सोमवार को सप्ताह के पहले कारोबारी सत्र की शुरुआत में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। बाजार में यह सुस्ती ऐसे समय पर आई है जब कुछ दिन पहले ही मुकेश अंबानी की अगुवाई वाले इस बड़े कॉरपोरेट समूह ने भारत के एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए के लिए लड़ाकू विमान इंजन तैयार करने और विकसित करने हेतु रोल्स-रॉयस के साथ एक अहम रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की थी।
कारोबारी सत्र के शुरुआती आंकड़े और बाजार स्थिति
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर सोमवार को सुबह 9 बजकर 42 मिनट पर रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 0.1 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1306.65 रुपये प्रति शेयर के भाव पर कारोबार कर रहा था और उस समय कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण 17,68,229.17 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। शुरुआती घंटों के कारोबार के दौरान इस स्टॉक ने 1312.95 रुपये के intraday उच्च स्तर और 1305.25 रुपये के intraday निचले स्तर को छुआ।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और एएमसीए इंजन परियोजना
इस नई साझेदारी के तहत दोनों कंपनियां मिलकर देश में एक समर्पित एयरोस्पेस गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स स्थापित करने की संभावनाओं पर काम करेंगी। यह गठबंधन भारत के भीतर ही एएमसीए इंजन के सह-विकास के लिए एक बेहद मजबूत और आकर्षक आधार तैयार करेगा। इस पहल से देश के भीतर ही आधुनिक लड़ाकू विमानों के निर्माण की क्षमताओं को अभूतपूर्व रूप से बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इस गठबंधन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों में संप्रभु क्षमता होना बेहद जरूरी है।
भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों में संप्रभु क्षमता होना आवश्यक है।
रोल्स-रॉयस के साथ इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य उन्नत प्रोपल्शन तकनीक में उनकी विश्व-अग्रणी विशेषज्ञता को रिलायंस की तकनीकी क्षमता, विनिर्माण कौशल, बड़े पैमाने पर उत्पादन और निष्पादन कौशल के साथ जोड़कर देश में ही स्वदेशी एयरो-इंजन इकोसिस्टम तैयार करना है। इस सहकार का लक्ष्य एक ऐसी स्थायी राष्ट्रीय क्षमता का निर्माण करना है जो भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्नत प्रोपल्शन तकनीकों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सके।
एयरो गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स की रूपरेखा
रोल्स-रॉयस और रिलायंस के बीच हुआ यह समझौता एयरो गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स को ऊर्जा प्रदान करेगा, जिससे डिजाइन से लेकर विकास, विनिर्माण, परीक्षण, उत्पादन और जीवनचक्र समर्थन तक हर चरण में भारत की अपनी संप्रभु और संपूर्ण क्षमता विकसित हो सकेगी।
शेयर बाजार में पिछले प्रदर्शन और हालिया उतार-चढ़ाव
यह बात गौर करने योग्य है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर सोमवार, 17 अगस्त को निचले स्तर पर खुले थे। पिछले प्रदर्शन पर नजर डालें तो इस स्टॉक ने 5 जनवरी 2026 को 1611.20 रुपये प्रति शेयर का 52-हफ्ते का उच्च स्तर छुआ था, जबकि 24 जुलाई 2026 को यह लुढ़ककर 1250.55 रुपये प्रति शेयर के अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर तक आ गया था। कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी 7.48 प्रतिशत दर्ज किया गया है। यदि हालिया रुझानों की बात करें तो पिछले छह महीनों में रिलायंस के शेयर मूल्य में 8 प्रतिशत की गिरावट आई है और साल 2026 में अब तक इसमें लगभग 17 प्रतिशत की कमजोरी आ चुकी है।



















