अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में कमजोरी दर्ज की गई है। अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान फिसलकर 94.00 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गया। पिछले सप्ताह के अपने उच्चतम स्तर की तुलना में WTI तेल की कीमतों में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। बाजार में यह नरमी मुख्य रूप से सऊदी अरब से सितंबर के महीने में कच्चे तेल के निर्यात में हुई उल्लेखनीय बढ़ोतरी की वजह से आई है, जिससे वैश्विक आपूर्ति बाधित होने को लेकर बनी तात्कालिक चिंताएं काफी हद तक शांत हुई हैं।
सऊदी आपूर्ति में मजबूती और आपूर्ति संबंधी चिंताओं में कमी
सऊदी अरब से कच्चे तेल का प्रवाह उम्मीद से अधिक मजबूत बना हुआ है। जेपी मॉर्गन की समीक्षा के अनुसार, ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन में व्यवधान आने के बावजूद सऊदी अरब से तेल की आपूर्ति आश्चर्यजनक रूप से ठोस बनी रही है। इस मजबूत आपूर्ति प्रवाह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कमी से जूझ रहे खरीदारों को बड़ी राहत दी है। वैश्विक बाजार में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर जो तीव्र घबराहट देखी जा रही थी, वह सऊदी निर्यात में सुधार के आंकड़ों के बाद धीरे-धीरे कम होती दिखाई दे रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और नौसैनिक सुरक्षा
ऊर्जा परिवहन के लिहाज से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य में भी कच्चे तेल की खेपों में बड़ा सुधार दर्ज किया गया है। यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने स्पष्ट किया कि पिछले दो सप्ताह के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल के जहाजों की संख्या पिछले छह महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि इस समुद्री मार्ग में अमेरिकी नौसेना की मजबूत सुरक्षा तैनाती और पानी में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को सफलतापूर्वक साफ किए जाने के कारण वाणिज्यिक टैंकरों की आवाजाही काफी सुगम और सुरक्षित हुई है।
पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक संकट और कीमतों में सुरक्षा प्रीमियम
आपूर्ति में सुधार के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट नहीं आ रही है और भाव 100 डॉलर के दायरे से अधिक दूर नहीं खिसक पा रहे हैं। इसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया क्षेत्र में बना गंभीर भू-राजनीतिक गतिरोध है, जिसने कच्चे तेल की कीमतों पर एक ठोस रिस्क प्रीमियम बनाए रखा है। यमन की तेहरान समर्थित हूती मिलिशिया ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच बयानों के जरिए नई धमकियों का आदान-प्रदान देखने को मिला है। यह क्षेत्रीय संघर्ष अब अपने सातवें महीने में प्रवेश करने की कगार पर है और पूरी तरह से अनिर्णायक स्थिति में फंसा हुआ है।
ऊर्जा अवसंरचना पर हमले और विश्लेषकों का नजरिया
वीकेंड के दौरान सऊदी अरब के विभिन्न ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए ताजा हमलों के बाद तेल की कीमतों को फिर से सहारा मिल सकता है। ओसीबीसी के विश्लेषक क्रिस्टोफर वोंग का मानना है कि यैनबू और अन्य स्थानों पर हुए हमलों को सऊदी अधिकारियों द्वारा विफल कर दिए जाने और ऊर्जा अवसंरचना को कोई नया नुकसान न पहुंचने की पुष्टि के बावजूद बाजार सतर्क बना हुआ है।
विश्लेषकों का कहना है कि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पहले से क्षतिग्रस्त है और यैनबू में लोडिंग का काम बाधित रहा है। यह स्थिति इस बात की सख्त याद दिलाती है कि आपूर्ति में रुकावट के जोखिम अभी खत्म नहीं हुए हैं। क्रिस्टोफर वोंग के अनुसार, जब तक सऊदी अरब से आपूर्ति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती और ऊर्जा ढांचे पर होने वाले हमले थम नहीं जाते, तब तक कच्चे तेल में और बड़ी गिरावट सीमित ही रहने के आसार हैं।
अन्य वित्तीय बाजारों और मुद्राओं की स्थिति
कच्चे तेल में गिरावट के इस दौर के बीच अन्य वैश्विक वित्तीय संपत्तियों में भी दिलचस्प हलचल देखी जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7100 के स्तर से ऊपर स्थिर बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर की हालिया नरमी में थोड़ी रुकावट आई है, जबकि पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम रेट को जस का तस रखने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर थोड़ा दबाव रहा। हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी के अनुमान तथा आगामी ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन से पहले ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को समर्थन मिल रहा है।
जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 157.00 के नीचे नरम पड़ता दिखा। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान द्वारा किए गए रेट चेक के बाद मौद्रिक हस्तक्षेप की बढ़ती आशंकाओं ने येन को थोड़ी ताकत दी है। जापान में अवकाश के चलते भी कारोबारी सतर्क हैं, जबकि रूस-यूक्रेन तथा पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव से अमेरिकी डॉलर की गिरावट सीमित रही है। इसके साथ ही बैंक ऑफ जापान ने अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, जो मौद्रिक नीति को सामान्य करने की दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है।
सोने के भाव और वैश्विक बॉन्ड बाजार का मिजाज
कमोडिटी बाजार में सोने में भी यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में बिकवाली का दबाव देखा गया। सोना करीब 0.50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ 4,350 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था। इसके बावजूद पीली धातु पिछले बुधवार को छुए गए छह सप्ताह के निचले स्तर से काफी ऊपर बनी हुई है। निवेशक पश्चिम एशिया संकट के घटनाक्रम और मुद्रास्फीति पर इसके असर पर नजर गड़ाए हुए हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियों की दिशा तय होगी।
वित्तीय बाजार वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के अंतिम हफ्तों में एक विचित्र दौर से गुजर रहे हैं। अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें घट रही हैं, जबकि यूरोपीय और अमेरिकी शेयर बाजार बढ़त के साथ खुलने की तैयारी में दिखे। बाजार का तनाव मुख्य रूप से सरकारी बॉन्ड बाजार में केंद्रित रहा है, जहां अमेरिकी और यूरोपीय यील्ड में शुक्रवार देर रात तेज उछाल दर्ज किया गया था।

















