वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में साझा यूरोपीय मुद्रा यानी यूरो ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले एक सीमित दायरे में फंसा नजर आ रहा है। बुधवार को यूरो ने 0.8550 के निचले दायरे से उबरने की कोशिश की, लेकिन 0.8570 के स्तर पर पहुंचते ही बिकवाली के दबाव का सामना करना पड़ा। इस समय बाजार में कारोबारियों की निगाहें पूरी तरह से बैंक ऑफ इंग्लैंड की आगामी ब्याज दर नीति पर टिकी हुई हैं। केंद्रीय बैंक द्वारा गुरुवार को अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखने का व्यापक अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, नीति निर्धारण समिति के भीतर पूरी तरह सहमति नहीं है और ऐसा माना जा रहा है कि तीन सदस्य ब्याज दरों में बढ़ोतरी के पक्ष में अपना मत दे सकते हैं।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की सतर्क नीति और पाउंड पर दबाव
डॉयचे बैंक ने ब्रिटिश मुद्रा को लेकर चेतावनी जारी करते हुए संकेत दिया है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड का इंतजार करो और देखो वाला सतर्क रुख पाउंड की दिशा पर भारी पड़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि केंद्रीय बैंक सख्त कदम उठाने से बचता है या मौद्रिक सख्ती के चक्र को रोकता है, तो इससे ब्रिटिश मुद्रा की गति मंद पड़ सकती है। बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान ब्रिटिश पाउंड ने अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मिश्रित प्रदर्शन किया, जिसमें कनाडाई डॉलर के मुकाबले पाउंड की मजबूती सबसे अधिक दर्ज की गई। मुद्रा बाजारों में एक-दूसरे के सापेक्ष बदलावों को दर्शाने वाले आंकड़ों में अलग-अलग जोड़ों में उतार-चढ़ाव साफ देखा जा सकता है, जहां आधार मुद्रा और कोट मुद्रा का अनुपात बदलती प्राथमिकताओं को दर्शा रहा है।
यूरो पाउंड जोड़ी के तकनीकी स्तर और चुनौतियां
यूरो के खरीदार यानी तेजी के पक्षधर कारोबारी 0.8570 के पुराने समर्थन क्षेत्र को फिर से पार करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह वही स्तर है जो 8 सितंबर को निचले स्तर के रूप में दर्ज हुआ था और अब ऊपर की ओर एक मजबूत बाधा बन चुका है। जब तक यह स्तर पार नहीं होता, तब तक हालिया कारोबारी दायरे के ऊपरी छोर यानी 0.8600 के क्षेत्र की ओर आगे बढ़ने का रास्ता अवरुद्ध बना रहेगा। दूसरी तरफ यदि यूरो में गिरावट गहराती है, तो 0.8546 से 0.8552 के बीच का क्षेत्र महत्वपूर्ण सहारा दे सकता है। यह दायरा 26 अगस्त और 15 सितंबर के निचले स्तरों से जुड़ा हुआ है। यदि यह सहारा भी टूटता है, तो अगस्त के सबसे निचले स्तर 0.8531 की तरफ गिरावट का जोखिम बढ़ जाएगा।
फेडरल रिजर्व के बाद अमेरिकी डॉलर की चाल थमी
मुद्रा बाजार के व्यापक परिदृश्य को देखें तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के कारण डॉलर में जो जोरदार तेजी आई थी, वह जुलाई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर को छूने के बाद गुरुवार के एशियाई सत्र में थोड़ी सुस्त पड़ी है। अमेरिकी डॉलर के इस ठहराव से अन्य प्रतिस्पर्धी मुद्राओं को राहत मिली है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में नए खरीदारों की सक्रियता लौटी है, जिससे यह 0.7100 के मनोवैज्ञानिक स्तर को दोबारा हासिल करने में कामयाब रहा। रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की तरफ से ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के अनुमानों और अमेरिका व ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीदों ने बाजार के जोखिम उठाने की क्षमता को सहारा दिया है, जिसका सीधा फायदा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मिला है।
जापानी येन और बैंक ऑफ जापान का बड़ा फैसला
अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी एशियाई सत्र के दौरान 156.00 के नीचे की संक्षिप्त गिरावट से उबरने में जुटी दिखी। डॉलर के सात सप्ताह के शीर्ष स्तर से रुकने के बाद यह जोड़ी अपनी तीन दिनों की लगातार बढ़त के सिलसिले को थामने की कगार पर है। जापानी येन को बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में सख्त कदम उठाने की उम्मीदों से ताकत मिल रही है। जापान में एक दशक से भी अधिक समय तक अति-निम्न ब्याज दरों ने वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। अब जबकि बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह नीति सख्त किए जाने की उम्मीद है, यह पुराना दौर एक नए मोड़ में प्रवेश कर सकता है। वैश्विक स्तर पर जब अधिकांश बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने ब्याज दरें बढ़ाई थीं, तब जापान लंबे समय तक दुनिया में एक अपवाद बना रहा था। इस पूरे परिदृश्य में शुक्रवार को आने वाले बैंक ऑफ जापान के फैसले पर निगाहें लगी हैं।
सोने के भाव में ऊपरी स्तरों पर बिकवाली
बहुमूल्य धातुओं के बाजार में सोना गुरुवार के शुरुआती कारोबार में 4,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर नए बिकवाली दबाव का सामना कर रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति घोषणाओं के बाद सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई थी और यह छह सप्ताह के निचले स्तर 4,235 डॉलर तक फिसल गया था। हालांकि वहां से बाजार ने उबरने का प्रयास किया, लेकिन 4,300 डॉलर से ऊपर टिके रहना अब भी खरीदारों के लिए एक कठिन चुनौती बना हुआ है। केंद्रीय बैंकों की सख्त होती ब्याज दरों और मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच सोने के निवेशक नए उत्प्रेरकों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


















