वैश्विक वित्तीय बाजारों में तकनीकी शेयरों में आई हालिया गिरावट और अमेरिकी डॉलर में नरमी के बाद मुद्रा के भविष्य को लेकर बहस तेज हो गई है। बाजार के कुछ विशेषज्ञों का मानना रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र में बिकवाली के कारण विदेशी निवेशक अमेरिकी इक्विटी से पूंजी निकाल सकते हैं, जिससे डॉलर पर दबाव बढ़ेगा। इसके विपरीत, व्यापक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए यह स्पष्ट होता है कि यदि तकनीकी शेयरों में बिकवाली गहराती भी है, तो विदेशी निवेशक अपनी पूंजी को पूरी तरह बाहर निकालने के बजाय सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिभूतियों में लगा सकते हैं। ट्रेजरी में होने वाला यह पूंजी प्रवाह अमेरिकी डॉलर की रक्षात्मक मजबूती को बरकरार रखने में पूरी मदद करता है।
आगामी आर्थिक आंकड़ों और डॉलर के प्रदर्शन का आकलन
अमेरिकी डॉलर के मौजूदा सप्ताह के दौरान मजबूती हासिल करने की पूरी संभावना नजर आ रही है। इस सुधार को गति देने में शुक्रवार को आने वाले अक्टूबर महीने के पीएमआई आंकड़े बेहद अहम भूमिका निभा सकते हैं। यदि ये आंकड़े यह प्रमाणित करते हैं कि दुनिया की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले अमेरिका की विकास गति अधिक मजबूत बनी हुई है, तो डॉलर को ताजा समर्थन हासिल होगा। अमेरिका और अन्य देशों के बीच विकास दर का यह अंतर डॉलर की मांग को लंबे समय तक बनाए रखने में मददगार साबित होता है।
बीते दिनों अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और डॉलर में नरमी उस समय देखने को मिली थी जब सितंबर महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आंकड़े अपेक्षा से अधिक गर्म रहे थे। मजबूत मुद्रास्फीति आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख को बल दिया था, इसके बावजूद बॉन्ड बाजार में अचानक तेजी दर्ज की गई थी। हालांकि, फेडरल रिजर्व के कई प्रमुख अधिकारियों ने नीतिगत कदमों में जल्दबाजी न करने की सलाह दी है। अधिकारियों के इस रुख ने लगातार बैठकों में दर वृद्धि की संभावनाओं को फिलहाल थाम रखा है।
फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों का खाका
फेड फंड्स फ्यूचर्स के आंकड़े बताते हैं कि 28 अक्टूबर की आगामी बैठक में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की संभावना 20 प्रतिशत से भी कम आंकी जा रही है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वार्श ने भी अक्टूबर की बैठक में दरों को स्थिर रखने की उम्मीदों को मजबूत किया है। इसके चलते वित्तीय बाजारों में अब दो चरणों वाली स्थिति दिखाई दे रही है। बाजार 28 अक्टूबर को दरों में ठहराव की पूरी उम्मीद कर रहा है, जबकि 9 दिसंबर को होने वाली बैठक में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की पूरी संभावना मानकर चल रहा है। इस संभावित बढ़ोतरी के साथ नीतिगत ब्याज दरें बढ़कर 4.00 से 4.25 प्रतिशत के दायरे में पहुंच सकती हैं।
फेडरल रिजर्व के भीतर बोमन, विलियम्स, वालर और डेली जैसे प्रमुख नीति निर्धारकों ने आने वाले समय में धैर्य बरतने का आह्वान किया है। इन अधिकारियों का मानना है कि आर्थिक आंकड़ों के आधार पर ही आगे कदम बढ़ाना उचित होगा। मजबूत मुद्रास्फीति और फेड की ओर से दर वृद्धि के बढ़ते अनुमानों ने बाजार में अनिश्चितता पैदा की है, लेकिन यह अनिश्चितता अंततः डॉलर के पक्ष में सुरक्षित दांव को मजबूत कर रही है।
विदेशी मुद्रा बाजार में प्रमुख जोड़ों की चाल
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में विभिन्न मुद्राओं के बीच तीव्र उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर जोड़ी में लगातार दूसरे दिन तेजी देखी गई और यह 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ती नजर आई। ऑस्ट्रेलिया के केंद्रीय बैंक, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के सहायक गवर्नर क्रिस केंट की सख्त टिप्पणियों के बाद इस जोड़ी को मजबूती मिली है। इसके साथ ही चीन के तीसरी तिमाही के मजबूत जीडीपी आंकड़ों और सितंबर की गतिविधियों से जुड़े सकारात्मक आंकड़ों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को जरूरी गति प्रदान की है।
दूसरी ओर, डॉलर बनाम जापानी येन जोड़ी एशियाई सत्र के दौरान 158.00 के आसपास रक्षात्मक रुख बनाए हुए है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हालिया गिरावट के चलते डॉलर दो सप्ताह के निचले स्तर के करीब सुस्त रहा, जिससे इस जोड़ी पर दबाव पड़ा। इसके अलावा, बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काजुओ उएदा के सख्त बयानों के बाद बाजार में जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित मुद्रा हस्तक्षेप का जोखिम गहरा गया है। हालांकि, फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की संभावनाओं और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण डॉलर में बहुत बड़ी गिरावट की गुंजाइश सीमित मानी जा रही है।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार की हलचल
कीमती धातुओं के बाजार में सोने की कीमतों में शुक्रवार से शुरू हुआ दबाव सोमवार को भी जारी रहा। पीली धातु प्रति ट्रॉय औंस 4,150 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गई। अमेरिकी डॉलर के बेहतर रुख और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सभी अवधियों में आए उछाल ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रखा है। जब डॉलर और बॉन्ड यील्ड दोनों में मजबूती आती है, तब आमतौर पर बिना ब्याज वाले सोने में निवेशकों का आकर्षण कम हो जाता है।
डिजिटल परिसंपत्तियों के क्षेत्र में बिटकॉइन ने मजबूती दिखाते हुए 82,000 डॉलर के स्तर से ऊपर कारोबार किया। पिछले सप्ताह ईटीएफ से करीब 229 मिलियन डॉलर की निकासी दर्ज किए जाने के बावजूद बिटकॉइन ने मजबूत तकनीकी आधार तैयार किया है। वहीं एथेरियम ने भी गति पकड़ते हुए 2,400 डॉलर के स्तर के ऊपर वापसी की है। गति संकेतकों में आए हल्के सुधार के दम पर खरीदार बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। कुल मिलाकर, वैश्विक वित्तीय बाजार आने वाले हफ्तों में आर्थिक आंकड़ों और ब्याज दर निर्णयों के आधार पर नई दिशा तय करने के लिए तैयार दिख रहे हैं।



















