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एक्सपोर्ट में जबरदस्त उछाल के बावजूद क्यों टूट रहा है दक्षिण कोरियाई वॉन, अब बैंक ऑफ कोरिया उठा सकता है बड़ा कदमबाज़ार
2 घंटे पहले· 3

एक्सपोर्ट में जबरदस्त उछाल के बावजूद क्यों टूट रहा है दक्षिण कोरियाई वॉन, अब बैंक ऑफ कोरिया उठा सकता है बड़ा कदम

रिकॉर्ड एक्सपोर्ट ग्रोथ और बढ़ते ट्रेड सरप्लस के बाद भी दक्षिण कोरियाई वॉन पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है और USD/KRW 1,550 के अहम स्तर के पार चला गया है। सोसाइटी जनरल का मानना है कि तेज होती महंगाई के चलते बैंक ऑफ कोरिया दो हफ्ते में ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

अमित पटेलअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता 2 मिनट पढ़ें AI के लिए
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दक्षिण कोरिया के एक्सपोर्ट में जोरदार तेजी और ट्रेड सरप्लस के लगातार चौड़े होने के बावजूद उसकी करेंसी वॉन कमजोरी से उबर नहीं पा रही है। सोसाइटी जनरल के मुताबिक वॉन उन एशियाई मुद्राओं में शामिल है जो लगातार बिकवाली के दबाव से जूझ रही हैं। यही वजह है कि डॉलर के मुकाबले वॉन का भाव, यानी USD/KRW, 1,550 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है, जिसे अब तक एक अहम रुकावट माना जा रहा था।

आमतौर पर जब किसी देश का एक्सपोर्ट बढ़ता है और व्यापार अधिशेष चौड़ा होता है, तो उसकी करेंसी को मजबूती मिलनी चाहिए। लेकिन दक्षिण कोरिया के मामले में ऐसा होता नहीं दिख रहा, और यही बात इस पूरे घटनाक्रम को खास बनाती है।

आंकड़े मजबूत, फिर भी वॉन पर दबाव

जून महीने में दक्षिण कोरिया का एक्सपोर्ट 70.9% की दर से बढ़ा, जो अपने आप में बड़ा आंकड़ा है। इसी दौरान ट्रेड सरप्लस भी बढ़कर 36.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि मई में यह 27.03 अरब डॉलर था। इसके बावजूद ये मजबूत आंकड़े USD/KRW को 1,550 के स्तर के ऊपर जाने से नहीं रोक पाए। यानी बुनियादी तौर पर अर्थव्यवस्था की तस्वीर अच्छी होने के बाद भी करेंसी बाजार का मूड वॉन के पक्ष में नहीं दिख रहा।

अब आगे कहां तक रुकावट

तकनीकी नजरिए से देखें तो सोसाइटी जनरल ने अगली अंतरिम रुकावट 1,561 पर तय की है। अगर यह स्तर टूटता है तो उसके बाद 1,573 और फिर 1,580 का स्तर अहम रहेगा। इसका मतलब यह है कि USD/KRW के ऊपर की ओर बढ़ने की गुंजाइश अभी बनी हुई है, जिससे वॉन पर आने वाले दिनों में और दबाव देखा जा सकता है।

AI ने बढ़ाया एक्सपोर्ट, महंगाई भी तेज

एक्सपोर्ट में आई इस तेजी के पीछे बड़ी वजह AI से जुड़ी मांग बताई जा रही है, जिसने दक्षिण कोरिया के निर्यात को नई रफ्तार दी है। इसके साथ ही देश में महंगाई भी तेज हुई है और जून में यह बढ़कर 3.2% पर पहुंच गई है। एक्सपोर्ट में उछाल और बढ़ती महंगाई, इन दोनों बातों को मिलाकर देखा जाए तो केंद्रीय बैंक के सामने अब सख्ती की ओर लौटने का रास्ता साफ होता दिख रहा है।

दो हफ्ते में ब्याज दर बढ़ा सकता है बैंक ऑफ कोरिया

सोसाइटी जनरल का आकलन है कि इन हालात को देखते हुए बैंक ऑफ कोरिया अपनी मौद्रिक नीति में फिर से कसावट लाना शुरू कर सकता है। इसकी शुरुआत दो हफ्ते बाद 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी से हो सकती है, जिससे ब्याज दर बढ़कर 2.75% हो जाएगी। यानी महंगाई पर काबू पाने और अर्थव्यवस्था की मजबूती को संतुलित करने के लिए केंद्रीय बैंक अब आक्रामक रुख अपना सकता है।

कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि आंकड़ों की मजबूती और करेंसी की चाल के बीच एक साफ अंतर दिख रहा है। मजबूत एक्सपोर्ट और चौड़ा होता व्यापार अधिशेष भी वॉन को टूटने से नहीं रोक पाया है, और अब सबकी नजर बैंक ऑफ कोरिया के अगले कदम पर टिकी है।

इसका आप पर असर

  • निवेशकों के लिए: डॉलर के मुकाबले वॉन कमजोर होने से कोरियाई एसेट्स में पैसा लगाने वालों के लिए करेंसी जोखिम बढ़ जाता है, और USD/KRW की चाल पर नजर रखना जरूरी है।
  • कारोबार और यात्रियों के लिए: वॉन कमजोर होने से कोरिया से आयात महंगा पड़ सकता है, जबकि कोरिया जाने वाले भारतीय पर्यटकों के लिए खर्च में थोड़ी राहत मिल सकती है।

सवाल-जवाब

दक्षिण कोरियाई वॉन पर दबाव क्यों है?
मजबूत एक्सपोर्ट और चौड़े ट्रेड सरप्लस के बावजूद वॉन लगातार बिकवाली के दबाव से जूझ रहा है, जिससे यह डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है।
USD/KRW किस स्तर को पार कर गया है?
USD/KRW 1,550 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है, जिसे एक अहम रुकावट माना जा रहा था।
जून में कोरिया का एक्सपोर्ट कितना बढ़ा?
जून में दक्षिण कोरिया का एक्सपोर्ट 70.9% की दर से बढ़ा।
ट्रेड सरप्लस कितना रहा?
ट्रेड सरप्लस बढ़कर 36.2 अरब डॉलर पहुंच गया, जो मई में 27.03 अरब डॉलर था।
आगे रुकावट के स्तर कहां हैं?
अगली अंतरिम रुकावट 1,561 पर है, उसके बाद 1,573 और फिर 1,580 का स्तर अहम रहेगा।
बैंक ऑफ कोरिया क्या कदम उठा सकता है?
सोसाइटी जनरल के मुताबिक बैंक ऑफ कोरिया दो हफ्ते में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर ब्याज दर 2.75% कर सकता है।
जून में महंगाई कितनी रही?
जून में महंगाई बढ़कर 3.2% पर पहुंच गई।
अमित पटेल
लेखक के बारे मेंअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता दिल्ली
विशेषज्ञताबिज़नेस समाचार, वित्तीय बाज़ार, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट मामले, स्टार्टअप, उद्यमिता, आर्थिक रुझान, टेक्नोलॉजी बिज़नेस, निवेश, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, स्टार्टअप, तकनीक और आर्थिक रुझानों को कवर करते हैं। वे आधुनिक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले कारोबार और उद्योगों की ख़बरें, बाज़ार विश्लेषण और अंतर्दृष्टि देते हैं।

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, उद्यमिता, तकनीक और आर्थिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे ब्रेकिंग बिज़नेस न्यूज़, कॉर्पोरेट रणनीतियों, शेयर बाज़ार के रुझानों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले औद्योगिक नवाचारों पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, स्पष्टता और गहन विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए अमित पाठकों को जटिल कारोबारी विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करते हैं। उनकी कवरेज वित्तीय बाज़ार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, उभरते उद्योगों, आर्थिक नीति, निवेश रुझानों और डिजिटल बदलाव तक फैली है।

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