घरेलू शेयर बाजारों में नए संवत वर्ष की शुरुआत को चिह्नित करने वाला पारंपरिक मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र इस बार 8 नवंबर को आयोजित किया जाएगा। देश के दो शीर्ष स्टॉक एक्सचेंज, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने इस विशेष कारोबारी सत्र की रूपरेखा आधिकारिक तौर पर साझा कर दी है। रविवार के दिन पड़ने वाले इस विशेष सत्र में आम निवेशकों और संस्थागत प्रतिभागियों को सीमित समय के लिए सौदे करने की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही दोनों वित्तीय संस्थानों ने यह भी स्पष्ट किया है कि बलिप्रतिपदा के उपलक्ष्य में 10 नवंबर, मंगलवार को शेयर बाजार में सामान्य कामकाज पूरी तरह बंद रहेगा।
शाम के समय एक घंटे से कुछ अधिक चलेगा मुख्य कारोबार
एक्सचेंजों द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, 8 नवंबर को मुख्य ट्रेडिंग विंडो दोपहर 2:20 बजे शुरू होगी और दोपहर 3:30 बजे समाप्त होगी। इस तरह निवेशकों को वास्तविक सौदे निष्पादित करने के लिए कुल 70 मिनट का समय प्राप्त होगा। मुख्य सत्र शुरू होने से ठीक पहले 15 मिनट का प्री-ओपनिंग चरण आयोजित किया जाएगा, जिसका समय दोपहर 2:05 बजे से दोपहर 2:20 बजे तक तय किया गया है।
आम दिनों में भारतीय शेयर बाजार सुबह 9:15 बजे खुलकर दोपहर 3:30 बजे बंद होते हैं। इस बार रविवार को नियमित कारोबार स्थगित रहेगा, किंतु दिवाली के पारंपरिक रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए इस विशेष विंडो के दौरान ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स को सक्रिय रखा जाएगा ताकि निवेशक नए संवत की शुभ शुरुआत कर सकें।
मुहूर्त ट्रेडिंग की धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्ता
दीपावली का पावन त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार नए वित्तीय वर्ष और नए संवत की शुरुआत का सूचक माना जाता है। दलाल स्ट्रीट की दशकों पुरानी परंपरा के तहत इस दिन किए जाने वाले निवेश को अत्यंत मंगलकारी और समृद्धिदायक समझा जाता है। बाजार से जुड़े ब्रोकर, कारोबारी और खुदरा निवेशक अपने बही-खातों की पूजा करते हैं और आने वाले साल में आर्थिक संपन्नता की कामना के साथ प्रतीकात्मक रूप से शेयर खरीदते हैं। जानकारों का मानना है कि इस सत्र का प्राथमिक उद्देश्य त्वरित मुनाफा कमाना नहीं होता, बल्कि यह वित्तीय विकास, अनुशासन और पारिवारिक समृद्धि का प्रतीक है।
सीमित अवधि और संभावित उतार-चढ़ाव पर विश्लेषकों का रुख
बाजार विश्लेषकों ने इस संक्षिप्त सत्र के दौरान कारोबार करने वाले प्रतिभागियों को सतर्कता बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि चूंकि खरीद-बिक्री के लिए केवल एक घंटे से थोड़ा अधिक समय मिलता है, इसलिए तरलता के असंतुलन से शेयरों की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विश्लेषकों का सुझाव है कि खुदरा निवेशकों को अत्यधिक आक्रामक होकर सट्टेबाजी या इंट्राडे ट्रेडिंग करने से बचना चाहिए। इसके बजाय लंबी अवधि के दृष्टिकोण से मजबूत बुनियादी ढांचे वाली कंपनियों में टोकन निवेश करना इस सत्र की परंपरा के अधिक अनुकूल माना जाता है।
विभिन्न सेगमेंट में ट्रेडिंग की रहेगी अनुमति
दोनों प्रमुख एक्सचेंजों ने स्पष्ट किया है कि मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान विभिन्न वित्तीय उत्पाद श्रेणियों में सौदे किए जा सकेंगे। निवेशक कैश इक्विटी सेगमेंट के अतिरिक्त कमोडिटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, इक्विटी फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) और सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (एसएलबी) में भी ऑर्डर लगा सकेंगे। इन सभी खंडों के लिए परिचालन नियम सामान्य कारोबारी दिनों की तरह ही लागू रहेंगे।
तैयारी से लेकर समापन तक का पूरा समय चक्र
सर्कुलर में सत्र के संचालन से जुड़े हर चरण का विस्तृत समय तय किया गया है। कारोबारी सदस्यों और ब्रोकर्स को अपने सिस्टम में लॉगिन करने के लिए दोपहर 1:15 बजे से दोपहर 1:50 बजे तक का समय दिया जाएगा। इसके उपरांत दोपहर 1:50 बजे से दोपहर 2:05 बजे के बीच थोक या ब्लॉक डील्स से जुड़ी प्रक्रियाओं को पूरा किया जाएगा। दोपहर 2:05 बजे से 2:20 बजे तक प्री-ओपनिंग विंडो चलेगी और फिर 2:20 बजे से 3:30 बजे तक नियमित खरीद-बिक्री होगी।
पीरियोडिक कॉल ऑक्शन दोपहर 2:25 बजे से दोपहर 3:20 बजे के मध्य संचालित किया जाएगा। सत्र के अंतिम पड़ाव में क्लोजिंग ऑक्शन की गतिविधियां दोपहर 3:15 बजे से दोपहर 3:35 बजे तक चलेंगी। इसके अलावा गैर-सीएएस सिक्योरिटीज के लिए क्लोजिंग सेशन दोपहर 3:30 बजे से 3:50 बजे तक निर्धारित है, जबकि सीएएस सिक्योरिटीज के लिए क्लोजिंग बफर अवधि दोपहर 3:35 बजे से दोपहर 3:50 बजे तक चलेगी। अंततः पोस्ट-क्लोजिंग सेशन दोपहर 3:50 बजे से शाम 4:00 बजे तक आयोजित होकर दिन की समस्त बाजार गतिविधियां समाप्त हो जाएंगी।

















