भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों की नजरें इस समय लीप इंडिया के मेनबोर्ड आईपीओ पर टिकी हुई हैं। कुल 2,480 करोड़ रुपये की इस बड़ी पब्लिक पेशकश के दूसरे दिन के आंकड़े और ग्रे मार्केट का रुझान बाजार में चर्चा का विषय बना हुआ है। शुरुआती दिन में निवेशकों की तरफ से ठीक-ठाक प्रतिक्रिया देखने को मिली है और यह शुरुआती कारोबार में ही आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।
पहले दिन कैसा रहा सब्सक्रिप्शन और क्या है जीएमपी की स्थिति
इस बड़े आईपीओ को लेकर निवेशकों में उत्सुकता साफ देखी जा सकती है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इश्यू को पहले दिन ही कुल 28 प्रतिशत सब्सक्रिप्शन हासिल हो चुका है। वहीं दूसरी ओर, ग्रे मार्केट की हलचल पर नजर डालें तो इस पेशकश का जीएमपी यानी ग्रे मार्केट प्रीमियम 10 अगस्त को सुबह 7:32 बजे के डेटा के मुताबिक करीब 16 रुपये प्रति शेयर पर बना हुआ था। इस मौजूदा जीएमपी को ध्यान में रखते हुए और इसके तय ऊपरी प्राइस बैंड 159 रुपये प्रति शेयर को आधार बनाएं, तो शेयरों की संभावित लिस्टिंग 175 रुपये के आसपास होने का अनुमान लगाया जा रहा है। यह अनुमान ऊपरी प्राइस बैंड और मौजूदा जीएमपी को आपस में जोड़ने पर सामने आता है, जिससे निवेशकों को प्रति शेयर लगभग 10 प्रतिशत तक के मुनाफे या घाटे का संकेत मिल रहा है।
ब्रोकरेज हाउस एसबीआई सिक्योरिटीज की राय और न्यूट्रल रेटिंग
इस बड़े सार्वजनिक निर्गम को लेकर बाजार के दिग्गज ब्रोकरेज हाउस एसबीआई सिक्योरिटीज ने अपनी समीक्षा पेश की है। ब्रोकरेज फर्म ने इस इश्यू को न्यूट्रल रेटिंग दी है। इसके पीछे मुख्य वजह यह बताई गई है कि यह कंपनी देश की सबसे बड़ी एसेट-पूलिंग प्लेयर है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का राष्ट्रव्यापी सेवा नेटवर्क, मजबूत ब्रांड पहचान और तकनीक से लैस एसेट मैनेजमेंट का हुनर इसे लंबे समय में काफी फायदा पहुंचा सकता है।
कारोबार का दायरा और सप्लाई चेन में कंपनी की स्थिति
यह कंपनी देश के सप्लाई चेन मैनेजमेंट सेक्टर में ऑन-डमांड एसेट पूलिंग की सबसे बड़ी सेवा प्रदाता के रूप में काम करती है। कंपनी के पास कुल 14.7 मिलियन यानी 1.47 करोड़ एसेट्स मौजूद हैं। इसके अलावा, 31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार यह देश भर में 10,100 से अधिक कस्टमर टचपॉइंट्स का एक विशाल नेटवर्क संभालती है। कंपनी का सर्कुलर बिजनेस मॉडल अपने ग्राहकों को मजबूत सहारा देता है, साथ ही पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को कम करने में भी मदद करता है। इसके जरिए ग्राहकों की सप्लाई चेन की समय लागत, दक्षता और सुरक्षा में भी सुधार होता है। कंपनी अपनी सेवाओं के तहत तकनीक से जुड़ी सप्लाई चेन सॉल्यूशंस देती है, जिससे ग्राहकों को वैल्यू चेन के विभिन्न चरणों को आपस में जोड़ने में मदद मिलती है। कंपनी अपने ग्राहकों को पूलिंग मॉडल के आधार पर पैलेट्स और कंटेनर उपलब्ध कराती है, जबकि एमएचई को किराए की व्यवस्था के तहत प्रदान किया जाता है।
मजबूत पक्ष और संभावित जोखिम
कंपनी के विकास पथ की बात करें तो इसमें आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। पैलेटाइजेशन और पैलेट पूलिंग की बढ़ती पैठ, मौजूदा उद्योगों के भीतर विस्तार, पूरी सप्लाई चेन में एकीकरण और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार की योजनाएं इस कंपनी की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही हैं। हालांकि, हर कारोबार की तरह इसमें कुछ जोखिम भी जुड़े हुए हैं। कंपनी की वित्तीय स्थिति ग्राहकों के साथ दीर्घकालिक संबंधों को बनाए रखने पर काफी हद तक निर्भर करती है। इसके अलावा, दोबारा इस्तेमाल होने वाले एसेट्स का प्रभावी प्रबंधन, लगातार बढ़ता हुआ ऑपरेशनल खर्च और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा इसके मुख्य व्यावसायिक जोखिमों में शामिल हैं।



















