अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में ऑस्ट्रेलियन डॉलर की चाल को लेकर विशेषज्ञों के नए आकलन सामने आए हैं। ब्रदर ह्वाइट हैरिसन के एलियास हद्दाद का मानना है कि जुलाई महीने के लिए ऑस्ट्रेलिया का कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी सीपीआई नरम रहने की उम्मीद है। उनके अनुसार, देश में कुल महंगाई दर और ट्रिमड मीन इन्फ्लेशन दोनों में ही गिरावट देखने को मिल सकती है। इस नरमी के पीछे मुख्य वजहें कमजोर श्रम बाजार की स्थितियां और निजी क्षेत्र में वेतन वृद्धि की रफ्तार का धीमा होना हैं। इसके साथ ही, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की आगामी मिनट्स और चालू तिमाही के पूंजीगत व्यय के आंकड़े ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदों को स्पष्ट करने का काम करेंगे।
जुलाई सीपीआई और ब्याज दरों पर कयास
बाजार के जानकारों के बीच इस बात की चर्चा है कि जुलाई के दौरान ऑस्ट्रेलिया की हेडलाइन सीपीआई घटकर 3.8 प्रतिशत से नीचे आ सकती है। अनुमान जताया जा रहा है कि यह आंकड़ा सालाना आधार पर 3.3 प्रतिशत तक दर्ज किया जा सकता है। वहीं दूसरी तरफ, ट्रिमड मीन सीपीआई के भी पिछले महीने के 3.6 प्रतिशत से कम होकर 3.5 प्रतिशत पर रहने की संभावना जताई गई है। हालांकि मासिक सीपीआई आंकड़े देश में महंगाई मापने का सबसे प्रमुख जरिया जरूर हैं, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया अपनी मौद्रिक नीतियों के तहत तिमाही आंकड़ों से मिलने वाले ट्रिमड मीन इन्फ्लेशन पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करता आ रहा है।
रिजर्व बैंक का रुख और नीतिगत ठहराव
केंद्रीय बैंक के अपने अनुमानों के मुताबिक, तिमाही आधार पर ट्रिमड मीन सीपीआई इस साल के दिसंबर अंत तक घटकर 3.3 प्रतिशत के स्तर पर आ सकती है, जो कि दूसरी तिमाही में 3.6 प्रतिशत पर थी। यह गिरावट स्पष्ट रूप से इस ओर इशारा करती है कि देश का श्रम बाजार अब थोड़ा सुस्त पड़ रहा है और निजी क्षेत्र की मजदूरी में भी नरमी आ रही है। जानकारों का यह भी मानना है कि वर्तमान नीतिगत दृष्टिकोण को देखते हुए इस बात की अधिक संभावना है कि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया अपने ब्याज दरों में बढ़ोतरी के चक्र को लंबे समय के लिए रोक सकता है, क्योंकि मौद्रिक नीति पहले से ही काफी सख्त दौर से गुजर रही है।
कमोडिटी और कैरीज ट्रेड का मजबूत सहारा
ब्याज दरों में संभावित ठहराव के बावजूद ऑस्ट्रेलियन डॉलर के लिए कुछ सकारात्मक कारक यानी टेलविंड्स मजबूत बने हुए हैं। देश का आकर्षक कैरीज ट्रेड और रणनीतिक कमोडिटी एक्सपोजर मुद्रा को नीचे गिरने से बचाने में बड़ा मददगार साबित हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया की ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा क्षेत्रों से जुड़ी कमोडिटीज में मजबूत हिस्सेदारी वैश्विक बाजार में ऑस्ट्रेलियन डॉलर की स्थिति को स्थिरता प्रदान करती है। इन बुनियादी ताकतों की वजह से मुद्रा के मोर्चे पर निवेशकों का भरोसा बना हुआ है, भले ही निकट भविष्य में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता का माहौल क्यों न हो।



















