दक्षिण कोरियाई वॉन में हाल के महीनों में आई लगातार मजबूती अब थमने की कगार पर पहुंच गई है। जून के आखिरी हफ्तों से शुरू हुए एक स्थिर दौर के तहत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले वॉन में लगातार गिरावट दर्ज की गई थी और यह जोड़ी 1340 के निचले स्तर के करीब आ गई थी। इस शुरुआती तेजी के पीछे मेमोरी चिप्स के बाजार में जबरदस्त उछाल और कोरियाई निर्माताओं की ओर से किए गए भारी-भरकम निवेश के वादे थे, जिससे बाजार में काफी सकारात्मक माहौल बन गया था। हालांकि अब स्थिति बदलती नजर आ रही है और विश्लेषकों का अनुमान है कि बिना किसी व्यापक अमेरिकी डॉलर की कमजोरी के, वॉन में आगे और बड़े फायदे की गुंजाइश काफी हद तक सीमित हो चुकी है।
मूल्यांकन और फेयर वैल्यू का स्तर
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि दक्षिण कोरियाई वॉन का जो अवमूल्यन पहले दिखाई दे रहा था, वह अब काफी हद तक कम हो चुका है। डेयर मॉडल के विश्लेषण के अनुसार, वॉन की मौजूदा कीमत अब उसके वास्तविक और उचित मूल्यांकन यानी फेयर वैल्यू के बेहद करीब पहुंच चुकी है। जब किसी मुद्रा का मूल्यांकन उसके वास्तविक स्तर पर आ जाता है, तो उसमें बिना किसी नए और मजबूत आर्थिक ट्रिगर के एकतरफा तेजी जारी रहना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि बाजार के जानकारों का मानना है कि अब निवेशकों को और अधिक बड़े लाभ की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए।
नेशनल पेंशन सर्विस का बड़ा कदम
वॉन की चाल को सीमित करने में दूसरा बड़ा कारक कोरिया की नेशनल पेंशन सर्विस यानी एनपीएस द्वारा विदेशी मुद्रा हेजिंग गतिविधियों को निलंबित करना है। संस्था की तरफ से उठाए गए इस कदम को सीधे तौर पर अधिकारियों का एक संकेत माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य बाजार में वॉन की और अधिक मजबूती को लेकर लगी उम्मीदों पर लगाम लगाना है। जब इस तरह के नीतिगत और संस्थागत बदलाव सामने आते हैं, तो वे विदेशी मुद्रा बाजार में चल रहे रुख को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं और व्यापारियों को अपनी उम्मीदें संतुलित करने पर मजबूर करते हैं।
व्यापक वैश्विक मुद्रा बाजार का परिदृश्य
इस बीच, एशियाई सत्र की शुरुआत से पहले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी अपने सकारात्मक प्रदर्शन को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है। ग्रीनबैक में आई मामूली कमजोरी और भू-राजनीतिक मोर्चे पर लगातार बने घटनाक्रमों के बीच यह मुद्रा जोड़ी 0.7200 के निचले स्तर के आसपास कारोबार कर रही है। इसके अलावा, मेलबर्न इंस्टीट्यूट द्वारा चालू महीने के लिए उपभोक्ता मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी किए जाने की उम्मीद है, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है ताकि क्षेत्रीय आर्थिक सेहत का अंदाजा लगाया जा सके।
डॉलर और येन की चाल पर असर
दूसरी ओर, अमेरिकी सत्र के दौरान डॉलर और जापानी येन की जोड़ी ने मंदी के दबाव को पीछे छोड़ते हुए 153.50 के स्तर को पार कर लिया। अमेरिका के राजकोषीय बायबैक की घोषणा के बाद अमेरिकी डॉलर में एक ठोस रिकवरी देखने को मिली, जिससे इस मुद्रा जोड़ी को आगे बढ़ने में मदद मिली। इसके बावजूद, जापान से सामने आए मजबूत आर्थिक आंकड़े इस बात को पुख्ता करते हैं कि बैंक ऑफ जापान अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने का सिलसिला जारी रखेगा, जिससे येन को लगातार समर्थन मिल रहा है और इस जोड़ी की ऊपरी सीमा फिलहाल सीमित बनी हुई है।
सोने की कीमतों में रिकवरी
कीमती धातुओं के बाजार में भी इस हफ्ते एक अहम बदलाव देखने को मिला है। लगातार तीन सत्रों तक नुकसान उठाने के बाद सोने की कीमतों में बुधवार को जोरदार रिकवरी दर्ज की गई और इसने प्रति ट्रॉय औंस 4,400 डॉलर के महत्वपूर्ण आंकड़े को फिर से पार कर लिया। सोने में आई इस तेजी के मुख्य कारणों में अमेरिकी डॉलर पर लगातार बन रहा बिकवाली का दबाव और भू-राजनीतिक मोर्चे पर अनिश्चितता का माहौल शामिल है, जो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को बनाए हुए है।


















