दक्षिण कोरिया के एक्सपोर्ट में जोरदार तेजी और ट्रेड सरप्लस के लगातार चौड़े होने के बावजूद उसकी करेंसी वॉन कमजोरी से उबर नहीं पा रही है। सोसाइटी जनरल के मुताबिक वॉन उन एशियाई मुद्राओं में शामिल है जो लगातार बिकवाली के दबाव से जूझ रही हैं। यही वजह है कि डॉलर के मुकाबले वॉन का भाव, यानी USD/KRW, 1,550 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है, जिसे अब तक एक अहम रुकावट माना जा रहा था।
आमतौर पर जब किसी देश का एक्सपोर्ट बढ़ता है और व्यापार अधिशेष चौड़ा होता है, तो उसकी करेंसी को मजबूती मिलनी चाहिए। लेकिन दक्षिण कोरिया के मामले में ऐसा होता नहीं दिख रहा, और यही बात इस पूरे घटनाक्रम को खास बनाती है।
आंकड़े मजबूत, फिर भी वॉन पर दबाव
जून महीने में दक्षिण कोरिया का एक्सपोर्ट 70.9% की दर से बढ़ा, जो अपने आप में बड़ा आंकड़ा है। इसी दौरान ट्रेड सरप्लस भी बढ़कर 36.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि मई में यह 27.03 अरब डॉलर था। इसके बावजूद ये मजबूत आंकड़े USD/KRW को 1,550 के स्तर के ऊपर जाने से नहीं रोक पाए। यानी बुनियादी तौर पर अर्थव्यवस्था की तस्वीर अच्छी होने के बाद भी करेंसी बाजार का मूड वॉन के पक्ष में नहीं दिख रहा।
अब आगे कहां तक रुकावट
तकनीकी नजरिए से देखें तो सोसाइटी जनरल ने अगली अंतरिम रुकावट 1,561 पर तय की है। अगर यह स्तर टूटता है तो उसके बाद 1,573 और फिर 1,580 का स्तर अहम रहेगा। इसका मतलब यह है कि USD/KRW के ऊपर की ओर बढ़ने की गुंजाइश अभी बनी हुई है, जिससे वॉन पर आने वाले दिनों में और दबाव देखा जा सकता है।
AI ने बढ़ाया एक्सपोर्ट, महंगाई भी तेज
एक्सपोर्ट में आई इस तेजी के पीछे बड़ी वजह AI से जुड़ी मांग बताई जा रही है, जिसने दक्षिण कोरिया के निर्यात को नई रफ्तार दी है। इसके साथ ही देश में महंगाई भी तेज हुई है और जून में यह बढ़कर 3.2% पर पहुंच गई है। एक्सपोर्ट में उछाल और बढ़ती महंगाई, इन दोनों बातों को मिलाकर देखा जाए तो केंद्रीय बैंक के सामने अब सख्ती की ओर लौटने का रास्ता साफ होता दिख रहा है।
दो हफ्ते में ब्याज दर बढ़ा सकता है बैंक ऑफ कोरिया
सोसाइटी जनरल का आकलन है कि इन हालात को देखते हुए बैंक ऑफ कोरिया अपनी मौद्रिक नीति में फिर से कसावट लाना शुरू कर सकता है। इसकी शुरुआत दो हफ्ते बाद 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी से हो सकती है, जिससे ब्याज दर बढ़कर 2.75% हो जाएगी। यानी महंगाई पर काबू पाने और अर्थव्यवस्था की मजबूती को संतुलित करने के लिए केंद्रीय बैंक अब आक्रामक रुख अपना सकता है।
कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि आंकड़ों की मजबूती और करेंसी की चाल के बीच एक साफ अंतर दिख रहा है। मजबूत एक्सपोर्ट और चौड़ा होता व्यापार अधिशेष भी वॉन को टूटने से नहीं रोक पाया है, और अब सबकी नजर बैंक ऑफ कोरिया के अगले कदम पर टिकी है।













