अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार में सोने की कीमतों में एक बार फिर जोरदार उछाल देखने को मिला है। बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान सोना अपने 15 हफ्ते के नए उच्चतम स्तर 4,697 डॉलर प्रति औंस के बेहद करीब पहुंच गया, जो हाल ही में 4,650 डॉलर के स्तर से नीचे आई मामूली गिरावट के बाद एक मजबूत वापसी को दर्शाता है। लाइव मार्केट आंकड़ों के मुताबिक, हाजिर बाजार में सोना 1.48 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,707 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो इसके पिछले बंद भाव 4,638 डॉलर से काफी ऊपर है। इस दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम इसके 20-दिवसीय औसत से 8.19 गुना अधिक दर्ज किया गया। निवेशक अमेरिका के कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स के जुलाई महीने के आंकड़े जारी होने से पहले सतर्कता के साथ अपनी पोजीशन को मजबूत कर रहे हैं। अमेरिकी डॉलर (USD) में नरमी, व्यापारिक तनाव और भारत में भौतिक मांग की रिकवरी ने कीमती धातु को मजबूत सहारा दिया है।
कमजोर डॉलर और अमेरिका-कनाडा व्यापार तनाव से मिला समर्थन
वैश्विक वित्तीय बाजारों में डॉलर इंडेक्स पर दबाव देखा जा रहा है। बाजार में जोखिम लेने की धारणा सुधरने से सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग में कमी आई है। इसके अलावा, उत्तरी अमरीकी पड़ोसियों के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव ने भी ग्रीनबैक की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। कनाडा सरकार द्वारा देर मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, वह अमेरिका की ओर से लगाए गए शुल्कों के जवाब में 700 अमेरिकी उत्पादों पर 15 प्रतिशत, 25 प्रतिशत और 50 प्रतिशत की दर से जवाबी टैरिफ लागू करेगी। यह नया शुल्क नियम 8 सितंबर से प्रभावी होगा। इस नीतिगत निर्णय ने मुद्रा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे ट्रेडर डॉलर से पूंजी निकालकर सोने जैसे सुरक्षित एसेट में लगा रहे हैं।
दूसरी ओर, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा अपने बॉन्ड-बायबैक कार्यक्रम को अचानक दोगुना करने के फैसले ने भी बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करने में मदद की है। अमेरिकी ट्रेजरी के इस अप्रत्याशित कदम से वित्तीय तरलता में सुधार हुआ है, जो सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों के लिए सकारात्मक साबित हो रहा है। हालांकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव कम होने की उम्मीदों और अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी से वैश्विक स्तर पर महंगाई का तात्कालिक जोखिम थोड़ा कम हुआ है, लेकिन संरचनात्मक अनिश्चितताएं अब भी बाजार पर हावी हैं।
भारत में सोने का आयात दोगुना, भौतिक मांग में आई भारी तेजी
पश्चिम के व्यापक आर्थिक घटनाक्रमों के अलावा, एशिया में सोने की भौतिक मांग बाजार को मजबूत धरातल प्रदान कर रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जुलाई महीने के दौरान सोने की भौतिक खपत में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। लगातार दो महीनों की सुस्त खरीदारी के बाद भारतीय बाजार में मांग का वापस लौटना कीमती धातुओं के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है।
WGC के आंकड़ों के मुताबिक, भारत का सोना आयात जून के 20 टन से दोगुना होकर जुलाई में अनुमानित 40 से 45 टन के स्तर पर पहुंच गया। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए घरेलू ज्वैलर्स और खुदरा खरीदारों द्वारा की गई यह रीस्टॉकिंग अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए एक मजबूत सपोर्ट लेवल का काम कर रही है। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता देश भारत में मांग का यह सुधार साबित करता है कि कीमतों में स्थिरता आते ही भौतिक खरीदार बाजार में सक्रिय हो जाते हैं।
अमेरिकी कोर PCE आंकड़े और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का दृष्टिकोण
कीमती धातुओं के भविष्य के रुझान के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटना अमेरिका के ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस (BEA) द्वारा जारी किए जाने वाले पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स के आंकड़े हैं। पर्सनल इनकम और पर्सनल स्पेंडिंग के मासिक आंकड़ों के साथ जारी होने वाला यह इंडेक्स फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के नीति निर्माताओं द्वारा मुद्रास्फीति को मापने का सबसे पसंदीदा पैमाना माना जाता है, क्योंकि इसमें खाद्य और ऊर्जा की अस्थिर कीमतों को शामिल नहीं किया जाता।
बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि जुलाई में वार्षिक कोर PCE महंगाई दर 3.2 प्रतिशत पर स्थिर रहेगी, जबकि मासिक आधार पर इसमें 0.2 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। इस आंकड़े के परिणामों का बाजार पर दो तरह से प्रभाव पड़ सकता है
- अनुमान से कमजोर PCE आंकड़ा: यदि कोर PCE आंकड़े अनुमान से कम रहते हैं, तो इससे यह संकेत मिलेगा कि अमेरिका में महंगाई नियंत्रित हो रही है। ऐसी स्थिति में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं कम हो जाएंगी, जिससे अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड पर दबाव बनेगा और सोने की कीमतों को नई तेजी मिलेगी।
- अनुमान से मजबूत PCE आंकड़ा: इसके विपरीत, यदि PCE आंकड़ा अनुमान से अधिक आता है, तो मध्य पूर्व के ऊर्जा झटकों से उपजी महंगाई चिंताएं फिर गहरा सकती हैं। इससे फेड द्वारा सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने की उम्मीदें बढ़ेंगी, जिससे अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिलेगी और सोने में बिकवाली का दौर शुरू हो सकता है।
तकनीकी विश्लेषण: संकेतक, सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर
तकनीकी चार्ट पर सोने का ओवरऑल ट्रेंड बेहद मजबूत बना हुआ है। दैनिक चार्ट पर सोना अपने प्रमुख मूविंग एवरेज से काफी ऊपर कारोबार कर रहा है। 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) 4,522.84 डॉलर पर स्थित है, जो दीर्घकालिक तेजी के लिए मुख्य सपोर्ट का काम कर रहा है। इसके अलावा 100-दिवसीय SMA 4,378.58 डॉलर, 21-दिवसीय SMA 4,353.66 डॉलर और 50-दिवसीय SMA 4,193.74 डॉलर पर स्थित हैं। लाइव एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) में 20-दिवसीय EMA 4,419 डॉलर, 50-दिवसीय EMA 4,323 डॉलर और 200-दिवसीय EMA 4,334 डॉलर पर है।
तकनीकी संकेतकों में एमएसीडी (MACD) 132.47 पर है, जो सिग्नल लाइन 96.97 से ऊपर 35.50 का बुलिश हिस्टोग्राम दर्शा रहा है। एडीएक्स (ADX) 31 के स्तर पर है, जो एक मजबूत ट्रेंड की पुष्टि करता है। हालांकि, ऑसिलेटर निकट अवधि में सतर्कता का संकेत दे रहे हैं। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 77 पर पहुंच गया है, जो ओवरब्रॉट स्थिति को दर्शाता है। इसी तरह स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर में फास्ट लाइन 95 और सिग्नल लाइन 94 पर है। यद्यपि ओवरब्रॉट स्तरों का मतलब तुरंत ट्रेंड बदलना नहीं होता, फिर भी यह शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट बुकिंग या करेक्शन की संभावना को बढ़ाता है।
कारोबार के लिए मुख्य पिवट पॉइंट (Pivot) 4,708 डॉलर है। ऊपरी स्तरों पर पहला रेजिस्टेंस R1 4,730 डॉलर और दूसरा रेजिस्टेंस R2 4,753 डॉलर पर है। नीचे की तरफ पहला सपोर्ट S1 4,685 डॉलर और दूसरा सपोर्ट S2 4,663 डॉलर पर स्थित है। ट्रेडर्स को ध्यान रखना चाहिए कि 14-दिवसीय डेली वोलेटिलिटी ATR 77.04 पर है, जो संभावित उतार-चढ़ाव के बीच स्टॉप-लॉस निर्धारित करने में मदद करता है।
विदेशी मुद्रा बाजार का हाल: GBP/USD और EUR/USD का प्रदर्शन
सोने के अलावा विदेशी मुद्रा बाजार में भी हलचल देखी जा रही है। ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) ने अपनी पिछली गिरावट को पीछे छोड़ते हुए 1.3650 डॉलर के रेजिस्टेंस जोन के पास मामूली बढ़त दर्ज की। डॉलर में कमजोरी के कारण पाउंड को नीचे के स्तरों पर सपोर्ट मिला है।
वहीं यूरो (EUR/USD) वॉल स्ट्रीट की क्लोजिंग के बाद 1.1670 डॉलर के आसपास बना हुआ है और 1.1700 डॉलर के स्तर को पार करने की कोशिश में है। मुद्रा बाजार के निवेशक भी अमेरिकी जीडीपी डेटा के संशोधन और PCE आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं ताकि भविष्य की चाल तय की जा सके।



















