अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। सऊदी अरब की ओर से कच्चे तेल का निर्यात बढ़ने की संभावनाओं, वाशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक प्रगति तथा अमेरिका में तेल भंडार में अप्रत्याशित बढ़ोतरी के चलते आपूर्ति संकट की चिंताएं काफी हद तक कम हो गई हैं। इसी दबाव के बीच वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड टूटकर 99 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI 89 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता नजर आया।
बाजार के जानकारों एवा मांथे और वॉरेन पैटरसन के अनुसार, ब्रेंट क्रूड में लगातार छठे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई है। अगस्त 2025 के बाद से यह ब्रेंट की सबसे लंबी गिरावट का दौर है। इस लगातार बिकवाली के कारण तेल की कीमतों में कुल मिलाकर 9.5% से अधिक का नुकसान हो चुका है। हालांकि इस हालिया गिरावट के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें साल-दर-साल के आधार पर अब भी 60% से अधिक ऊपर बनी हुई हैं। दूसरी तरफ, उत्पादन में कमी और ठंडे मौसम के अनुमानों की वजह से अमेरिका में प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेजी का रुख देखा जा रहा है।
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन फिर से चालू
सऊदी अरब ने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर परिचालन दोबारा शुरू कर दिया है। इस कदम से जल्द ही यानबू टर्मिनल से कच्चे तेल का निर्यात फिर से बहाल होने की पूरी उम्मीद है। यह पाइपलाइन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बायपास करती है। लगभग 70 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली यह परिवहन प्रणाली धीरे-धीरे बंद पड़े निर्यात प्रवाह को फिर से शुरू करने में सक्षम है, जिससे आने वाले हफ्तों में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी वार्ता
भू-राजनीतिक मोर्चे पर भी तनाव कम होने के संकेत मिले हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों के साथ हालिया वार्ताओं को काफी सकारात्मक बताया है। इन चर्चाओं के बाद दोनों देशों के बीच आगे कूटनीतिक प्रगति की उम्मीदें जगी हैं, जिससे मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट आने की आशंकाएं काफी हद तक कमजोर पड़ गई हैं। हालांकि बाजार इस वार्ता के घटनाक्रमों के साथ-साथ आगामी ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन पर भी नजर बनाए हुए है।
अमेरिकी तेल भंडार में अप्रत्याशित वृद्धि
कीमतों पर ताजा दबाव अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट यानी API के हालिया आंकड़ों से भी देखने को मिला। API के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले हफ्ते अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार में 17 लाख बैरल की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके विपरीत, बाजार विश्लेषक 5,78,000 बैरल की गिरावट का अनुमान लगा रहे थे। इसके उलट, गैसोलीन और डिस्टिलेट के स्टॉक में प्रत्येक में 22 लाख बैरल की गिरावट आई। ऊर्जा बाजार अब इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि के लिए एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी EIA की साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।
मुद्रा बाजार और कीमती धातुओं की स्थिति
वित्तीय बाजारों के अन्य हिस्सों में भी उठापटक जारी है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी AUD/USD पर नया बिकवाली दबाव देखा गया और यह 0.7100 के स्तर का परीक्षण कर रहा था। ऑस्ट्रेलिया के शुरुआती पीएमआई आंकड़ों में विनिर्माण क्षेत्र में संकुचन देखा गया, जबकि सेवा क्षेत्र की वृद्धि लगातार दूसरे महीने धीमी रही। इसके साथ ही, मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण इस मुद्रा जोड़ी पर दबाव बना हुआ है, जबकि व्यापारी गुरुवार को होने वाले महत्वपूर्ण ट्रंप-शी सम्मेलन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन यानी USD/JPY बुधवार को एशियाई सत्र में 157.00 के मध्य स्तर पर कारोबार करता दिखा, जो पिछले शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब है। बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00% से बढ़ाकर 1.25% करने के बावजूद जापानी येन कमजोर बना रहा। फेडरल रिजर्व के सख्त मौद्रिक रुख के समर्थन से डॉलर मजबूत बना हुआ है, हालांकि जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन में और गिरावट को सीमित किया है। वहीं, फेडरल रिजर्व के आक्रामक दृष्टिकोण के चलते सोने की कीमतों में भी यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में गिरावट का सिलसिला जारी रहा, जिससे यह पिछले दिन के 4,300 डॉलर से नीचे के स्तर से हुई रिकवरी को गंवाता दिखा।


















