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होर्मुज बंद करने की धमकी पर अमेरिका की चेतावनी, ईरान बोला किसी भी गलती का मिलेगा करारा जवाबबाज़ार
2 घंटे पहले· 2

होर्मुज बंद करने की धमकी पर अमेरिका की चेतावनी, ईरान बोला किसी भी गलती का मिलेगा करारा जवाब

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में अमेरिका ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी पर चेताया, जबकि दोहा में दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत बेनतीजा रही। इस तनाव के बीच WTI कच्चे तेल की कीमत करीब 68.45 डॉलर पर पहुंच गई।

अमित पटेलअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता 4 मिनट पढ़ें AI के लिए
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इस हफ्ते कूटनीति और कच्चे तेल का बाजार, दोनों की नजरें एक ही घटनाक्रम पर टिकी रहीं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव संयुक्त राष्ट्र में खुलकर सामने आ गया, जबकि बंद कमरों में दोनों पक्षों की बातचीत भी जारी रही। ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका की किसी भी गलती का वह करारा जवाब देगा, और ठीक इसी माहौल में कच्चे तेल के दाम ऊपर चढ़ते दिखे।

सुरक्षा परिषद में सख्त चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक आपात बैठक के दौरान अमेरिका के दूत माइक वॉल्ट्ज़ ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी। यह चेतावनी ईरान की उन धमकियों को लेकर थी, जिनमें उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की बात कही थी। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के तेल कारोबार का बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए इसे बंद करने की धमकी सीधे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ जाती है।

ट्रंप का दावा, समझौता करीब

दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप का रुख काफी सकारात्मक दिखा। गुरुवार को उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि उन्होंने वो लगभग सब कुछ मान लिया है जो हम चाहते हैं।" उनका यह बयान ऐसे समय आया जब कतर ने भी दोनों देशों के बीच "सकारात्मक प्रगति" की बात कही। यह प्रगति दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच हुई अप्रत्यक्ष तकनीकी बातचीत के बाद सामने आई, जो 17 जून को हुए समझौता ज्ञापन (MoU) से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित थी।

हालांकि तस्वीर पूरी तरह उम्मीद भरी नहीं है। बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का एक दौर बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हुआ, और इस बात का कोई संकेत नहीं मिला कि दोनों पक्ष किसी स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ पाए हैं।

कच्चे तेल की कीमत कहां पहुंची

इस राजनीतिक खींचतान के बीच खबर लिखे जाने तक WTI कच्चे तेल की कीमत करीब 0.60% की बढ़त के साथ लगभग 68.45 डॉलर के आसपास कारोबार कर रही थी।

आखिर WTI तेल है क्या

WTI एक तरह का कच्चा तेल है जिसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचा जाता है। WTI का मतलब है वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट, जो तीन प्रमुख किस्मों में से एक है। बाकी दो किस्में ब्रेंट और दुबई क्रूड हैं। WTI को "लाइट" और "स्वीट" भी कहा जाता है, क्योंकि इसका घनत्व अपेक्षाकृत कम होता है और इसमें सल्फर की मात्रा भी कम रहती है। इसे उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है, जिसे आसानी से रिफाइन किया जा सकता है। इसका उत्पादन अमेरिका में होता है और इसकी आपूर्ति कशिंग हब के जरिए होती है, जिसे "दुनिया का पाइपलाइन चौराहा" कहा जाता है। यह तेल बाजार का एक बेंचमार्क है और मीडिया में अक्सर WTI की कीमत का ही हवाला दिया जाता है।

दाम किन बातों से घटते-बढ़ते हैं

बाकी हर चीज की तरह WTI तेल की कीमत भी सबसे ज्यादा मांग और आपूर्ति से तय होती है। जब वैश्विक अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है तो तेल की मांग बढ़ जाती है, और जब विकास सुस्त पड़ता है तो मांग घट जाती है। राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और प्रतिबंध आपूर्ति को बाधित कर सकते हैं, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ता है। ओपेक यानी बड़े तेल उत्पादक देशों के समूह के फैसले भी दाम की एक बड़ी वजह बनते हैं। अमेरिकी डॉलर की कीमत का भी तेल पर असर पड़ता है, क्योंकि तेल का कारोबार ज्यादातर डॉलर में ही होता है। ऐसे में डॉलर कमजोर होने पर तेल सस्ता पड़ता है और डॉलर मजबूत होने पर महंगा।

इन्वेंट्री रिपोर्ट पर रहती है नजर

अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) और एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी (EIA) की ओर से हर हफ्ते जारी होने वाली तेल भंडार रिपोर्ट भी WTI की कीमत को प्रभावित करती है। भंडार में बदलाव आपूर्ति और मांग के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। अगर आंकड़े भंडार में गिरावट दिखाते हैं तो यह मांग बढ़ने का संकेत हो सकता है, जिससे तेल के दाम ऊपर जाते हैं। वहीं भंडार बढ़ने का मतलब आपूर्ति ज्यादा होना है, जिससे कीमतें नीचे आती हैं। API की रिपोर्ट हर मंगलवार को आती है और EIA की उसके अगले दिन। दोनों के नतीजे अक्सर मिलते-जुलते रहते हैं और 75% मौकों पर एक-दूसरे के 1% के दायरे में होते हैं। EIA के आंकड़ों को ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है, क्योंकि यह एक सरकारी एजेंसी है।

ओपेक और ओपेक+ की भूमिका

ओपेक यानी पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन 12 तेल उत्पादक देशों का समूह है, जो साल में दो बार होने वाली बैठकों में मिलकर अपने सदस्य देशों के लिए उत्पादन का कोटा तय करते हैं। इनके फैसले अक्सर WTI तेल की कीमतों को प्रभावित करते हैं। जब ओपेक कोटा घटाने का फैसला करता है तो आपूर्ति सिमट जाती है और तेल के दाम बढ़ जाते हैं। इसके उलट जब ओपेक उत्पादन बढ़ाता है तो कीमतों पर उलटा असर पड़ता है। वहीं ओपेक+ एक बड़ा समूह है, जिसमें ओपेक से बाहर के दस अतिरिक्त देश भी शामिल हैं, और इनमें सबसे अहम नाम रूस का है।

इसका आप पर असर

  • भारत में: भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है, इसलिए होर्मुज को लेकर तनाव और तेल के दाम बढ़ना आगे चलकर पेट्रोल-डीजल और ढुलाई लागत पर दबाव बढ़ा सकता है।
  • निवेशकों के लिए: WTI के 68.45 डॉलर के आसपास चढ़ने और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते ऊर्जा और तेल से जुड़े शेयरों तथा कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

सवाल-जवाब

अमेरिका ने ईरान को किस बात पर चेतावनी दी?
अमेरिकी दूत माइक वॉल्ट्ज़ ने सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी पर चेतावनी दी।
डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत को लेकर क्या कहा?
गुरुवार को ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान ने लगभग वह सब कुछ मान लिया है जो अमेरिका चाहता है।
दोहा में हुई बातचीत का नतीजा क्या रहा?
बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का दौर बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हुआ, और स्थायी शांति का कोई संकेत नहीं मिला।
समझौता ज्ञापन (MoU) कब हुआ था?
यह समझौता ज्ञापन 17 जून को हुआ था और दोहा की तकनीकी बातचीत इसी से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित थी।
इस समय WTI कच्चे तेल की कीमत क्या है?
खबर लिखे जाने तक WTI कच्चा तेल करीब 0.60% की बढ़त के साथ लगभग 68.45 डॉलर पर कारोबार कर रहा था।
ओपेक और ओपेक+ में क्या फर्क है?
ओपेक 12 तेल उत्पादक देशों का समूह है, जबकि ओपेक+ में इसके अलावा दस अतिरिक्त गैर-ओपेक देश भी शामिल हैं, जिनमें सबसे अहम रूस है।
अमित पटेल
लेखक के बारे मेंअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता दिल्ली
विशेषज्ञताबिज़नेस समाचार, वित्तीय बाज़ार, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट मामले, स्टार्टअप, उद्यमिता, आर्थिक रुझान, टेक्नोलॉजी बिज़नेस, निवेश, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, स्टार्टअप, तकनीक और आर्थिक रुझानों को कवर करते हैं। वे आधुनिक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले कारोबार और उद्योगों की ख़बरें, बाज़ार विश्लेषण और अंतर्दृष्टि देते हैं।

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, उद्यमिता, तकनीक और आर्थिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे ब्रेकिंग बिज़नेस न्यूज़, कॉर्पोरेट रणनीतियों, शेयर बाज़ार के रुझानों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले औद्योगिक नवाचारों पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, स्पष्टता और गहन विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए अमित पाठकों को जटिल कारोबारी विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करते हैं। उनकी कवरेज वित्तीय बाज़ार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, उभरते उद्योगों, आर्थिक नीति, निवेश रुझानों और डिजिटल बदलाव तक फैली है।

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