वैश्विक मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड पर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बिकवाली का दबाव साफ तौर पर देखा जा रहा है। केंद्रीय बैंक यानी बैंक ऑफ इंग्लैंड की बहुप्रतीक्षित मौद्रिक नीति समीक्षा से ठीक पहले स्टर्लिंग कमजोर दायरे में बना हुआ है। बाजार के ज्यादातर विश्लेषक और कारोबारी इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि केंद्रीय बैंक अपनी प्रमुख ब्याज दरों को बिना किसी बदलाव के 3.75 प्रतिशत के मौजूदा स्तर पर बरकरार रखने का फैसला करेगा। हालांकि, ब्याज दर के फैसले से अधिक निवेशकों का पूरा ध्यान नीतिगत दिशा-निर्देशों और आने वाले समय के रुख पर रहने वाला है। बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा भारतीय समयानुसार दोपहर बाद और अंतरराष्ट्रीय समयानुसार 11:00 GMT पर नीतिगत घोषणाएं की जानी तय हैं, जिससे बाजार में व्यापक उतार-चढ़ाव रहने के आसार हैं।
मुद्रास्फीति के आंकड़े और नीतिगत रुख की चुनौती
ब्रिटेन में आर्थिक प्राथमिकताओं के बीच महंगाई के ताजा आंकड़ों ने केंद्रीय बैंक की चुनौतियों को उजागर किया है। हाल ही में बुधवार को जारी हुए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन में हेडलाइन मुद्रास्फीति की दर सालाना आधार पर बढ़कर 3.1 प्रतिशत दर्ज की गई। यह आंकड़ा पिछले महीने यानी जुलाई में दर्ज 2.9 प्रतिशत की तुलना में अधिक है। वहीं दूसरी ओर, मुख्य महंगाई दर सालाना आधार पर 2.6 प्रतिशत पर पूरी तरह स्थिर बनी रही। मुद्रास्फीति की गति में यह इजाफा ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्रीय बैंक आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने और मूल्य स्थिरता बनाए रखने के दोहरे दबाव का सामना कर रहा है। ब्याज दरों में किसी भी तरह की ढिलाई या आक्रामक कटौती की संभावनाओं पर इस महंगाई के आंकड़ों ने फिलहाल ब्रेक लगा दिया है।
दैनिक चार्ट पर तकनीकी संकेत और प्रतिरोध स्तर
दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो जीबीपी/यूएसडी विनिमय दर कमजोर रुझान का संकेत दे रही है। यह मुद्रा जोड़ी 1.3400 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलकर 1.3381 के स्तर के इर्द-गिर्द कारोबार करती देखी गई है। चार्ट पर 20-दिवसीय घातीय गतिशील औसत यानी 20-पीरियड ईएमए 1.3498 पर स्थित है, जिसके नीचे भाव का टिकना अल्पकालिक गिरावट के रुख को स्पष्ट करता है। हालिया तेजी के बाद जोड़ी में जो मुनाफावसूली दर्ज की गई है, उसने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक यह प्रमुख ईएमए स्तर ऊपर बना रहेगा, तब तक किसी भी बड़ी रिकवरी पर सीमित बढ़त ही देखने को मिलेगी। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि जब तक 1.3498 का प्रतिरोध स्तर मजबूती से पार नहीं होता, तब तक बिकवाल बाजार पर हावी रह सकते हैं।
रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई (14) भी फिसलकर 30 के निचले दायरे में पहुंच गया है। यह गिरावट यह संकेत देती है कि बाजार में बिकवाली की स्थिति जरूरत से ज्यादा होने यानी ओवरसोल्ड की स्थिति बन रही है। हालांकि, मौजूदा ओवरहेड रेजिस्टेंस का दबाव इतना भारी है कि यह ओवरसोल्ड संकेत किसी बड़े तकनीकी उछाल को ट्रिगर करने में फिलहाल सक्षम नजर नहीं आ रहा है। तेजी की स्थिति में प्रारंभिक प्रतिरोध 20-दिवसीय ईएमए 1.3498 पर बना हुआ है, जिसे निर्णायक रूप से पार करने के बाद ही मंदी का असर कम होगा और सुधारात्मक तेजी के दरवाजे खुलेंगे। इसके विपरीत, यदि गिरावट जारी रहती है तो नीचे की ओर 30 जुलाई का निचला स्तर 1.3333 सबसे अहम समर्थन स्तर के रूप में काम करेगा। यदि यह दायरा भी टूटता है, तो बाजार की निगाहें 28 जुलाई के निचले स्तर 1.3274 पर टिक जाएंगी।
वैश्विक बाजारों का रुख और अन्य मुद्राओं की चाल
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर की चाल ने अन्य प्रमुख मुद्राओं को भी प्रभावित किया है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यानी एयूडी/यूएसडी में नई खरीदारी देखने को मिली और यह 0.7100 के स्तर को फिर से छूने में सफल रहा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के बाद डॉलर में आई तेजी जुलाई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचकर कुछ हद तक थमती दिखी। इसके साथ ही, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के अनुमानों और अमेरिका व ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदों ने जोखिम उठाने की क्षमता को सुधारा है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को अच्छा सहारा मिला।
दूसरी ओर, डॉलर बनाम जापानी येन यानी यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र में 156.00 के स्तर से नीचे की संक्षिप्त गिरावट से संभलता दिखाई दिया। यह जोड़ी पिछले सत्र में दो सप्ताह के शीर्ष स्तर पर पहुंचने के बाद तीन दिनों की अपनी बढ़त की लय को तोड़ने की कगार पर है। फेडरल रिजर्व की घोषणाओं के बाद अमेरिकी डॉलर सात सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद थोड़ा सुस्त हुआ है। वहीं, बैंक ऑफ जापान द्वारा मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने के आक्रामक रुख के संकेतों ने जापानी येन को स्थिरता प्रदान की है। अब सारा ध्यान शुक्रवार को आने वाले बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले पर स्थानांतरित हो गया है। इसके अलावा कमोडिटी बाजार में सोने के भाव शुरुआती कारोबार में 4,300 डॉलर प्रति औंस के ऊपर नए सिरे से बिकवाली के दबाव में आ गए, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक घोषणाओं के बाद बने 4,235 डॉलर के छह सप्ताह के निचले स्तर से रिकवरी रुक गई।
जापान की ऐतिहासिक कम दरें और वैश्विक प्रभाव
वैश्विक वित्तीय तंत्र में जापान की अल्ट्रा-लो ब्याज दरों ने एक दशक से भी अधिक समय तक दुनिया भर के खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। इस दीर्घकालिक व्यवस्था ने जापानी येन को दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बना दिया था, जिसे कैरी ट्रेड के जरिए वैश्विक संपत्तियों में निवेश किया जाता रहा। हालांकि, इस सप्ताह बैंक ऑफ जापान द्वारा मौद्रिक नीतियों को सख्त किए जाने की प्रबल संभावनाओं के बीच यह पारंपरिक समीकरण अब एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है। जहां दुनिया भर की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरों में जोरदार बढ़ोतरी की थी, वहीं जापान लंबे समय तक दुनिया के सबसे बड़े अपवाद के रूप में शून्य और नकारात्मक दरों पर टिका रहा था, जिसका संतुलन अब बदलता हुआ दिखाई दे रहा है।


















