वैश्विक मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन की क्रॉस जोड़ी यानी GBP/JPY में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती दर्ज की जा रही है। सोमवार को यह क्रॉस पेयर लगभग 0.16% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था, जिसमें कीमत 210.93 के आसपास पहुंच गई, जबकि ताजा लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार भाव 210.77 पर देखा गया है जो पिछले बंद स्तर 210.43 की तुलना में 0.16% की मजबूती दर्शाता है। तकनीकी चार्ट पर एक अहम डाउनवर्ड रेजिस्टेंस ट्रेंडलाइन को पार करने के बाद खरीदारों का उत्साह बढ़ा है और अब बाजार की नजरें 213.00 के मनोवैज्ञानिक व तकनीकी स्तर पर टिक गई हैं।
18 सितंबर के रेजिस्टेंस से आगे निकलने की तैयारी
चार्ट के विश्लेषण से पता चलता है कि 18 सितंबर के हाई से खींची गई नीचे की ओर झुकती हुई रेजिस्टेंस ट्रेंडलाइन को पार करने के बाद इस पेयर में 140 पिप्स की जोरदार रैली देखी गई। इस ब्रेकआउट के साथ ही 211.00 का स्तर तात्कालिक रुचि का केंद्र बन गया है। 18 सितंबर का उच्च स्तर 211.28 पर स्थित है, जो कि 50-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज यानी 50-दिन SMA (211.57) से ठीक पहले एक मजबूत रेजिस्टेंस का काम कर रहा है। ताजा तकनीकी आंकड़ों के मुताबिक 50-दिन SMA 211.55 और 50-दिन EMA 211.01 पर स्थित है, जबकि दैनिक पिवट स्तर 210.58 पर बना हुआ है।
यदि खरीदार 211.00 और इसके बाद 211.28 के स्तर पर मजबूत नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, तो तेजी का यह दौर 50-दिवसीय SMA 211.57 की ओर आसानी से बढ़ सकता है। इसके बाद 212.00 का अहम आंकड़ा सामने आएगा। 212.00 से ऊपर टिकने पर 200-दिवसीय SMA 213.00 (लाइव डेटा में 212.97) और उसके बाद 100-दिवसीय SMA 213.50 का परीक्षण संभव हो जाएगा। हालांकि, अमेरिकी और जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप से पहले खरीदारों को मध्य-जुलाई और अगस्त के 217.40 से 219.50 वाले उच्च दायरे को दोबारा छूने के लिए इन सभी अहम तकनीकी बाधाओं को सफलतापूर्वक पार करना होगा। इस करेंसी पेयर का 52-सप्ताह का दायरा 199.09 से 219.52 के बीच रहा है।
तकनीकी संकेतक और गिरावट की स्थिति का जोखिम
तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI 55 पर स्थित है, जो तटस्थ से हल्के सकारात्मक क्षेत्र का संकेत देता है। वहीं MACD इंडिकेटर में -0.22 की रीडिंग सिग्नल लाइन -0.58 से ऊपर है और इसका हिस्टोग्राम 0.35 पर बुलिश मोमेंटम दिखा रहा है। हालांकि, मूविंग एवरेज के मोर्चे पर 50-दिवसीय EMA (211.01) का 200-दिवसीय EMA (211.41) से नीचे होना लॉन्ग-टर्म डाउनट्रेंड यानी डेथ क्रॉस की स्थिति को दर्शाता है। 20-दिवसीय बॉलिंजर बैंड्स 207.91 से 210.72 के बीच हैं और मौजूदा कीमत ऊपरी बैंड से थोड़ा ऊपर निकल चुकी है, जबकि स्टोकेस्टिक में फास्ट लाइन 91 और सिग्नल लाइन 83 पर ओवरबॉट स्थिति दर्शा रही है।
यदि बाजार में मंदी का रुख दोबारा लौटता है, तो इसके लिए GBP/JPY का भाव फिर से डाउनवर्ड रेजिस्टेंस ट्रेंडलाइन के नीचे यानी लगभग 209.30 के स्तर से नीचे फिसलना जरूरी होगा। इस सपोर्ट के नीचे जाने पर अगला अहम स्तर 8 अक्टूबर का स्विंग लो 208.20 होगा। यदि बिकवाली का दबाव और बढ़ता है, तो 30 सितंबर का चक्र निचला स्तर 206.89 फिर से परीक्षण के दायरे में आ जाएगा। दैनिक अस्थिरता को मापने वाला 14-दिवसीय ATR 1.47 पर है, जिसे स्टॉप-लॉस बफर के रूप में देखा जा सकता है, जहां 20-दिवसीय सपोर्ट 206.90 और रेजिस्टेंस 211.08 के आसपास आंका गया है।
ग्लोबल फॉरेक्स और कमोडिटी मार्केट का हाल
वैश्विक स्तर पर अन्य प्रमुख मुद्राओं के बीच जापानी येन में अलग-अलग रुख देखा गया है। सोमवार को जापानी येन ने स्विस फ्रैंक के मुकाबले सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। वहीं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले येन यानी USD/JPY एशियाई सत्र में 158.00 के करीब रक्षात्मक मुद्रा में रहा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हालिया गिरावट के चलते अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के निचले स्तर के करीब दबाव में रहा। साथ ही बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा के सख्त बयानों और बाजार हस्तक्षेप के बढ़ते जोखिम ने जापानी येन को सहारा दिया है। हालांकि फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने डॉलर की गिरावट को सीमित रखा।
दूसरी ओर, चीनी जीडीपी के उम्मीद से बेहतर आंकड़ों के दम पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मजबूत होकर AUD/USD 0.7000 के स्तर के करीब पहुंचता दिखा। इसके विपरीत, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में सुधार के कारण सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और सोना 4,150 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे फिसल गया। अमेरिका में सीपीआई मुद्रास्फीति के आंकड़े अनुमान से अधिक मजबूत आए हैं, जिससे दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। फेड अध्यक्ष वार्श ने भले ही अक्टूबर की बैठक में दरों को स्थिर रखने के संकेत दिए हैं, लेकिन बाजार अब 28 अक्टूबर को संभावित ठहराव और उसके बाद 9 दिसंबर को ब्याज दर में बढ़ोतरी की दो-चरणीय प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए है।


















