वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर पर लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है, जिसके चलते ब्रिटिश पाउंड में लगातार चौथे सत्र में मजबूत खरीदारी का रुख देखा जा रहा है। सप्ताह के शुरुआती कारोबार में यह मुद्रा जोड़ी मध्य 1.3600 के स्तर के आसपास सकारात्मक दायरे में कारोबार कर रही है। पिछले सप्ताह शुक्रवार को यह अपने 11 फरवरी के बाद के सबसे ऊंचे स्तर के बेहद करीब पहुंच गई थी। बाजार के फंडामेंटल संकेत स्पष्ट रूप से तेजड़ियों के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं, जो पिछले करीब एक महीने से चल रही तेजी को आगे भी समर्थन देने का संकेत दे रहे हैं।
डॉलर पर दबाव और ट्रेजरी यील्ड की स्थिति
फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की संभावनाओं के घटने और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट के कारण अमेरिकी डॉलर लगातार कमजोर हो रहा है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई के आंकड़े डॉलर की गिरावट को एक सीमित दायरे में रखने का काम कर सकते हैं। तेल बाजार में अस्थिरता के कारण विश्लेषकों का मानना है कि साल के अंत तक फेडरल रिजर्व को कम से कम एक बार ब्याज दरों में बदलाव करना पड़ सकता है, जिससे डॉलर में आक्रामक मंदी की पोजीशन बनाने से व्यापारी फिलहाल बच रहे हैं।
महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े और आगामी कार्यक्रम
निवेशकों और कारोबारियों की निगाहें अब इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी पर्सनल कंजप्शन एक्सपेंडिचर यानी PCE प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों पर टिकी हुई हैं, जिन्हें बुधवार को जारी किया जाना है। इसके तुरंत बाद जैक्सन होल सिंपोजियम में फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श का संबोधन होना है, जो बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। बाजार के जानकार फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के भविष्य को लेकर स्पष्ट संकेत तलाश रहे हैं, जो निकट भविष्य में मुद्रा बाजार की चाल और इस करेंसी जोड़ी की दिशा तय करेंगे।
विदेशी मुद्रा बाजार और अन्य परिसंपत्तियों की चाल
सप्ताह के अंत में यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 1.1670 के आसपास मामूली नुकसान के साथ कारोबार करती दिखी, क्योंकि यह 1.1700 के आंकड़े को पार करने में एक बार फिर असफल रही। इसी बीच, एशियाई सत्र के दौरान सोने की कीमतों में भी कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली, हालांकि यह सुरक्षित निवेश के रूप में 4,600 डॉलर के ऊपर टिकने में कामयाब रहा। भू-राजनीतिक मोर्चे पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद डॉलर की कमजोरी ने सोने की चमक को बनाए रखा है, हालांकि निवेशक भी अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और जैक्सन होल सिंपोजियम के भाषण से पहले सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी के बायबैक अभियान का प्रभाव
बुधवार को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपने कैलेंडर से हटकर एक बड़ा कदम उठाया, जिस पर बाजार की गहरी नजर रही। विभाग ने दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर घोषणा की कि वह 10 से 20 वर्ष और 20 से 30 वर्ष के सेक्टरों में तरलता समर्थन बायबैक संचालन के आकार को कम से कम दोगुना कर देगा। इसके तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से प्रभावी होगी और 4 नवंबर तक जारी रहेगी, जिसका असर बाजार की नकदी पर पड़ना तय है।



















