वैश्विक वित्तीय बाजार इस समय अमेरिका के केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व के अगले कदमों पर गहरी नजर बनाए हुए हैं। अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों का अनुमान है कि फेडरल रिजर्व अपनी आगामी जुलाई की बैठक में फेड फंड्स टारगेट रेट को 3.50% से 3.75% के दायरे में ही बनाए रखेगा। बाजार के जानकारों और प्रमुख वित्तीय संस्थानों का मानना है कि यह रुख ब्लूमबर्ग की आम सहमति के बिल्कुल अनुरूप है, जहां नीतिगत दरों में किसी भी तरह के बदलाव की तत्काल संभावना नहीं जताई जा रही है।
नीतिगत ठहराव और एफओएमसी का रुख
फेडरल रिजर्व के भीतर नीति निर्माताओं की राय बंटी हुई है और इसके साथ ही पांच अलग-अलग टास्क फोर्स के माध्यम से व्यापक समीक्षाएं भी की जा रही हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए मुख्य अनुमान यह लगाया जा रहा है कि साल 2026 के दौरान ब्याज दरों में यह ठहराव लंबी अवधि तक जारी रह सकता है। इसके बाद, जब एक बार अस्थायी और अल्पकालिक महंगाई के आंकड़े शांत हो जाएंगे, तो साल 2027 की दूसरी और चौथी तिमाही में ब्याज दरों में ढील देने का सिलसिला दोबारा शुरू हो सकता है।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी का बढ़ता जोखिम
भले ही केंद्रीय बैंक की ओर से दरों को लंबे समय तक थामे रखने का आधारभूत अनुमान जताया जा रहा हो, लेकिन इसके साथ ही नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की आशंकाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। भविष्य की आर्थिक उम्मीदों और नीतियों को तय करने में महंगाई के ताजा आंकड़े और भू-राजनीतिक हालात सबसे अहम भूमिका निभा रहे हैं। विशेष तौर पर कच्चे तेल की कीमतों में हाल ही में देखी गई तेजी के कारण बाजारों ने जुलाई की एफओएमसी बैठक में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की संभावना को 35.8% तक आंक लिया है, जिसे बाजार काफी गंभीरता से ले रहा है।
विदेशी मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव
मौद्रिक नीतियों के इन अनुमानों के बीच प्रमुख करेंसी जोड़ियों में भी उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी का रुख दिखाने के बाद जीबीपी/यूएसडी जोड़ी दिन के दूसरे हिस्से में अपनी दिशा बदलते हुए 1.3300 के आसपास लाल निशान में कारोबार करती नजर आई। हालांकि मध्य पूर्व के संघर्ष में ठहराव आने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने अमेरिकी डॉलर की बढ़त पर लगाम लगाने का काम किया है, जिससे इस जोड़ी को फिलहाल अपनी स्थिति संभालने में मदद मिल रही है।
यूरो और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं
दूसरी ओर, यूरो/यूएस डॉलर जोड़ी भी अपनी शुरुआती तेजी को बरकरार नहीं रख पाई और सोमवार के सत्र के दूसरे भाग में मामूली बढ़त के साथ 1.1400 के नीचे कारोबार करती दिखी। मध्य पूर्व में हमलों के थमने के बाद से बाजार के प्रतिभागी इस क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच किसी राजनयिक समाधान पर सहमति बनने को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इन तमाम वैश्विक घटनाक्रमों और अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों को काफी सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।



















