वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय तकनीकी स्थिरता, नीतिगत बदलावों और भू-राजनीतिक चिंताओं का एक मिलाजुला असर देखने को मिल रहा है। एशिया और यूरोप के मुद्रा बाजारों से लेकर क्रिप्टोकरेंसी और सोने जैसे संवेदनशील क्षेत्रों तक, निवेशक हर छोटे-बड़े घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। इस पूरे परिदृश्य के केंद्र में फेडरल रिजर्व में हुआ एक ऐतिहासिक बदलाव है, जिसने आने वाले समय के लिए वित्तीय नीतियों की दिशा ही बदल दी है।
यूएसडी/जेपीवाई में मजबूत सपोर्ट के करीब स्थिरता
विदेशी मुद्रा बाजार में USD/JPY करेंसी पेयर में लगातार मजबूती देखी जा रही है, जिससे जापानी येन पर मंदी का दबाव बना हुआ है। यूनाइटेड ओवरसीज़ बैंक के वित्तीय विशेषज्ञ क्वेक सेर लियांग और ली सू एन ने अपनी हालिया बाजार समीक्षा में स्पष्ट किया है कि इस जोड़ी ने 161.10 के एक मजबूत सपोर्ट स्तर के ऊपर अपनी स्थिति को सफलतापूर्वक बनाए रखा है। हालांकि वर्तमान में यह 161.78 के आसपास काफी शांत होकर कारोबार कर रहा है, लेकिन तकनीकी संकेतकों से पता चलता है कि यूएस डॉलर में मजबूती का रुख लगातार जारी है। आज के कारोबार के लिए विश्लेषकों ने इस जोड़ी के लिए 161.45 से 161.95 के बीच एक बेहद सीमित दायरे (ट्रेडिंग रेंज) का अनुमान लगाया है।
इससे पिछले कारोबारी सत्र में भी इस करेंसी पेयर में कुछ ऐसी ही हलचल देखी गई थी, जब यह 161.54 और 161.94 के बीच घूमता रहा और अंततः मामूली रूप से 0.01% की बढ़त के साथ 161.78 पर बंद हुआ। अगर हम आने वाले एक से तीन सप्ताह के व्यापक दृष्टिकोण पर नजर डालें, तो यूएस डॉलर के लिए सकारात्मक रुख अभी भी पूरी तरह से सक्रिय है। जब तक इसका प्राथमिक सपोर्ट स्तर 161.10 के नीचे नहीं जाता, तब तक डॉलर का अगला लक्ष्य साल 2024 के उच्चतम स्तर यानी 162.00 को दोबारा छूना रहेगा। दीर्घकालिक अवधि में, यह करेंसी पेयर 161.15 के करीब बन रहे एक राइजिंग वेज पैटर्न के ऊपरी छोर को भी चुनौती दे सकता है।
भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच यूरोपीय मुद्राओं का संघर्ष
इसके साथ ही, प्रमुख यूरोपीय मुद्राओं को भी अपनी वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर यानी GBP/USD की जोड़ी शुक्रवार को यूरोपीय कारोबारी समय के दौरान 1.3200 के स्तर के आसपास स्थिर बनी हुई है, जिसे गुरुवार की सकारात्मक क्लोजिंग से काफी सहारा मिला है। इस स्थिरता के बावजूद, बाजार में छाई गहरी चिंता और सतर्कता के कारण इस जोड़ी के लिए कोई भी बड़ी तेजी दर्ज करना बेहद मुश्किल हो रहा है। इस समय निवेशकों के मन में दो प्रमुख चिंताएं बनी हुई हैं: पहली, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और दूसरी, वैश्विक स्तर पर तकनीकी कंपनियों के शेयरों में जारी भारी उतार-चढ़ाव।
दूसरी ओर, यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी EUR/USD में यूरोपीय सत्र के दौरान थोड़ी मजबूती देखी गई और यह 1.1400 के स्तर के करीब पहुंच गई। इस जोड़ी को मिलने वाली बढ़त का मुख्य कारण यह है कि वैश्विक बाजार में यूएस डॉलर को मजबूत मांग हासिल करने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। हालांकि, मिडिल ईस्ट से आने वाली खबरों और वैश्विक टेक शेयरों की चाल के कारण यूरो की इस बढ़त पर भी निवेशकों की कड़ी नजर बनी हुई है।
फेडरल रिजर्व की नीति के साये में सोने की चाल
कमोडिटी बाजारों में भी निवेशकों के इसी सतर्क रुख का सीधा असर देखने को मिल रहा है। सोने की कीमतें वर्तमान में एक बेहद सीमित दायरे के भीतर कारोबार कर रही हैं, लेकिन यह $4,000 के बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बनी हुई हैं। हालांकि गुरुवार के सत्र में इस पीली धातु ने मामूली बढ़त दर्ज की थी, लेकिन इसके बाद भी सोने में कोई बड़ी तेजी नहीं आ पा रही है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह फेडरल रिजर्व की भविष्य की सख्त नीतियों को लेकर बनी हुई आशंकाएं हैं। निवेशकों को डर है कि ऊंची ब्याज दरें लंबे समय तक बनी रह सकती हैं, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की आकर्षण क्षमता थोड़ी प्रभावित हो सकती है।
एक्सआरपी में भारी लिक्विडेशन और बिकवाली का दबाव
डिजिटल संपत्तियों का बाजार भी इस समय उतार-चढ़ाव से अछूता नहीं है। रिपल का मूल टोकन, XRP, वर्तमान में $1 के बेहद संवेदनशील मनोवैज्ञानिक सपोर्ट स्तर के ठीक ऊपर टिके रहने की कोशिश कर रहा है। पिछले एक सप्ताह के दौरान इस लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी ने अपने मूल्य का लगभग 8% से अधिक हिस्सा खो दिया है, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ है।
कॉइनग्लास द्वारा जारी किए गए डेरिवेटिव बाजार के लिक्विडेशन आंकड़ों से पता चलता है कि स्थिति काफी गंभीर है। पिछले 24 घंटों के भीतर, XRP में लगाए गए 97% से अधिक लीवरेज्ड लॉन्ग पोजीशन पूरी तरह से समाप्त (लिक्विडेट) हो गए। बाजार में आई इस भारी गिरावट और डेरिवेटिव के अन्य तकनीकी संकेतकों से साफ है कि मंदी का रुख रखने वाले विक्रेता इस समय बाजार पर पूरी तरह हावी हैं।
केविन वॉर्श ने बदला फेड का दस साल पुराना ढांचा
इन सब बदलावों के बीच, सबसे बड़ा नीतिगत झटका फेडरल रिजर्व की बैठक से लगा है। फेड की नीति निर्धारक समिति यानी FOMC ने अपनी बैठक में लगातार चौथी बार मुख्य ब्याज दरों को 3.50% से 3.75% की सीमा में अपरिवर्तित रखने का फैसला किया। हालांकि वित्तीय बाजारों ने इस फैसले का पहले ही अनुमान लगा लिया था और यह पूरी तरह से बाजार की कीमतों में शामिल था, लेकिन असली हलचल बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शुरू हुई।
केंद्रीय बैंक के नए प्रमुख के रूप में अपनी पहली बैठक की अध्यक्षता कर रहे केविन वॉर्श ने बाजार को हैरान कर दिया। अपने पूर्ववर्तियों के विपरीत, वॉर्श ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस का उपयोग पिछले एक दशक से बाजार द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे नीतिगत मार्गदर्शन और संचार के पारंपरिक ढांचे को पूरी तरह से बदलने के लिए किया। उन्होंने साफ संकेत दिया कि आने वाले समय में केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीतियों को लेकर एक नया रास्ता चुन सकता है, जिसने निवेशकों को अपनी रणनीतियों पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।













