चिली के केंद्रीय बैंक ने सितंबर की अपनी बैठक में मौद्रिक नीति दर को 4.50 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। इस कदम के पीछे देश के भीतर सुस्त आर्थिक गतिविधियों, कमजोर होते श्रम बाजार और बाहरी महंगाई के बढ़ते जोखिमों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। सोशिए जनरल के देव आशीष का कहना है कि यह निर्णय नीति निर्माताओं की उस सतर्कता को दर्शाता है जिसके तहत वे किसी भी दिशा में कदम उठाने से पहले स्पष्ट संकेतों का इंतजार करना चाहते हैं। हालांकि इस बैठक का रुख उम्मीद से थोड़ा कम नरम रहा, लेकिन कुल मिलाकर यह इस बात की तस्दीक करता है कि अर्थव्यवस्था में स्पष्ट सुधार दिखने तक नीतिगत मोर्चे पर विराम जारी रह सकता है।
चिली की अर्थव्यवस्था और नीतिगत ठहराव के कारण
सोशिए जनरल के विश्लेषण के अनुसार, चिली में आर्थिक वृद्धि की सुस्ती और श्रम बाजार में गिरावट के कारण नीति निर्माताओं ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि महंगाई की उम्मीदें तय दायरे में बनी हुई हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ते महंगाई के जोखिमों और देश के भीतर नाजुक आर्थिक हालात ने केंद्रीय बैंक को हाथ बांधने पर मजबूर कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक घरेलू मोर्चे पर आर्थिक गतिविधियों में तेजी नहीं आती और महंगाई की स्थिति पूरी तरह साफ नहीं होती, तब तक ब्याज दरों को 4.50 प्रतिशत पर ही रोके रखा जाएगा।
वैश्विक मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और अन्य मुद्राओं का हाल
बुधवार को एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियन डॉलर और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर में 0.7200 के स्तर से ऊपर कारोबार देखा गया, जिस पर चीन के गर्म उपभोक्ता और उत्पादक मूल्य सूचकांक आंकड़ों का कोई खास असर नहीं पड़ा। इसके अलावा रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की बढ़ती अटकलों ने ऑस्ट्रेलियन डॉलर को सहारा दिया। दूसरी ओर, अमेरिकी सत्र में यूएस डॉलर और जापानी येन की जोड़ी 153.50 के स्तर से ऊपर कारोबार करती नजर आई, जिसे अमेरिकी ट्रेजरी की रीपरचेज घोषणा के बाद मजबूती मिली। जापान के मजबूत आंकड़ों ने यह संकेत भी दिए कि बैंक ऑफ जापान अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की प्रक्रिया जारी रख सकता है।
सोने की कीमतों में रिकवरी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता
सुरक्षित निवेश के रूप में माने जाने वाले सोने की कीमतों में बुधवार को जोरदार सुधार देखने को मिला, जिससे पिछले तीन सत्रों से जारी गिरावट पर विराम लग गया। बहुमूल्य धातु ने ट्रॉय औंस के हिसाब से 4,400 डॉलर के प्रमुख आंकड़े को फिर से पार कर लिया। सोने की कीमतों में आई यह तेजी अमेरिकी डॉलर पर लगातार बन रहे बिकवाली के दबाव और भू-राजनीतिक मोर्चे पर बनी गहरी अनिश्चितता के बीच आई है, जिसके कारण निवेशक सुरक्षित विकल्पों की तरफ रुख कर रहे हैं।



















