अप्रैल 2025 तक देश के सराफा बाजार में सोने की कीमत कभी भी 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर के पार नहीं गई थी। लेकिन इस ऐतिहासिक सीमा को पार करने के बाद पीली धातु ने ऐसी जोरदार तेजी दिखाई कि इसने एक समय रिकॉर्ड 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के जादुई स्तर को छू लिया। पिछले कारोबारी सत्र के दौरान 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आकर रुका, जो यह दर्शाता है कि बाजार में सोने की मजबूत पकड़ अब भी बनी हुई है और यह लगातार प्रीमियम स्तरों पर कारोबार कर रहा है।
2026 में सोने का क्या रहेगा रुख और क्यों मुश्किल है भारी गिरावट
बाजार के जानकारों और विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए सोने की कीमतों में कोई बहुत बड़ी मंदी आने की उम्मीद बहुत कम है। निवेशकों के मन में यह सवाल लगातार घूम रहा है कि क्या सोना कभी वापस पुराने सस्ते स्तरों पर लौट पाएगा। ऑगमोंट की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी के अनुसार, सोने की कीमत का वापस घटकर 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक आना फिलहाल पूरी तरह से असंभव ही नजर आता है।
विशेषज्ञों का आकलन है कि साल 2026 में सोने की दरें मुख्य रूप से 1.4 लाख रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे से ऊपर ही टिकी रहेंगी। छोटी अवधि के लिए मुनाफावसूली के चलते कीमतों में 5 से 15 फीसदी तक की गिरावट जरूर देखने को मिल सकती है, लेकिन इसे एक सामान्य तकनीकी सुधार माना जाना चाहिए। इस तरह के अस्थाई बदलावों से घबराना नहीं चाहिए क्योंकि यह किसी बड़े मार्केट क्रैश का संकेत नहीं होते हैं, बल्कि एक स्वस्थ बाजार चक्र का हिस्सा होते हैं।
किन परिस्थितियों में घट सकते हैं सोने के दाम
सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट केवल तभी दर्ज की जा सकती है जब दुनिया के आर्थिक परिदृश्य में कुछ बुनियादी और मजबूत बदलाव आएं। इसके लिए अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना सबसे जरूरी है। इसके साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखना होगा। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक सोने के बजाय अधिक ब्याज देने वाले अन्य वित्तीय विकल्पों में पैसा लगाने के लिए प्रेरित होते हैं, जिससे सोने की मांग घटती है। इसके अलावा, विभिन्न देशों के बीच जारी भूराजनीतिक तनाव का कम होना भी आवश्यक है ताकि सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की वैश्विक मांग में कमी आ सके।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की रणनीति भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। पिछले कुछ समय से विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए सोने का भंडार लगातार बढ़ा रहे हैं। यदि इन केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही आक्रामक खरीदारी की गति अचानक धीमी हो जाती है, तो सोने के दामों पर थोड़ा दबाव आ सकता है। हालांकि, जब तक ये चारों बड़े वैश्विक कारक एक साथ मिलकर बड़े पैमाने पर विपरीत दिशा में काम नहीं करते, तब तक सोने की कीमतों में कोई बड़ी मंदी देखने को नहीं मिलने वाली है।
सोने के खरीदारों के लिए क्या है सही रणनीति
अगर आप भी व्यक्तिगत उपयोग, शादी-ब्याह या निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बाजार के बिल्कुल निचले स्तर यानी बॉटम का इंतजार करना काफी जोखिम भरा फैसला साबित हो सकता है। बोनांजा के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के अनुसार, सोने के इतिहास में समय-समय पर 10 से 20 फीसदी तक का उतार-चढ़ाव आना बेहद सामान्य बात रही है। इसलिए केवल एक निश्चित न्यूनतम आंकड़े के इंतजार में बैठे रहने से निवेशक अक्सर सही समय पर खरीदारी करने का एक बड़ा मौका गंवा देते हैं।
सोने में निवेश का सबसे व्यावहारिक और सुरक्षित तरीका यह है कि बड़ी गिरावट के भ्रम में रहने के बजाय नियमित अंतराल पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खरीदारी की जाए। बाजार में चलने वाली अफवाहों या घबराहट के कारण अचानक कोई भी खरीद या बिक्री का फैसला लेने से बचना चाहिए। विशेषज्ञों की राय बिल्कुल स्पष्ट है कि महज 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक भाव गिरने की आस में अपने निवेश को टालना किसी भी निवेशक के लिए फायदेमंद निर्णय नहीं होने वाला है।



















