फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श की नीतियां और उनकी संचार शैली वित्तीय बाजारों में नए सिरे से चर्चा और अनिश्चितता का विषय बन गई हैं। डीबीएस बैंक के रणनीतिकार फिलिप वी का आकलन है कि फेड प्रमुख द्वारा फॉरवर्ड गाइडेंस यानी भविष्य के नीतिगत संकेतों को सिरे से खारिज किया जाना मौजूदा बाजार में अस्थिरता को हवा दे रहा है। इसके साथ ही यह अमेरिकी ट्रेजरी के साथ नीतिगत तालमेल को भी उलझा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि बिना किसी स्पष्ट और सुसंगत नीतिगत ढांचे के, गाइडेंस में कटौती को बाजार मूल्य खोज की प्रक्रिया में सुधार के रूप में देखने के बजाय वित्तीय स्थितियों और केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता पर मंडराते संकट के रूप में देखा जा रहा है।
जैक्सन होल सम्मेलन साबित होगा बड़ी परीक्षा
आगामी 27 से 29 अगस्त तक आयोजित होने वाला कंसास सिटी फेड का जैक्सन होल इकोनॉमिक पॉलिसी सिंपोजियम केविन वॉर्श के लिए एक बहुत बड़ा इम्तिहान बनने जा रहा है। इस सम्मेलन के दौरान उन पर यह साबित करने का भारी दबाव होगा कि बिना फॉरवर्ड गाइडेंस के फेडरल रिजर्व किस तरह से बाजार की उम्मीदों को थाम कर रखने की योजना बना रहा है। बाजार के तमाम हितधारक यह जानना चाहते हैं कि केंद्रीय बैंक लंबी अवधि के बॉन्ड यील्ड के जरिए कितनी मौद्रिक सख्ती को बर्दाश्त करने के लिए तैयार है। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व और ट्रेजरी के बीच की नीतिगत रेखा कहां खींची जाएगी, इस पर भी स्थिति साफ होनी बेहद जरूरी हो गई है।
बाजार को चाहिए एक स्पष्ट नीतिगत ढांचा
मौजूदा समय में वित्तीय बाजारों की सबसे बड़ी जरूरत एक स्पष्ट और सुसंगत नीतिगत ढांचा है। यदि ऐसा कोई ठोस फ्रेमवर्क सामने नहीं आता है, तो फॉरवर्ड गाइडेंस को कम करने का यह कदम बाजार के लिए फायदेमंद साबित होने के बजाय अनिश्चितता का एक और नया स्रोत बन सकता है। विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि निवेशकों और कारोबारियों को यह समझने की आवश्यकता है कि केंद्रीय बैंक किस दिशा में आगे बढ़ रहा है ताकि वे उसके अनुसार अपनी रणनीतियां तैयार कर सकें।
विदेशी मुद्रा बाजारों और मुद्राओं में हलचल
व्यापक आर्थिक मोर्चे पर डॉलर की रिकवरी और अन्य प्रमुख मुद्राओं की चाल पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। ब्रिटिश पाउंड यानी GBP/USD की जोड़ी पिछले सप्ताह के शानदार उछाल के बाद सोमवार को 1.3600 के स्तर से ऊपर एक कंसोलिडेशन के दौर में बनी हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर द्वारा अपनी स्थिति मजबूत करने के कारण अमेरिकी प्रतिबंधों की अनिश्चितता के बीच जोखिम के प्रति संवेदनशील मुद्राएं दबाव में नजर आ रही हैं। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा ईरान पर संभावित आर्थिक प्रतिबंधों के ऊर्जा कीमतों पर पड़ने वाले असर को लेकर निवेशकों में बनी सतर्कता ने इस जोड़ी को पिछले पायदान पर धकेल दिया है।
EUR/USD और सोने की कीमतों का हाल
यूरो यानी EUR/USD की जोड़ी भी कमजोर रुख के साथ 1.1700 के स्तर से नीचे कारोबार कर रही है, हालांकि पिछले सप्ताह इसमें अच्छी खासी तेजी दर्ज की गई थी। अमेरिकी ट्रेजरी की बॉन्ड बायबैक योजना में बदलाव के कारण पिछले सप्ताह हुई बिकवाली के बाद डॉलर की मामूली रिकवरी ने इस जोड़ी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। निवेशक इस हफ्ते होने वाले प्रमुख आयोजनों और ईरान पर संभावित प्रतिबंधों के विवरण का इंतजार कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, सोने यानी XAU/USD की कीमतें सोमवार को और आगे बढ़ी हैं और पिछले सप्ताह के मजबूत दौर को जारी रखते हुए मई के बाद के अपने उच्चतम स्तर यानी लगभग 4,650 डॉलर के करीब पहुंच गई हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी के बायबैक और तरलता उपाय
सोने और बॉन्ड बाजार में इस हलचल के पीछे अमेरिकी ट्रेजरी का एक महत्वपूर्ण कदम भी है। ट्रेजरी विभाग ने बुधवार को अपने तयशुदा कैलेंडर से हटकर एक बड़ा कदम उठाया। विभाग ने दोपहर 12:32 जीएमटी पर घोषणा की कि वह 10 से 20 साल और 20 से 30 साल के सेक्टरों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशन के आकार को कम से कम दोगुना कर देगा। इसके तहत अधिकतम सीमा को प्रति ऑपरेशन 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से प्रभावी होगी और 4 नवंबर तक चलेगी, जिसका सीधा असर वित्तीय बाजारों की तरलता पर पड़ रहा है।



















