तीय स्थितियां फिलहाल पर्याप्त रूप से सख्त नहीं हैं। उनके इन बहुप्रतीक्षित बश्यों से उनकी आर्थिक नीतियों के दृष्टिकोण पर अधिक स्पष्टता आई है, क्योंकि इससे पहले उनकी सीमित संवाद शैली को लेकर बाजार में अनिश्चितता थी।
कच्चे तेल की कीमतों की स्थिति
दूसरी ओर, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड का भाव 88 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रहा है, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 83 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है। इन तमाम वैश्विक कारकों का असर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के रुख पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।



















