किशोरावस्था के शुरुआती दिनों में जब स्कूल से जल्दी घर लौटने की वजह पूछी गई थी, तब केट टोलो को केवल यही सुनने को मिला था कि महिलाओं से जुड़े इन मामलों पर खुलकर बात नहीं की जाती। उस वक्त उनके पिता ने बातचीत वहीं खत्म कर दी और आगे बढ़ गए। सालों तक उनके मन में मासिक धर्म और उससे जुड़े दर्द को लेकर यही धारणा बनी रही कि यह एक ऐसा विषय है जिस पर चुप्पी साध लेना ही बेहतर माना जाता है। जब वह बीस वर्ष की आयु के शुरुआती दौर में थीं, तब शौच के दौरान होने वाले असहनीय दर्द की वजह से उन्हें आपातकालीन चिकित्सा कक्ष में भर्ती होना पड़ा था। उस समय डॉक्टरों ने आशंका जताई थी कि वह एंडोमेट्रियोसिस नाम की एक जटिल बीमारी से जूझ रही हो सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार यह पुरानी स्थिति प्रजनन आयु वर्ग की लगभग 10 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करती है।
गर्भाशय की आंतरिक परत जैसे ऊतकों के असामान्य प्रसार से पैदा होने वाली यह बीमारी अत्यंत दर्दनाक और भारी माहवारी, पेल्विक फ्लोर की कमजोरी, आंतों की समस्याओं और शारीरिक संबंधों के दौरान तीव्र दर्द के रूप में सामने आती है। चिकित्सकों ने तब टोलो को लैप्रोस्कोपी कराने की सलाह दी थी। यह एक सर्जिकल प्रक्रिया होती है जिससे एंडोमेट्रियोसिस की आधिकारिक पुष्टि की जाती है और प्रभावित ऊतकों को काटकर हटाया जाता है। टोलो ने इस आक्रामक सर्जरी से साफ इनकार कर दिया था। उनका मानना था कि शरीर पर चीर-फाड़ कराना उनके लिए स्वीकार्य विकल्प नहीं था।
कठिन रूटीन और बायोमार्कर ट्रैकिंग का सिलसिला
वर्ष 2026 की शुरुआत में टोलो ने अपने साथी ब्रायन जॉनसन के साथ मिलकर एक विशेष स्वास्थ्य सेवा परियोजना पर काम शुरू किया। ब्रायन जॉनसन तकनीक क्षेत्र के जाने-माने बहुकरोड़पति और बायोहैकर हैं जो कठोर जीवनशैली और स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के दम पर खुद को दीर्घायु बनाने के अभियान के लिए पहचाने जाते हैं। स्वास्थ्य जांच के दौरान जब टोलो ने एंडोमेट्रियोसिस के अपने पुराने संघर्ष को साझा किया, तो जॉनसन इस बीमारी का सटीक और गैर-आक्रामक समाधान तलाशने के प्रयास में पूरी तरह जुट गए।
पिछले वर्ष के अंत में अपने रिश्ते को सार्वजनिक करने के बाद जॉनसन ने टोलो को महिला बायोहैकर के रूप में पेश किया। दोनों द्वारा स्थापित वेलनेस कंपनी इमोर्टल्स से मिले 2.6 मिलियन डॉलर के कोष की मदद से टोलो ने अपने मासिक धर्म चक्र के दौरान 1,500 से अधिक बायोमार्कर्स की गहन निगरानी शुरू की। इसमें रक्त, मूत्र और मल के नियमित परीक्षण शामिल हैं। प्रतिदिन लगभग चार घंटे तक खिंचाव, लार संग्रहण, त्वचा परीक्षण, स्कैनिंग और मांसपेशियों के व्यायाम जैसी लंबी प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।
तीस वर्षीय टोलो पहले फैशन मार्केटिंग क्षेत्र में कार्यरत थीं। वर्ष 2021 में वह जॉनसन की न्यूरोटेक कंपनी कर्नेल में कार्यकारी सहायक और विशेष परियोजना निदेशक बनीं। स्वभाव से खुद को अंतर्मुखी बताने वाली टोलो शुरुआत में इस व्यापक शारीरिक निगरानी को लेकर सहज नहीं थीं। उन्हें चिंता और अवसाद की समस्या पहले से रही है। इस नए प्रोटोकॉल के दूसरे हफ्ते में रेड-लाइट थेरेपी के दौरान इंटरनेट कनेक्शन बंद होने पर उन्हें गंभीर घबराहट का दौरा भी पड़ा था। इसके बावजूद उनका कहना है कि यह पूरा प्रयास एक बड़े उद्देश्य के लिए किया जा रहा है और वह अन्य महिलाओं की भलाई के लिए अपनी शारीरिक और मानसिक सीमाओं को आगे बढ़ा रही हैं।
मासिक धर्म के रक्त से ऑर्गेनॉइड बनाने का प्रयोग
इस परियोजना का मुख्य केंद्र एंडोमेट्रियोसिस की पहचान और इलाज के लिए गैर-शल्य चिकित्सा के रास्ते खोजना है। दोनों ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि बिना किसी सर्जरी के, सिर्फ लार, रक्त परीक्षण और विशेष अल्ट्रासाउंड के जरिए 42 दिनों के भीतर टोलो की स्थिति का आकलन किया गया, जबकि पहले कराए गए ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड और एमआरआई में कुछ भी असामान्य नहीं आया था। अब उनका अगला कदम टोलो के मासिक धर्म के रक्त की कोशिकाओं से पेट्री डिश में ऑर्गेनॉइड तैयार करना है, ताकि विभिन्न दवाओं और उपचारों के प्रभावों की जांच की जा सके और बाद में पारंपरिक बायोप्सी से इसके नतीजों का मिलान किया जा सके।
इस प्रक्रिया के तहत टोलो हर कुछ घंटों में मेंस्ट्रुअल कप से रक्त एकत्र करके ट्यूब में रखती हैं और फिर उसे बर्फ के बक्से में प्रयोगशाला भेजती हैं। यह प्रक्रिया बेहद जटिल है क्योंकि कोशिकाओं के नष्ट होने से पहले उन्हें समय पर लैब पहुंचाना आवश्यक होता है। टोलो का लक्ष्य है कि भविष्य में आम महिलाएं भी बिना किसी छोटी सर्जरी या चीर-फाड़ के घर बैठे अपने रक्त के नमूनों से एंडोमेट्रियोसिस की जांच करवा सकें।
चिकित्सा विशेषज्ञों की राय और नैदानिक चुनौतियां
पेन स्टेट हेल्थ में मिनिमली इनवेसिव गायनेकोलॉजिकल सर्जरी विभाग की प्रमुख क्रिस्टिन रिले के अनुसार एंडोमेट्रियोसिस की पहचान करना हमेशा से बहुत कठिन रहा है। प्रजनन अंगों में ऊतकों के फैलाव की मात्रा और लक्षणों की तीव्रता के बीच सीधा संबंध हमेशा दिखाई नहीं देता। हालांकि डॉक्टर मरीज के बयानों और अल्ट्रासाउंड के आधार पर बीमारी का अनुमान लगाते हैं, लेकिन आज भी लैप्रोस्कोपी सर्जरी ही इसकी आधिकारिक पुष्टि का सबसे पुख्ता पैमाना माना जाता है। इसी कारण कई मरीजों को सही निदान पाने में 5 से 10 साल तक का समय लग जाता है।
हाल के वर्षों में सरल जांच विधियों के विकास पर काम तेज हुआ है। उदाहरण के तौर पर यूनाइटेड किंगडम में एंडोटेस्ट नाम के लार आधारित परीक्षण को अस्थायी नैदानिक उपयोग की अनुमति मिली है। यह टेस्ट माइक्रोआरएनए बायोमार्कर्स की पहचान करता है। हालांकि डॉक्टर रिले का मानना है कि यह तकनीक भले ही आशाजनक लगे, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका में इसे तुरंत व्यापक मंजूरी मिलना या डॉक्टरों द्वारा सर्जरी की जगह इसे अपनाना निकट भविष्य में संभव नहीं दिखता।
वहीं कनेक्टिकट के इल्यूम फर्टिलिटी की स्त्री रोग विशेषज्ञ इलाना रेसलर का कहना है कि किसी भी चिकित्सा पद्धति को व्यापक रूप से लागू करने से पहले उसका ठोस वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी है। केवल एक व्यक्ति पर किए गए परीक्षण के आधार पर निकाले गए निष्कर्ष पूरी आबादी के लिए उपयोगी साबित नहीं हो सकते।
सार्वजनिक धारणा और भविष्य के उत्पाद
ब्रायन जॉनसन इस पूरी कवायद को प्रेम और समर्पण का प्रतीक बताते हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य जांच से जुड़े कुछ निजी दृश्यों को साझा करने पर लोगों ने सवाल भी उठाए हैं, लेकिन जॉनसन का तर्क है कि इन प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रियाओं पर बिना किसी हिचकिचाहट के खुली बातचीत होनी चाहिए। विपणन पृष्ठभूमि से आने वाली टोलो का मानना है कि इससे लोग उनके और जॉनसन के काम को बेहतर तरीके से समझ पा रहे हैं।
पहले खून के प्लाज्मा के आदान-प्रदान और रिवर्स-एजिंग के अजीबोगरीब प्रयोगों के लिए आलोचना झेलने वाले जॉनसन की सार्वजनिक छवि में इस नए अभियान के बाद सकारात्मक बदलाव आया है। जॉनसन के मुताबिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता टूल्स की मदद से सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं के विश्लेषण से पता चला है कि उनके प्रति नकारात्मक टिप्पणियां जो पहले 80 प्रतिशत थीं, अब घटकर 70 से 75 प्रतिशत सकारात्मक प्रतिक्रिया में बदल चुकी हैं। साथ ही टोलो के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या भी अप्रैल 2026 के बाद से तीन गुना से अधिक बढ़ गई है।
वैश्विक बाजार विश्लेषण रिपोर्टों के अनुसार एंडोमेट्रियोसिस जांच से जुड़ा बाजार वर्ष 2034 तक 2.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। हालांकि टोलो और जॉनसन ने इस शोध को तुरंत किसी उत्पाद में बदलने से फिलहाल इनकार किया है, लेकिन उनकी कंपनी पहले से ही पोस्टमेनोपॉजल महिलाओं के लिए टॉपिकल एस्ट्राडियोल और त्वचा के लिए ट्रेटिनॉइन क्रीम जैसे उत्पाद उपलब्ध करा रही है। टोलो का कहना है कि मासिक धर्म के रक्त आधारित परीक्षण की सफलता पर ठोस निष्कर्ष तक पहुंचने में अभी कम से कम 8 से 12 महीने का समय लगेगा।
अत्यधिक तापमान और शारीरिक सीमाओं की परीक्षा
टोलो अपने शरीर पर कई अन्य कड़े प्रयोग भी कर रही हैं। इनमें शरीर का तापमान मापने वाली विशेष गोली निगलकर सौना बाथ के दौरान अपने आंतरिक तापमान को 102.4 डिग्री फ़ारेनहाइट तक ले जाने का परीक्षण शामिल था, जिसका उद्देश्य अत्यधिक गर्मी का मासिक धर्म चक्र पर असर देखना था। इस दौरान 25 मिनट के भीतर उन्हें सिरदर्द और मतली की गंभीर समस्या होने लगी थी, लेकिन उन्होंने प्रयोग बीच में रोकने से मना कर दिया। बाद में यह जांचने के लिए उनका एक्स-रे भी कराया गया कि तापमान मापने वाली गोली पेट में फंसी तो नहीं रह गई।
टोलो का कहना है कि आर्थिक और सामाजिक संसाधनों की उपलब्धता की वजह से वह इस तरह के जोखिम भरे परीक्षण करने की स्थिति में हैं। उनका मानना है कि यदि उनके इन व्यक्तिगत अनुभवों और आंकड़ों से आने वाले समय में महिलाओं के स्वास्थ्य अनुसंधान को नई दिशा मिल सकती है, तो यह प्रयास पूरी तरह सार्थक है।



















