अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बढ़त के रुझान के साथ कारोबार करता नजर आया। AUD/USD मुद्रा जोड़ी 0.7220 से 0.7225 के दायरे में मजबूती से टिकी रही, जो 14 मई के बाद के उच्चतम स्तर के बेहद करीब है। एक दिन पहले ही इस मुद्रा जोड़ी ने इस ऊपरी स्तर को छुआ था। हालांकि चीन की ओर से जारी किए गए मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बाद बाजार में कोई बहुत बड़ा उछाल देखने को नहीं मिला, फिर भी विभिन्न वैश्विक कारकों के संयुक्त प्रभाव के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को लगातार समर्थन मिल रहा है।
चीन के मुद्रास्फीति आंकड़े और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर उनका असर
चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार अगस्त महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित मुख्य महंगाई दर सालाना आधार पर बढ़कर 0.8 प्रतिशत पर पहुंच गई। इससे पिछले महीने यानी जुलाई में यह आंकड़ा 0.5 प्रतिशत दर्ज किया गया था। मासिक आधार पर देखा जाए तो अगस्त में उपभोक्ता महंगाई दर 0.4 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में इसमें 0.1 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी और बाजार विश्लेषकों ने इस बार 0.3 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान लगाया था। इसके अलावा थोक महंगाई को दर्शाने वाला उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) भी अगस्त में सालाना आधार पर 3.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जो कि 3.7 प्रतिशत के अनुमानित आंकड़े और पिछले महीने के 3.5 प्रतिशत के स्तर से अधिक है।
चीन को ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार माना जाता है, इसलिए चीनी अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के प्रदर्शन का एक प्रमुख संकेतक माना जाता है। हालांकि इन बेहतर आंकड़ों के तुरंत बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में कोई सीधी बड़ी तेजी दर्ज नहीं की गई, लेकिन मजबूत आर्थिक बुनियाद ने इस मुद्रा जोड़ी को 0.7200 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर टिकी निगाहें
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार की भविष्य की दिशा अब काफी हद तक अमेरिका से आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। गुरुवार को अमेरिका का उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) और शुक्रवार को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) जारी होने वाला है। ये आंकड़े अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Fed) की भावी ब्याज दर नीति का स्पष्ट संकेत देंगे, जिससे अमेरिकी डॉलर की मांग और AUD/USD जोड़ी की चाल तय होगी।
ऊर्जा दरों में बढ़ोतरी के कारण अमेरिका में महंगाई का दबाव फिर से बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से वित्तीय बाजारों में यह धारणा मजबूत हो रही है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस महीने के अंत में अपनी उधार दरों में फिर से बढ़ोतरी कर सकता है। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते राजनयिक और सैन्य तनाव के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को समर्थन मिल रहा है। ये कारक अमेरिकी डॉलर में किसी भी बड़ी गिरावट को रोकने में मददगार साबित हो रहे हैं, जिससे AUD/USD मुद्रा जोड़ी की बढ़त सीमित हो गई है।
जापानी येन की मजबूती से USD/JPY पर बना दबाव
दूसरी ओर जापानी येन (JPY) में आई मजबूती के कारण अमेरिकी डॉलर को अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले भी संघर्ष करना पड़ रहा है। बुधवार को एशियाई सत्र में USD/JPY मुद्रा जोड़ी में नए सिरे से बिकवाली का दबाव देखा गया। टैंकन व्यापार सर्वेक्षण के सकारात्मक नतीजों ने बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने और ब्याज दरों में वृद्धि जारी रखने के पक्ष को और मजबूत कर दिया है।
बैंक ऑफ जापान की इस सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों ने जापानी येन को काफी बल दिया है, जिससे मंगलवार को USD/JPY दर लगभग सात महीने के निचले स्तर के पास पहुंच गई थी। हालांकि वैश्विक राजनीतिक अनिश्चितताओं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं के कारण अमेरिकी डॉलर को थोड़ा सहारा मिल रहा है, जो आने वाले अमेरिकी महंगाई आंकड़ों से पहले इस मुद्रा जोड़ी की गिरावट को थामने का काम कर रहा है।
सोने की कीमतों में लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज
मुद्रा बाजार के अलावा कमोडिटी बाजार में भी हलचल तेज है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना बुधवार को लगातार चौथे कारोबारी दिन गिरावट के रुझान के साथ कारोबार करता दिखा। एशियाई सत्र के दौरान सोने की हाजिर कीमतें गिरकर 4,350 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे आ गईं, जो एक सप्ताह का सबसे निचला स्तर है।
फेडरल रिजर्व द्वारा चालू माह में ब्याज दर में बढ़ोतरी की प्रबल संभावनाओं के कारण बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने में निवेश का आकर्षण कम हुआ है। हालांकि जापानी येन में आई जोरदार तेजी के कारण अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में ज्यादा उछाल नहीं आ पाया, जिससे सोने को निचले स्तरों पर हल्का समर्थन मिल रहा है। व्यापारी अब सर्राफा बाजार को नई दिशा देने के लिए अमेरिका के महंगाई आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।
डीजल क्रैक स्प्रेड ने छुआ 100 डॉलर प्रति बैरल का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
कच्चे तेल का बाजार भले ही बाहरी तौर पर स्थिर नजर आ रहा हो, लेकिन रिफाइंड ईंधन का बाजार बहुत अलग कहानी बयां कर रहा है। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, जो कि अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और डब्ल्यूटीआई (WTI) कच्चे तेल के भाव के बीच का अंतर होता है, इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया। कारोबार के दौरान यह प्रीमियम 102.00 डॉलर प्रति बैरल से अधिक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
डीजल क्रैक स्प्रेड में आई यह ऐतिहासिक बढ़ोतरी वैश्विक स्तर पर रिफाइनिंग क्षमता की तंगी और परिवहन ईंधन की भारी मांग को दर्शाती है। यदि डीजल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो इससे माल ढुलाई और उत्पादन लागत में इजाफा होगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव और अधिक बढ़ सकता है। यही वजह है कि केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना फिलहाल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।


















