मुद्रा बाजार में इस सप्ताह की शुरुआत से ही सुस्ती का माहौल देखने को मिल रहा है, जहां प्रमुख करेंसी जोड़ियां सीमित दायरे में कारोबार कर रही हैं। जनवरी के दौरान ऊपर में 1.20 से लेकर नीचे में 1.1325 के स्तर तक आई बड़ी गिरावट का 50 प्रतिशत हिस्सा कवर करने के बाद EUR/USD जोड़ी फिलहाल एक दायरे में सिमट गई है। इस स्थिति को लेकर बाजार के जानकारों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर फिलहाल न तो बहुत ज्यादा मजबूत हो रहा है और न ही कमजोर, बल्कि यह इस बात का इंतजार कर रहा है कि जुलाई के दौरान सामने आए कमजोर अमेरिकी रोजगार और खुदरा बिक्री के आंकड़े आने वाले दिनों में फिर से दोहराए जाते हैं या नहीं।
ग्रोथ अनुमानों में बदलाव और रिलेटिव रेट्स
आर्थिक मोर्चे पर इस साल की शुरुआत से ही एक स्पष्ट रुझान देखने को मिला है। ताजा आंकलन बताते हैं कि साल 2026 के लिए अमेरिका के आम सहमति वाले विकास यानी ग्रोथ के अनुमानों को थोड़ा नीचे संशोधित करके 2.1 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके विपरीत, यूरोज़ोन के आर्थिक विकास के अनुमानों में ऊपर की ओर संशोधन देखा गया है, जो कुछ ही हफ्ते पहले के 0.5 प्रतिशत से बढ़कर अब 0.8 प्रतिशत पर पहुंच गए हैं।
इस स्थिति के पीछे एक बेहद सुसंगत कहानी रही है जो इस साल के वसंत यानी स्प्रिंग सीजन से लगातार बनी हुई है। बाजार में रिलेटिव रेट्स यानी तुलनात्मक ब्याज दरें सीधे तौर पर रिलेटिव ग्रोथ के अनुमानों का अनुसरण कर रही हैं और ठीक उसी दिशा में विदेशी विनिमय दर यानी एक्सचेंज रेट भी आगे बढ़ रहा है।
अन्य प्रमुख करंसियों और सोने का हाल
व्यापक मुद्रा बाजार में अन्य जोड़ियों की बात करें तो GBP/USD जोड़ी पिछले सप्ताह के शानदार उछाल के बाद सोमवार को भी 1.3600 के स्तर से ऊपर एक कंसोलिडेशन यानी दायरे में बनी हुई है। इसके साथ ही, अमेरिकी डॉलर ने कुछ रिकवरी करने की कोशिश की है, जिसकी वजह से जोखिम के प्रति संवेदनशील मानी जाने वाली यह जोड़ी थोड़ा दबाव में नजर आ रही है। डॉलर में यह सुधार मुख्य रूप से इस अनिश्चितता के कारण आया है कि ईरान पर अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों का ऊर्जा कीमतों पर क्या असर पड़ेगा।
दूसरी ओर, EUR/USD जोड़ी भी पिछले सप्ताह तगड़ी बढ़त हासिल करने के बाद दबाव में है और 1.1700 के स्तर से नीचे कारोबार कर रही है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा अपने बॉन्ड बायबैक प्लान में किए गए बदलाव के चलते पिछले सप्ताह डॉलर में भारी बिकवाली देखने को मिली थी, जिससे उबरने के लिए डॉलर अब हल्की रिकवरी का प्रयास कर रहा है। ऐसे में निवेशक पूरी तरह से सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और इस सप्ताह आने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़ों के साथ-साथ ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध पैकेज से जुड़ी हर बारीक जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।
करेंसी बाजार की इस हलचल के बीच कीमती धातुओं में भी जोरदार एक्शन देखा जा रहा है। गोल्ड यानी XAU/USD ने पिछले हफ्ते अमेरिकी ट्रेजरी के बायबैक ऐलान के बाद आए मजबूत उछाल को इस सप्ताह सोमवार को भी आगे बढ़ाया है। सोना इस समय मई के बाद से अपने सबसे उच्चतम स्तर के करीब यानी लगभग $4,650 के आसपास कारोबार कर रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी के बायबैक ऑपरेशन में बड़ा बदलाव
मुद्रा और सर्राफा बाजारों में हलचल की मुख्य वजह अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा अपनी तय समय सारणी से हटकर उठाया गया एक बड़ा कदम है। बुधवार को ठीक 12:32 GMT पर ट्रेजरी विभाग ने घोषणा की कि वह 10-वर्षीय से 20-वर्षीय और 20-वर्षीय से 30-वर्षीय सेक्टरों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशंस के आकार को कम से कम दोगुना करने जा रहा है।
इस फैसले के तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा को $2 बिलियन से बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से प्रभावी हो गई है और 4 नवंबर तक जारी रहेगी। बाजार के जानकारों और निवेशकों की नजरें इसी बड़े नीतिगत बदलाव पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर व्यापक वित्तीय बाजारों और बॉन्ड यील्ड पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।



















