चीन के अर्थतंत्र में रिकवरी के नए संकेत देखने को मिल रहे हैं। नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक अगस्त महीने में चीन की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर सालाना आधार पर बढ़कर 0.8% पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा जुलाई महीने में दर्ज की गई 0.5% की वृद्धि के मुकाबले बेहतर है और बाजार विशेषज्ञों द्वारा जताए गए 0.8% के अनुमान के बिल्कुल अनुरूप है। इस आंकड़े के सामने आने के बाद एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान वैश्विक मुद्रा बाजारों में मिलाजुला रुख देखा जा रहा है, जिसका सीधा असर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जिंस बाजारों पर पड़ा है।
चीन के अगस्त महंगाई आंकड़ों में तेजी
चीनी सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि देश में मांग की स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है। मासिक आधार (MoM) पर देखें तो अगस्त में चीन की सीपीआई दर 0.4% रही। यह जुलाई महीने में दर्ज 0.1% की गिरावट के मुकाबले उल्लेखनीय सुधार है। विश्लेषकों ने अगस्त के लिए मासिक स्तर पर 0.3% की बढ़त की संभावना जताई थी, लेकिन वास्तविक आंकड़े इस अनुमान को पार कर गए।
इसके साथ ही उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) यानी कारखानों के थोक मूल्य सूचकांक में भी मजबूत बढ़ोतरी देखी गई है। अगस्त में चीन का पीपीआई सालाना आधार पर 3.8% बढ़ा, जो जुलाई में 3.5% रहा था। बाजार के जानकारों ने पीपीआई में 3.7% की वृद्धि का अनुमान लगाया था। कारखाने के स्तर पर कीमतों का यह इजाफा यह दर्शाता है कि चीन के औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन लागत और मांग में धीरे-धीरे मजबूती आ रही है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और चीनी अर्थव्यवस्था का गहरा संबंध
चीन के आर्थिक आंकड़ों का सीधा प्रभाव ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) पर पड़ता है। आंकड़े आने के बाद AUD/USD मुद्रा जोड़ी 0.07% की तेजी के साथ 0.7220 के स्तर पर कारोबार करती दिखी। कारोबारी बुधवार के एशियाई सत्र के दौरान 0.7200 के महत्वपूर्ण स्तर से ऊपर अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे नजर आए।
चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापारिक संबंध बेहद मजबूत हैं। चीन, ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। जब चीनी अर्थव्यवस्था में सुधार होता है, तो वहां ऑस्ट्रेलियाई कच्चे माल, वस्तुओं और सेवाओं की मांग में बढ़ोतरी होती है। मांग बढ़ने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की विनिमय दर को सीधा समर्थन मिलता है। इसके विपरीत, यदि चीन की आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ती है, तो ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर दबाव बन जाता है। यही कारण है कि चीन के किसी भी प्रमुख आर्थिक आंकड़े का असर सीधे AUD/USD जोड़ी की विनिमय दरों में दिखाई देता है।
लोह अयस्क निर्यात और ऑस्ट्रेलिया का व्यापार संतुलन
ऑस्ट्रेलिया के निर्यात ढांचे में लौह अयस्क सबसे महत्वपूर्ण उत्पाद है। वर्ष 2021 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया हर साल लगभग 118 अरब डॉलर मूल्य के लौह अयस्क का निर्यात करता है, और इस निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा चीन को भेजा जाता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में लौह अयस्क की कीमतें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की चाल तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
सामान्य नियम यह है कि जब लौह अयस्क के दाम बढ़ते हैं, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मांग में भी इजाफा होता है, जिससे मुद्रा मजबूत होती है। इसके अलावा, ऊंचे लौह अयस्क दामों से ऑस्ट्रेलिया का व्यापार संतुलन (Trade Balance) सकारात्मक बनता है। व्यापार संतुलन किसी देश के कुल निर्यात मूल्य और कुल आयात खर्च का अंतर होता है। जब किसी देश का निर्यात राजस्व उसके आयात खर्च से अधिक होता है, तो उस देश की मुद्रा को विदेशी खरीदारों द्वारा की जाने वाली खरीदारी से मजबूती मिलती है।
रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की मौद्रिक नीति और ब्याज दरें
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की विनिमय दर को प्रभावित करने वाला एक अन्य प्रमुख कारक रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की मौद्रिक नीति है। RBA देश के अंतर-बैंक उधार दरों का निर्धारण करता है, जिससे अर्थव्यवस्था की समग्र ब्याज दरों का ढांचा तय होता है। RBA का मुख्य लक्ष्य देश में मुद्रास्फीति दर को 2% से 3% के स्थायी दायरे में बनाए रखना है।
यदि RBA अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में अपनी ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर रखता है, तो इससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर आकर्षक बनता है। बाजार में RBA द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं ने AUD को समर्थन दिया है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय बैंक द्वारा की जाने वाली क्वांटिटेटिव ईजिंग (Quantitative Easing) नीति मुद्रा के लिए नकारात्मक होती है, जबकि क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (Quantitative Tightening) नीति मुद्रा के मूल्य को बढ़ाने में मदद करती है।
रॉयटर्स तानकान सर्वे के बाद जापानी येन में मजबूती
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान जापानी येन (JPY) में भी जोरदार खरीदारी देखी गई। USD/JPY मुद्रा जोड़ी पर बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे यह मंगलवार को बने लगभग सात महीने के निचले स्तर के करीब बनी रही। जापानी येन को मजबूत रॉयटर्स तानकान (Reuters Tankan) बिजनेस सर्वे के आंकड़ों से समर्थन मिला है।
सर्वे के सकारात्मक नतीजों से बाजार प्रतिभागियों में यह विश्वास बढ़ा है कि बैंक ऑफ जापान (BoJ) अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की प्रक्रिया जारी रखेगा। बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत ढील को कम करने की उम्मीदों और अमेरिकी डॉलर की चौतरफा कमजोरी के कारण USD/JPY पर दबाव बना हुआ है, हालांकि आगामी अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों से पहले निवेशक सतर्क भी दिखाई दे रहे हैं।
अमेरिकी सीपीआई आंकड़ों से पहले सोने की कीमतों में गिरावट
कीमती धातुओं के बाजार में सोने (Gold) में लगातार चौथे दिन नकारात्मक रुख देखा गया। एशियाई कारोबारी सत्र में सोने की हाजिर कीमतें $4,350 प्रति औंस के स्तर से नीचे गिरकर एक सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गईं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी बैठकों में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की चिंताओं ने सोने पर दबाव बनाया है, क्योंकि ऊंची ब्याज दरें बिना प्रतिफल वाली धातु के आकर्षण को कम कर देती हैं।
हालांकि, जापानी येन की मजबूती के बीच अमेरिकी डॉलर सूचकांक में सुस्ती बनी हुई है, जिससे सोने को निचले स्तरों पर कुछ सहारा भी मिल रहा है। सर्राफा निवेशक अब अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों के आने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि फेडरल रिजर्व के भविष्य के कदमों का स्पष्ट संकेत मिल सके।
अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड में रिकॉर्ड तेजी
ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भले ही पिछले महीनों की तुलना में स्थिर नजर आ रही हों, लेकिन मिडिल डिस्टिलेट यानी डीजल बाजार से अलग संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड के बीच का अंतर यानी डीजल क्रैक स्प्रेड पहली बार $100 प्रति बैरल के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया।
दिन के कारोबार के दौरान अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड $102.00 प्रति बैरल से अधिक के रिकॉर्ड intraday स्तर पर पहुंच गया। यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि रिफाइनिंग क्षमता और तैयार ईंधन की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में खिंचाव बना हुआ है, जिससे क्रूड की तुलना में रिफाइंड डीजल की कीमतें काफी ऊंची बनी हुई हैं।
भू-राजनीतिक तनाव और बाजार का समग्र रुझान
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में कई वैश्विक कारक एक साथ प्रभाव डाल रहे हैं। एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव तथा फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने अमेरिकी डॉलर की भारी गिरावट को रोकने का काम किया है। वहीं दूसरी तरफ, बाजारों में जोखिम लेने की भावना (Risk-on Sentiment) सुधरने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी मुद्राओं को लाभ मिल रहा है। निवेशक इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं, जो वैश्विक मुद्रा बाजार की आगे की दिशा तय करेंगे।



















