गुरुवार की एशियाई कार्रवाई में पाउंड-अमेरिकी डॉलर मुद्रा-युग्म दिशा तय करने में असमर्थ रहा। कारोबारी बैंक ऑफ इंग्लैंड की दर बैठक का इंतजार कर रहे हैं, इसलिए नई खरीदारी या बिकवाली से पहले रुकावट दिख रही है।
एशियाई सत्र में बियरिश समेकन
GBP/USD ने गिरावट के बाद संभलने की कोशिश की, लेकिन यह संभलना मजबूत वापसी में नहीं बदला। मुद्रा-युग्म गुरुवार को 1.3380-1.3375 के क्षेत्र में कारोबार कर रहा था, यानी 30 जुलाई के बाद के निचले स्तर के बेहद करीब। इस संकुचित रेंज में खरीदारों को ऊपर की ओर ठोस गति देने में सावधानी बरतनी पड़ रही थी, जबकि बिकवाले अमेरिकी डॉलर की मजबूती का लाभ उठा रहे थे।
मुख्य कारण डॉलर का जुलाई के अंत के बाद अपने उच्च स्तर के पास टिके रहना है। जब अमेरिकी मुद्रा मजबूत रहती है, तो पाउंड के मुकाबले GBP/USD को ऊपर उठाने के लिए अधिक सहारा चाहिए होता है। फिलहाल व्यापारी बैंक ऑफ इंग्लैंड से जुड़े नीति संकेत मिलने तक नए दिशात्मक सौदों से दूरी बनाए हुए हैं, जिससे जोड़ी में समेकन बना हुआ है।
फेड की दर वृद्धि ने डॉलर को दिया आधार
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेड ने बुधवार नीति दर में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि की। फैसला बाजार ने पहले से ही अपेक्षित किया था, इसलिए सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि भविष्य के बारे में बताया गया संकेत भी अहम रहा। फेड ने इस वर्ष के अंत तक एक और दर संबंधी कार्रवाई की संभावना जताई और इस कड़े रवैये ने अमेरिकी डॉलर को ताजा सहारा दिया।
बुधवार को मिली तेजी डॉलर ने गुरुवार की एशियाई कार्रवाई में भी बनाए रखी। इससे GBP/USD में कोई बड़ी वापसी करना कठिन हो गया, क्योंकि डॉलर पक्षधरों को फेड के कड़े रवैये से अतिरिक्त मदद मिल रही थी। दरों को लेकर कड़ा संकेत अमेरिकी मुद्रा की मांग को सहारा देने वाला है, इसलिए पाउंड को ऊपर उठने में रुकावट मिल रही है।
मिडिल ईस्ट के जोखिम ने भी संभाला डॉलर
मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव मुद्रा बाजार के लिए एक अतिरिक्त कारक बना हुआ है। ऐसी स्थिति में निवेशक सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों की ओर मुड़ते हैं, और यहां अमेरिकी डॉलर को सहारा मिल रहा है। यह जोखिम GBP/USD में अतिरिक्त नुकसान की संभावना को मजबूत करता है, क्योंकि डॉलर की मांग पाउंड की वापसी को दबा सकती है।
इसलिए समीकरण केवल यूनाइटेड किंगडम से जुड़े संकेतों तक सीमित नहीं है। फेड की कड़ी नीति और मिडिल ईस्ट का जोखिम दोनों डॉलर के पक्ष में काम कर रहे हैं, जबकि पाउंड को अपनी स्थिति सुधारने के लिए अलग से मजबूत समर्थन की जरूरत है। यही मिली-जुली स्थिति जोड़ी को 1.3380-1.3375 के आसपास रोके हुए है।
नीचे की ओर नज़र रखने लायक स्तर
यदि GBP/USD में बिकवाली फिर से तेज होती है, तो तकनीकी नजरिए से पहला सहारा 61.8% फिबो रिट्रेसमेंट पर 1.3346 पर मिलता है। यह वह क्षेत्र है जहां खरीदार गिरावट रोकने की कोशिश कर सकते हैं।
- पहला सहारा: 61.8% फिबो रिट्रेसमेंट 1.3346 पर है, जो तत्काल स्तर माना जा रहा है।
- दूसरा सहारा: 78.6% स्तर 1.3256 के पास है और यह पहले स्तर से टूटने पर गहरी गिरावट का आधार बन सकता है।
- पिछला चक्रीय निचला हिस्सा: 1.3141 के आसपास का क्षेत्र अगला महत्वपूर्ण संदर्भ है, जहां पहले का चक्रीय निचला स्तर दिखाई देता है।
इन स्तरों का महत्व इसलिए है कि डॉलर की मजबूती जारी रहने पर पाउंड को हर छोटे समर्थन को तोड़ने के लिए बेहतर खरीदारी चाहिए। फिलहाल 1.3346, 1.3256 और 1.3141 को निचली दिशा में मुख्य निगरानी बिन्दु माना जा सकता है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की भूमिका क्या है
बैंक ऑफ इंग्लैंड यूनाइटेड किंगडम की मौद्रिक नीति तय करता है। इसका मुख्य लक्ष्य ‘प्राइस स्टेबिलिटी’ यानी मूल्य स्थिरता है, जिसे स्थिर महंगाई दर के रूप में 2% पर समझा जाता है। इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए बैंक बेस लेंडिंग दरों में बदलाव करता है।
बीओई वह दर तय करता है जिस पर वह वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देता है। इसी प्रक्रिया में बैंक एक-दूसरे से भी उधार लेते हैं, और यही क्रम पूरी अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों का स्तर तय करने में मदद करता है। ब्याज दरों में बदलाव सीधे पाउंड स्टर्लिंग के मूल्य को भी प्रभावित करता है, इसलिए बीओई की बैठक GBP/USD के लिए अहम घटना है।
महंगाई लक्ष्य से ऊपर हो तो क्या होता है
जब महंगाई बैंक ऑफ इंग्लैंड के लक्ष्य से ऊपर चली जाती है, तो बैंक ब्याज दरें बढ़ाकर प्रतिक्रिया देता है। इससे लोगों और कारोबारों के लिए उधार लेना महंगा हो जाता है, क्योंकि क्रेडिट तक पहुंचने की लागत बढ़ती है।
पाउंड के लिए यह संकेत आमतौर पर सकारात्मक माना जाता है। ऊंची ब्याज दरें यूनाइटेड किंगडम को वैश्विक निवेशकों के लिए अपना धन रखने का अधिक आकर्षक स्थान बना सकती हैं। जब बाहर से पूंजी आने की संभावना बढ़ती है, तब पाउंड स्टर्लिंग को समर्थन मिल सकता है।
महंगाई लक्ष्य से नीचे आए तो नीति बदल सकती है
महंगाई लक्ष्य से नीचे आना आर्थिक विस्तार के धीमा पड़ने का संकेत हो सकता है। ऐसे में बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरें घटाने पर विचार कर सकता है, ताकि उधार सस्ता हो और कारोबारों को निवेश के लिए प्रोत्साहन मिले।
सस्ती क्रेडिट से कंपनियां उधार लेकर विस्तार योजनाओं में पैसा लगाने की कोशिश कर सकती हैं। लेकिन मुद्रा बाजार के लिए दरों में कटौती का संकेत पाउंड स्टर्लिंग के लिए नकारात्मक हो सकता है, क्योंकि कम ब्याज दरें यूनाइटेड किंगडम में पैसा रखने की आकर्षकता घटा सकती हैं।
क्वांटिटेटिव ईजिंग की अंतिम रणनीति
बहुत कठिन आर्थिक परिस्थितियों में बैंक ऑफ इंग्लैंड क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी QE लागू कर सकता है। QE का उद्देश्य अटकी हुई वित्तीय प्रणाली में क्रेडिट का प्रवाह बड़े पैमाने पर बढ़ाना होता है।
यह उपाय आखिरी विकल्प माना जाता है, क्योंकि इसे तब अपनाया जाता है जब ब्याज दरें घटाने से जरूरी नतीजा नहीं मिलता। QE में बैंक पैसा छापकर संपत्तियां खरीदता है, आमतौर पर सरकारी बॉन्ड या AAA रेटिंग वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड, और इन्हें बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं से खरीदा जाता है। इस प्रक्रिया से पाउंड स्टर्लिंग आमतौर पर कमजोर होता है।
क्वांटिटेटिव टाइटनिंग उल्टा असर देती है
क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी QT, QE का विपरीत चरण है। इसे तब अपनाया जाता है जब अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही हो और महंगाई बढ़ने लगे।
QE के तहत बैंक ऑफ इंग्लैंड वित्तीय संस्थाओं से सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदता है, ताकि उन्हें उधार बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा सके। QT में बैंक अतिरिक्त बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और अपने पास पहले से मौजूद बॉन्डों के परिपक्व होने पर मूलधन का पुनर्निवेश भी रोक देता है। यह रवैया आमतौर पर पाउंड स्टर्लिंग के लिए सकारात्मक माना जाता है।
अब निगाहें बैंक ऑफ इंग्लैंड पर
मौजूदा बाजार में तीन बातें एक साथ काम कर रही हैं। फेड की 25 बेसिस पॉइंट की दर वृद्धि, इस वर्ष के अंत तक अतिरिक्त कार्रवाई का संकेत और मिडिल ईस्ट का जोखिम डॉलर को मजबूती दे रहे हैं। दूसरी ओर, बैंक ऑफ इंग्लैंड का आगामी नीति निर्णय पाउंड के लिए अगला बड़ा परीक्षण है।
इसी कारण व्यापारी अभी 1.3380-1.3375 के आसपास सावधानी से खड़े हैं और नए दिशात्मक दांव से बच रहे हैं। यदि डॉलर को जुलाई के अंत के उच्च स्तर के पास सहारा मिलता रहा, तो GBP/USD की अर्थपूर्ण वापसी पर दबाव बना रहेगा। वहीं बीओई से मिलने वाले संकेत तय करेंगे कि पाउंड 1.3346, 1.3256 और 1.3141 जैसे सहारा स्तरों की ओर कितना नीचे जाता है।


















