एशियाई व्यापार सत्र के दौरान विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो की मांग में तेजी दर्ज की गई है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की महत्वपूर्ण नीतिगत बैठक और अमेरिका के प्रमुख मुद्रास्फीति आंकड़ों की घोषणा से पहले यूरो-डॉलर जोड़ी 1.1630 के स्तर के पास कारोबार कर रही है। वैश्विक वित्तीय बाजारों की निगाहें केंद्रीय बैंकों के मौद्रिक फैसलों पर टिकी हुई हैं, जिससे करेंसी मार्केट में हलचल बढ़ गई है।
तकनीकी विश्लेषण और प्रमुख समर्थन स्तर
दैनिक चार्ट पर यूरो-डॉलर जोड़ी का रुझान सकारात्मक बना हुआ है। यह मुद्रा जोड़ी बॉलिंजर मिडल बैंड और 100 दिवसीय मूविंग एवरेज से ऊपर बनी हुई है, जो बाजार में खरीदारों की मजबूत स्थिति को दर्शाती है। नीचे का बॉलिंजर बैंड एक व्यापक मांग क्षेत्र का निर्माण करता है, जबकि ऊपरी बैंड तत्काल तेजी को सीमित कर रहा है। 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI लगभग 57 के स्तर पर है, जो अत्यधिक खरीद के बिना सकारात्मक गति का संकेत देता है।
गिरावट की स्थिति में पहला तात्कालिक समर्थन बॉलिंजर मिडल बैंड के पास 1.1622 पर स्थित है। यदि कीमत इससे नीचे फिसलती है, तो 100 दिवसीय मूविंग एवरेज 1.1560 के आसपास अगला सहारा देगा। इसके बाद 1.1538 के करीब स्थित निचला बॉलिंजर बैंड एक मजबूत समर्थन क्षेत्र के रूप में कार्य करेगा, जहाँ खरीदार पुनः सक्रिय हो सकते हैं। दूसरी ओर, तेजी के मामले में पहला प्रमुख प्रतिरोध 1.1705 के आसपास ऊपरी बॉलिंजर बैंड पर है। इस स्तर से ऊपर दैनिक क्लोजिंग मिलने पर आने वाले सत्रों में यूरो नए उच्च स्तरों की ओर बढ़ सकता है।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की नीति और दर वृद्धि की संभावना
जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी, यूरोज़ोन के 20 सदस्य देशों के लिए केंद्रीय बैंक के रूप में कार्य करता है। ईसीबी का प्राथमिक कार्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसके अंतर्गत मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना और आर्थिक वृद्धि को गति देना शामिल है। ब्याज दरों में बदलाव करना ईसीबी का सबसे प्रमुख मौद्रिक हथियार है। आमतौर पर उच्च ब्याज दरें या दर बढ़ोतरी की उम्मीदें यूरो को मजबूती प्रदान करती हैं।
ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल वर्ष में आठ बार मौद्रिक नीति संबंधी बैठकें आयोजित करती है। इन बैठकों में फैसले यूरोज़ोन के राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों और ईसीबी की अध्यक्ष क्रिस्तीन लगार्ड सहित छह स्थायी सदस्यों द्वारा लिए जाते हैं। आगामी गुरुवार को होने वाली बैठक में ईसीबी द्वारा अपनी बेंचमार्क ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी किए जाने की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है।
मुद्रास्फीति और आर्थिक आंकड़ों का असर
यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति को उपभोक्ता कीमतों के सामंजस्यकृत सूचकांक यानी HICP के माध्यम से मापा जाता है। यदि मुद्रास्फीति की दर ईसीबी के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी रहती है, तो केंद्रीय बैंक को दरों में वृद्धि करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। अन्य वैश्विक बाजारों की तुलना में अधिक ब्याज दरें यूरोपीय क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाती हैं, जिससे यूरो की मांग में बढ़ोतरी होती है।
इसके अतिरिक्त, यूरोज़ोन की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं यानी जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन के आर्थिक आंकड़े अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ये चार देश यूरोज़ोन की कुल अर्थव्यवस्था का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के PMI आंकड़े, रोजगार दर और उपभोक्ता भावना सर्वेक्षण जैसे संकेतक यूरो की चाल तय करते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था विदेशी निवेश को आकर्षित करती है और दरों में वृद्धि को प्रोत्साहन देती है। व्यापार संतुलन भी यूरो के मूल्य को प्रभावित करता है, जहाँ सकारात्मक व्यापार संतुलन मुद्रा को ताकत देता है।
ग्लोबल फॉरेक्स मार्केट में यूरो का महत्व
यूरो दुनिया की दूसरी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है, जो केवल अमेरिकी डॉलर से पीछे है। यूरोज़ोन के 20 यूरोपीय संघ देशों में इस्तेमाल होने वाली यह मुद्रा वैश्विक विदेशी मुद्रा लेनदेन में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, कुल विदेशी मुद्रा सौदों में यूरो की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत रही है, जिसका औसत दैनिक कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा है।
यूरो-डॉलर जोड़ी दुनिया में सबसे अधिक ट्रेड होने वाली करेंसी जोड़ी है, जो कुल वैश्विक फॉरेक्स लेनदेन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा कवर करती है। इसके बाद यूरो-येन 4 प्रतिशत, यूरो-पाउंड 3 प्रतिशत और यूरो-ऑसी 2 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते हैं। यही कारण है कि ईसीबी के फैसलों का असर वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर व्यापक रूप से देखने को मिलता है।
अन्य प्रमुख करेंसी जोड़ों की स्थिति
एशियाई व्यापार सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर जोड़ी यानी AUD/USD 0.7200 के स्तर से ऊपर बनी हुई है। ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक द्वारा दर बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं से ऑसी को सहारा मिल रहा है, जबकि जापानी येन में मजबूती के कारण अमेरिकी डॉलर में कमजोरी देखी जा रही है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और फेडरल रिजर्व के सख्त रुख से डॉलर को कुछ समर्थन भी मिल रहा है।
जापानी येन और अमेरिकी डॉलर जोड़ी यानी USD/JPY में भी बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। रॉयटर्स तानकन व्यापार सर्वेक्षण के मजबूत आंकड़ों ने बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत सामान्यीकरण जारी रखने की संभावना को बढ़ा दिया है। इससे जापानी येन को ताकत मिली है और यह मुद्रा जोड़ी अपने लगभग सात महीने के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रही है।
सोना और कच्चे तेल के बाजार की हलचल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की गई है। एशियाई सत्र में सोना 4,350 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे गिरकर एक सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया। अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा इस महीने दर बढ़ोतरी की चिंताओं के कारण गैर-प्रतिफल वाली धातु पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, येन की तेजी के कारण अमेरिकी डॉलर की सीमित बढ़त सोने को कुछ हद तक सहारा दे सकती है।
दूसरी ओर, ऊर्जा बाजार में डीजल की कीमतों ने नया रिकॉर्ड बनाया है। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड यानी अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और WTI कच्चे तेल के बीच का अंतर पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। इंट्राडे कारोबार के दौरान यह प्रीमियम 102.00 डॉलर प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो तेल बाजार में आपूर्ति संबंधी चिंताओं को उजागर करता है।



















