अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियन डॉलर की चाल को लेकर वित्तीय विशेषज्ञों ने नए आकलन सामने रखे हैं। वित्तीय संस्थान Brown Brothers Harriman से जुड़े इलियास हद्दाद का विश्लेषण है कि ऑस्ट्रेलिया में महंगाई दर केंद्रीय बैंक के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है, जिसके चलते रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की संभावनाओं को पूरी तरह नकारा नहीं गया है। इसके बावजूद, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि सुस्त आर्थिक वृद्धि और तटस्थ अनुमानों के ऊपरी स्तर के करीब चल रहे कैश रेट को देखते हुए केंद्रीय बैंक अपनी नीतिगत दरों में लंबे समय तक ठहराव बनाए रख सकता है। मुद्रा बाजार के जानकारों का मानना है कि यह स्थिति ऑस्ट्रेलियन डॉलर के लिए एक बड़ी बाधा साबित हो सकती है।
महंगाई के आंकड़ों और अनुमानों का विश्लेषण
विश्लेषण के अनुसार, देश में मुख्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी हेडलाइन सीपीआई लगातार दूसरे महीने 4.0% सालाना रहने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके साथ ही, तिमाही आंकड़ों में ट्रिमड मीन सीपीआई के आंकड़े भी मजबूत रहने के आसार हैं। इलियास हद्दाद ने अपने नोट में स्पष्ट किया है कि हेडलाइन सीपीआई 4.0% सालाना रह सकती है, जबकि मई के 3.6% की तुलना में ट्रिमड मीन सीपीआई के 3.7% तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि मासिक सीपीआई महंगाई का मुख्य पैमाना है, लेकिन केंद्रीय बैंक का मुख्य ध्यान हमेशा तिमाही आंकड़ों में दर्ज होने वाली अंतर्निहित महंगाई पर रहता है। चालू तिमाही में ट्रिमड मीन सीपीआई के दो साल के उच्चतम स्तर यानी 3.7% तक पहुंचने का अनुमान है, जो कि पिछली तिमाही में 3.5% दर्ज किया गया था। इस तरह के आंकड़े केंद्रीय बैंक की बैठकों में ब्याज दर बढ़ाए जाने की चर्चाओं को जीवित रखते हैं।
केंद्रीय बैंक की आगामी नीतियां और भाषण
मौद्रिक नीति की दिशा तय करने के लिहाज से आने वाले दिन काफी अहम होने जा रहे हैं। रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर मिशेल बुलक मंगलवार को और सहायक गवर्नर सारा हंटर गुरुवार को सार्वजनिक भाषण देने वाली हैं। इन दोनों शीर्ष अधिकारियों के भाषणों से आगामी 11 अगस्त को होने वाली नीतिगत बैठक से पहले बाजार को जरूरी नीतिगत संकेत मिल सकते हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि इन बयानों से यह स्पष्ट होने में मदद मिलेगी कि केंद्रीय बैंक आगे चलकर क्या रुख अपनाने वाला है।
ब्याज दर फ्यूचर्स और बाजार का मूड
ब्याज दरों के मोर्चे पर बाजार का मिजाज फ्यूचर्स अनुबंधों के जरिए साफ झलकता है। आरबीए कैश रेट फ्यूचर्स के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की संभावना फिलहाल 30% आंकी जा रही है। इसके साथ ही, इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि साल के अंत तक कैश रेट बढ़कर 4.60% तक पहुंच जाएगा। मुद्रा बाजारों में इन तमाम संभावनाओं का असर साफ तौर पर देखा जा रहा है।
व्यापक वैश्विक मुद्रा बाजार की स्थिति
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख मुद्राओं की चाल भी सुगबुगाहट दिखा रही है। पाउंड-डॉलर यानी GBP/USD की जोड़ी पिछले सप्ताह के निचले स्तर से उबरते हुए नए सप्ताह की शुरुआत में मजबूत बढ़त हासिल कर रही है। यह लगातार दूसरा दिन है जब इस प्रमुख मुद्रा में तेजी दर्ज की जा रही है और यह यूरोपीय सत्र के दौरान 1.3350 के आसपास कारोबार कर रही है। इस तेजी के पीछे मध्य पूर्व के संघर्ष में ठहराव और अमेरिकी डॉलर में आई व्यापक कमजोरी मुख्य वजहें मानी जा रही हैं। बाजार के कारोबारी इस सप्ताह के अंत में आने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीतिगत घोषणाओं का इंतजार कर रहे हैं। इसी तरह, यूरो-डॉलर यानी EUR/USD की जोड़ी भी यूरोपीय सत्र में 1.3400 के करीब अपनी मजबूत बढ़त बनाए हुए है। इस intraday मजबूती का मुख्य श्रेय अमेरिका और ईरान के बीच पांच महीने पुराने युद्ध के राजनयिक समाधान की ओर बढ़ने की उम्मीदों से कमजोर पड़े अमेरिकी डॉलर को जाता है।



















