रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड (आरबीएनज़ेड) ने अपनी प्रमुख नीतिगत दर यानी ऑफिशियल कैश रेट (OCR) में 25 आधार अंक (bps) की बढ़ोतरी करते हुए इसे 2.75 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने माना है कि अर्थव्यवस्था से मौद्रिक प्रोत्साहन को वापस लेना बेहद आवश्यक था, ताकि हालिया ईंधन मूल्य झटके से उत्पन्न हुई मुद्रास्फीति व्यापक कीमत निर्धारण व्यवहार और दीर्घकालिक महंगाई प्रत्याशाओं में स्थायी रूप से स्थापित न हो सके। वित्तीय बाजार विश्लेषक ली सू एन के अनुसार, नीति निर्माता आगामी अक्टूबर मौद्रिक नीति विवरण (MPS) तक आंकड़ों पर निर्भर दृष्टिकोण अपनाएंगे। उनका अनुमान है कि मौजूदा पूर्वानुमान अवधि के दौरान ब्याज दर 2.75 प्रतिशत पर ही स्थिर बनी रहेगी, जब तक कि वृद्धि और मुद्रास्फीति के जोखिमों में कोई बड़ा रणनीतिक बदलाव नहीं आता।
न्यूजीलैंड में मौद्रिक नीति की सख्ती और मुद्रास्फीति नियंत्रण की चुनौती
न्यूजीलैंड के केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की यह वृद्धि पूरी तरह बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रही है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि वैश्विक बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमतों ने घरेलू स्तर पर महंगाई के दबाव को काफी बढ़ा दिया है। यदि समय रहते मौद्रिक नीति में सख्ती नहीं की गई, तो यह मुद्रास्फीति उत्पादकों और उपभोक्ताओं के व्यवहार में गहरी जगह बना सकती है। वित्तीय संस्थान यूओबी की वरिष्ठ अर्थशास्त्री ली सू एन ने स्पष्ट किया है कि आरबीएनज़ेड अपनी सख्त मौद्रिक नीति के प्रति प्रतिबद्ध दिखाई दे रहा है। बैंक का प्राथमिक उद्देश्य अर्थव्यवस्था को अत्यधिक गर्म होने से बचाना और मध्यम अवधि में मुद्रास्फीति को लक्ष्य के भीतर लाना है। हालांकि, यदि भविष्य में आर्थिक वृद्धि दर और महंगाई के आंकड़ों में कोई अचानक गिरावट या उछाल दिखता है, तो नीतिगत दृष्टिकोण का पुनर्मूल्यांकन किया जा सकता है।
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और प्रमुख मुद्राओं की स्थिति
न्यूजीलैंड के इस नीतिगत फैसले के समय अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। जीबीपी/यूएसडी (GBP/USD) जोड़ी में पिछले कई दिनों से गिरावट का सिलसिला जारी है और बुधवार को यह फिसलकर 1.3470 के स्तर के पास आ पहुंची, जो कि पिछले चार हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। ब्रिटिश पाउंड में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूत होती स्थिति और जारी भू-राजनीतिक चिंताएं मुख्य कारक हैं। दूसरी ओर, ईयूआर/यूएसडी (EUR/USD) जोड़ी में बुधवार को कुछ सुधार देखा गया और यह 1.1580 के स्तर के आसपास पहुंच गई। यूरोपीय मुद्रा में यह बढ़त तब दर्ज की गई जब अमेरिका के एडीपी (ADP) रोजगार आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे अमेरिकी डॉलर की तेजी की गति में अस्थायी रूप से ब्रेक लगा।
कच्चे तेल में तेजी और डीजल क्रैक स्प्रेड का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
ऊर्जा बाजार में मजबूती का रुख लगातार बना हुआ है। अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेजी दर्ज की गई। एशियाई व्यापारिक सत्र के दौरान कच्चे तेल की कीमतें 24 जुलाई के बाद के अपने नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। पिछले छह कारोबारी दिनों में से पांच दिनों में कच्चे तेल में सकारात्मक बढ़त दर्ज की गई है। ऊर्जा बाजार में असली हलचल डीजल सेगमेंट से देखने को मिल रही है। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, जो कि अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल (ULSD) फ्यूचर्स और WTI के बीच का मूल्य अंतर होता है, पहली बार $100 प्रति बैरल के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया। कारोबार के दौरान यह क्रैक स्प्रेड रिकॉर्ड $102.00 प्रति बैरल से ऊपर चला गया, जो रिफाइनिंग क्षमता पर दबाव और आपूर्ति संबंधी चिंताओं को दर्शाता है।
सोने की कीमतों में वापसी और क्रिप्टोकरेंसी बाजार में मुनाफावसूली
सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में मामूली रिकवरी देखी गई है। प्रति ट्रॉय औंस $4,280 के निचले स्तर तक गिरने के बाद सोने की हाजिर कीमतें फिर से संभलीं और $4,300 के स्तर को हासिल कर लिया। लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद सोने में यह सुधार अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव, डॉलर सूचकांक की स्थिति और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच आया है। वहीं दूसरी ओर, डिजिटल एसेट यानी क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बुधवार को व्यापक गिरावट देखी गई। निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं, जिसके चलते बिटकॉइन (BTC) अपनी अल्पकालिक सपोर्ट सीमा $77,000 के करीब स्थिर होने का प्रयास कर रहा है। इसी प्रकार, इथेरियम (ETH) में भी दबाव देखा गया और यह $2,400 की ओर खिसक गया, जबकि रिपल (XRP) में भी मंदी का रुख बना रहा।



















