ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। एक तरफ जहां एशिया की कुछ सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं अपनी घरेलू चुनौतियों से जूझ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख वैश्विक मुद्राओं, कमोडिटीज और डिजिटल एसेट्स पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती का गहरा असर दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में तेजी तो आ रही है, लेकिन इसके साथ ही महंगाई और व्यापार असंतुलन जैसे नए जोखिम भी उभर रहे हैं। प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों में आने वाले बदलावों ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे आने वाले हफ्तों में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की पूरी आशंका जताई जा रही है।
वियतनाम की आर्थिक वृद्धि और व्यापार संतुलन का संकट
एशियाई क्षेत्र में वियतनाम सबसे तेजी से उभरते हुए आर्थिक केंद्रों में से एक बना हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक्स के बढ़ते निर्यात और विनिर्माण क्षेत्र में आई तेजी के दम पर देश की आर्थिक रफ्तार मजबूत बनी हुई है। हालांकि, इस तेज विकास दर के साथ कुछ गंभीर आर्थिक चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और बढ़ते व्यापार घाटे ने वियतनाम के चालू खाता अधिशेष पर दबाव बना दिया है। इस स्थिति के कारण देश में महंगाई की दर लगातार बढ़ रही है और यह स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम के तय लक्ष्य सीमा को पार कर चुकी है। इन परिस्थितियों को देखते हुए आर्थिक विशेषज्ञों ने वियतनाम के बाहरी अधिशेष के अनुमानों में कटौती की है और साल 2026 के लिए महंगाई के अनुमान को बढ़ा दिया है।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल दर्ज की गई 8 प्रतिशत की विकास दर के मुकाबले इस साल की पहली तिमाही में वियतनाम की जीडीपी विकास दर सालाना आधार पर 7.8 प्रतिशत रही है। भले ही इसमें मामूली कमी आई हो, लेकिन इसके बावजूद वियतनाम पूरे एशिया महाद्वीप में अपनी तेज विकास की स्थिति को बरकरार रखने में पूरी तरह सफल रहा है। व्यापारिक आंकड़ों का बारीक विश्लेषण करने पर पता चलता है कि देश का निर्यात क्षेत्र बेहद लचीला और मजबूत बना हुआ है। मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की भारी मांग के कारण इस साल अब तक निर्यात में सालाना आधार पर औसतन लगभग 20 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
निर्यात में आई इस जबरदस्त तेजी के बावजूद, वियतनाम का आयात उससे भी अधिक रफ्तार से बढ़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक आयात में सालाना आधार पर 30 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। इस भारी आयात को कुछ हद तक स्वाभाविक माना जा सकता है क्योंकि वियतनाम का विनिर्माण क्षेत्र काफी हद तक आयातित कच्चे माल और उपकरणों पर निर्भर करता है। दिसंबर 2025 से ही वियतनाम लगातार व्यापार घाटे का सामना कर रहा है, जो इस साल मई के महीने में रिकॉर्ड 5.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि पर्यटन से होने वाली कमाई और माध्यमिक आय के सहारे देश को दोहरे घाटे जैसी बेहद गंभीर स्थिति से बचाया जा सकेगा।
महंगाई की सीमा टूटी और बढ़ी चिंताएं
वियतनाम में मई के दौरान महंगाई की दर में तेज उछाल देखा गया और यह 5.6 प्रतिशत पर पहुंच गई। इसके साथ ही महंगाई दर ने लगातार तीसरे महीने स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम की 4.5 प्रतिशत की तय सीमा को पार कर लिया है। महंगाई में आई इस भारी तेजी का सबसे बड़ा कारण पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में हुआ इजाफा है। लेकिन इसके साथ ही खाद्य पदार्थों की कीमतों में हाल ही में हुई बढ़ोतरी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिसने आम लोगों के बजट पर सीधा असर डाला है और नीति निर्माताओं के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
फॉरेक्स मार्केट में अमेरिकी डॉलर का दबदबा
ग्लोबल करेंसी मार्केट में इस समय अमेरिकी डॉलर की जबरदस्त मांग के कारण अन्य प्रमुख मुद्राओं पर दबाव बना हुआ है। ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी GBP/USD इस समय अपनी बढ़त को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है। डॉलर में आई नई खरीदारी के चलते यह जोड़ी कमजोर होकर 1.3200 के स्तर की तरफ नीचे आ रही है। इसके अलावा, निवेशक इस समय अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भू-राजनीतिक संघर्ष और ब्रिटेन के भीतर चल रही राजनीतिक हलचलों पर भी करीबी नजर रख रहे हैं, जिससे बाजार में सतर्कता बनी हुई है।
दूसरी ओर, यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी EUR/USD में भी गिरावट देखी गई है। यह जोड़ी अपनी शुरुआती बढ़त को गंवाते हुए 1.1400 के समर्थन स्तर की तरफ नीचे आ गई है। यूरो में आया यह सुधार ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी डॉलर के मूल्य में कुछ गिरावट देखी गई थी, और निवेशक मध्य पूर्व के घटनाक्रमों के साथ-साथ ग्लोबल टेक्नोलॉजी सेक्टर के शेयरों से जुड़े सेंटीमेंट्स की निगरानी कर रहे हैं।
सोना और क्रिप्टोकरेंसी बाजार में हलचल
सुरक्षित निवेश के रूप में देखे जाने वाले सोने की कीमतों में सप्ताह के अंत में तेजी का रुख देखने को मिला है। सोने की कीमतें अब प्रति ट्रॉय औंस 4,000 डॉलर के बेहद महत्वपूर्ण स्तर के करीब पहुंच रही हैं। हालांकि, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर अपनाए जा रहे सख्त रुख की वजह से सोने की इस बढ़त पर कुछ हद तक लगाम लगी हुई है। केंद्रीय बैंक की हॉकिश नीतियों के अनुमान के कारण निवेशक बहुत ज्यादा आक्रामक दांव लगाने से बच रहे हैं।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार के लिए समय कुछ कठिन नजर आ रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल मुद्राएं जैसे बिटकॉइन (BTC), इथेरियम (ETH) और रिपल (XRP) लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद लाल निशान में कारोबार कर रही हैं। ये सभी प्रमुख डिजिटल एसेट्स इस समय अपने बेहद महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों का परीक्षण कर रहे हैं, जहां से गिरावट बढ़ने पर बाजार में और मंदी आ सकती है।
फेडरल रिजर्व की नीति और केविन वॉर्श का नया दृष्टिकोण
वैश्विक वित्तीय बाजारों पर इस समय फेडरल रिजर्व की नीतियों का सबसे अधिक प्रभाव है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने अपनी हालिया बैठक में बेंचमार्क ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने अपनी बेंचमार्क दर को लगातार चौथी बैठक में 3.50 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे पर बरकरार रखा है, जो कि बाजार की उम्मीदों के बिल्कुल अनुकूल था।
इस बैठक में दरों के न बदलने से ज्यादा चर्चा नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के बयानों की रही। केविन वॉर्श ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस का इस्तेमाल उस पुरानी व्यवस्था को बदलने के लिए किया, जिसके भरोसे बाजार पिछले एक दशक से अपनी रणनीतियां बना रहा था। उनके इस नए दृष्टिकोण ने बाजार के पुराने फॉरवर्ड गाइडेंस के तरीकों को चुनौती दी है। डॉलर की इस मजबूती के पीछे फेड का सख्त रुख सबसे बड़ा कारण रहा है, जिसने भू-राजनीतिक चिंताओं और कच्चे तेल की गिरती कीमतों के असर को भी पीछे छोड़ दिया है। आने वाले समय में नॉन-फार्म पेरोल (NFP) के आंकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे, जिससे सितंबर में फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों को बल मिल सकता है। यूरोपीय बाजार में इस समय किसी बड़े सकारात्मक ट्रिगर की कमी दिख रही है, और अब सबकी नजरें प्रारंभिक महंगाई रिपोर्ट और ईसीबी फोरम पर टिकी हुई हैं।













