वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में यूरोपीय साझा मुद्रा यूरो पर दोतरफा दबाव साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक मौद्रिक रुख और ऊर्जा बाजार में लगातार बढ़ती कीमतों ने करेंसी पेयर्स के समीकरण बदल दिए हैं। हालिया कारोबारी सत्रों में EUR/USD करेंसी पेयर अपने ऊपरी स्तरों से नीचे की ओर फिसलता हुआ देखा गया है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही परिस्थितियां कायम रहती हैं, तो महीने के अंत तक यह जोड़ी और अधिक नीचे की तरफ जा सकती है।
सपोर्ट लेवल पर यूरो की स्थिति और तकनीकी परिदृश्य
विदेशी मुद्रा बाजार के तकनीकी संकेतकों को देखें तो EUR/USD के लिए तात्कालिक स्तर बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। विश्लेषकों के मुताबिक, 1.1565 से 1.1570 का दायरा एक महत्वपूर्ण समर्थन स्तर के रूप में कार्य कर रहा है। यदि यह जोड़ी इस स्तर से नीचे फिसलती है, तो इसमें गिरावट की गति और तेज हो सकती है। ऐसी स्थिति में पहला नीचे का लक्ष्य 1.1520 का दायरा होगा, जिसके बाद महीने के अंत तक EUR/USD का 1.1500 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक पहुंचना काफी उपयुक्त और संभावित लक्ष्य माना जा रहा है।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की दरों पर अनिश्चितता और भू-राजनीतिक कारक
ऊर्जा दरों में लगातार हो रहे इजाफे ने यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) द्वारा मौद्रिक नीति में सख्ती लाए जाने की बाजार की उम्मीदों को बढ़ावा दिया है। मौजूदा समय में मनी मार्केट स्वैप्स अगले वर्ष की गर्मियों तक ECB द्वारा ब्याज दरों में अतिरिक्त 80bp की बढ़ोतरी को डिस्काउंट कर रहे हैं। हालांकि, वित्तीय रणनीतिकारों का आकलन है कि इतनी बड़ी बढ़ोतरी की संभावना काफी कम है। इसके बावजूद, जब तक मध्य पूर्व के हालात और अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक ट्रेडर्स इस ट्रेड के विपरीत दांव लगाने से कतरा रहे हैं।
अमेरिकी रोजगार डेटा और जापानी येन का असर
सप्ताह के मध्य में आए अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और विदेशी मुद्रा बाजार में अचानक हुए बदलावों ने मुद्रा जोड़े में कुछ समय के लिए तेजी भी ला दी। अमेरिका में निजी क्षेत्र के अगस्त महीने के रोजगार आंकड़ों में अनुमान से कम बढ़ोतरी देखने को मिली, जिसने अमेरिकी डॉलर (USD) की तेजी को कुछ समय के लिए ब्रेक लगाया। इसके अतिरिक्त, विदेशी मुद्रा बाजार में जापानी येन (JPY) को मजबूती देने के लिए किए गए संभावित हस्तक्षेप के कारण भी डॉलर में कमजोरी आई। इस घटनाक्रम की वजह से EUR/USD ने निचले स्तरों से सुधरते हुए 1.1600 के स्तर की तरफ कदम बढ़ाया। वहीं दूसरी ओर, ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी रहा और यह चार सप्ताह के निचले स्तर 1.3470 के करीब पहुंच गया।
सोने में जोरदार रिकवरी और कच्चे तेल में उछाल
डॉलर सूचकांक में आए उतार-चढ़ाव का सीधा असर कमोडिटी मार्केट पर देखने को मिला। जापानी येन में आई अचानक तेजी के बाद अमेरिकी डॉलर में व्यापक बिकवाली का दबाव बना, जिससे सोने (XAU/USD) में शानदार रिकवरी आई और इसने अपने शुरुआती नुकसान की पूरी भरपाई कर ली। ऊर्जा क्षेत्र की बात करें तो वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल लगातार तीसरे दिन बढ़त बनाने में सफल रहा। पिछले छह कारोबारी सत्रों में पांचवीं बार तेजी दर्ज करते हुए WTI कच्चे तेल ने 24 जुलाई के बाद का अपना नया उच्चतम स्तर हासिल कर लिया। इसके साथ ही, डीजल बाजार में रिफाइनिंग मार्जिन यानी यूएस डीजल क्रैक स्प्रेड में ऐतिहासिक उछाल आया और यह पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलकर 102.00 डॉलर के इंट्राडे रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सुस्ती और कंसोलिडेशन
डिजिटल एसेट बाजार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया हुआ है, जिसके कारण प्रमुख क्रिप्टोकरेंसीज में गिरावट दर्ज की गई। बिटकॉइन (BTC) अपने अल्पकालिक सपोर्ट लेवल $77,000 के आसपास कंसोलिडेट होता हुआ नजर आ रहा है। वहीं, एथेरियम (ETH) पर भी बिकवाली का दबाव बरकरार है और यह नीचे फिसलकर $2,400 के स्तर की ओर बढ़ रहा है। रिपल (XRP) समेत अन्य अल्टरनेटिव कॉइन्स में भी गिरावट का रुख बना हुआ है।


















