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डोनाल्ड ट्रंप के ईरान फैसले से बाजारों में मची हलचल, EUR/GBP में दिखा बड़ा बदलावबाज़ार
2 घंटे पहले· 2

डोनाल्ड ट्रंप के ईरान फैसले से बाजारों में मची हलचल, EUR/GBP में दिखा बड़ा बदलाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान संघर्ष विराम समझौते को समाप्त घोषित किए जाने से वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे यूरो और पाउंड पर दबाव बढ़ गया है।

अमित पटेलअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता 6 मिनट पढ़ें AI के लिए
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बुधवार को वैश्विक वित्तीय बाजारों में जबरदस्त हलचल देखी गई, क्योंकि अचानक बढ़े भू-राजनीतिक तनाव ने यूरो की रिकवरी की कोशिशों पर पानी फेर दिया। इस उथल-पुथल की मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान रहा, जिसमें उन्होंने घोषणा की कि ईरान के साथ संघर्ष को समाप्त करने के लिए हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है। ट्रंप के इस फैसले ने वैश्विक निवेशकों के बीच सुरक्षित ठिकानों की तरफ भागने की होड़ मचा दी, जिससे सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर को भारी मजबूती मिली। इसके विपरीत, जोखिम वाली मुद्राओं, वैश्विक शेयर बाजारों और कीमती धातुओं पर भारी दबाव देखा गया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच, EUR/GBP करेंसी पेयर ने एक सीमित दायरे में कारोबार किया, जहां बाजार के प्रतिभागी भू-राजनीतिक चुनौतियों और तकनीकी संकेतकों से मिल रहे मिले-जुले इशारों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

EUR/GBP कंसोलिडेशन और टेक्निकल आउटलुक

बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान EUR/GBP क्रॉस ने अपने हालिया नुकसान की भरपाई करने की कोशिश में एक कंसोलिडेशन फेज में प्रवेश किया। इस दौरान इस करेंसी पेयर में 0.8635 और 0.8650 के बीच एक बेहद सीमित दायरे में ट्रेडिंग देखी गई। हालांकि यूरोपीय साझा मुद्रा पर समग्र रूप से मंदी का माहौल हावी है, लेकिन दैनिक चार्ट पर शॉर्ट-टर्म तकनीकी संकेतक अब एक बुलिश डाइवर्जेंस प्रदर्शित करने लगे हैं। तकनीकी विश्लेषण में, इस तरह के बुलिश डाइवर्जेंस का मतलब यह होता है कि भले ही कीमतें अपने निचले स्तर के करीब बनी हुई हैं, लेकिन गिरावट की रफ्तार यानी डाउनवर्ड मोमेंटम अब कमजोर पड़ रहा है। यह इस बात का संकेत है कि विक्रेता बाजार पर अपनी मजबूत पकड़ धीरे-धीरे खो रहे हैं।

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इसके बावजूद, यूरो के लिए किसी भी बड़ी रिकवरी की राह इतनी आसान नहीं दिख रही है। यूरो में तेजी की किसी भी कोशिश को जून के मध्य के उच्चतम स्तर से बनने वाली एक डिसेंडिंग ट्रेंडलाइन रोक रही है, जो वर्तमान में 0.8565 के स्तर के आसपास स्थित है। इसके अलावा, एक मजबूत रेजिस्टेंस 0.8275 के क्षेत्र में भी देखा जा रहा है, जो 2 और 3 जुलाई के उच्चतम स्तर के साथ मेल खाता है। नीचे की तरफ, इस करेंसी पेयर को 0.8533 के स्तर पर तत्काल सपोर्ट मिल रहा है, जो मंगलवार को दर्ज किया गया एक साल का निचला स्तर है। यह स्तर 0.8530 के आसपास के वेज बॉटम तकनीकी पैटर्न के बेहद करीब है। यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है और यह जोड़ी इस महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल को तोड़ देती है, तो अगला प्रमुख गिरावट का लक्ष्य जुलाई 2025 के निचले स्तरों के आसपास होगा, जो लगभग 0.8500 के मनोवैज्ञानिक स्तर पर स्थित है। आज के कारोबार में यूरो सबसे ज्यादा मजबूत जापानी येन के खिलाफ रहा।

ऊर्जा संकट पर ECB का रुख

जब विदेशी मुद्रा बाजार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के सीधे असर से जूझ रहे थे, तब यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के गवर्निंग काउंसिल के सदस्य जोस लुइस एस्क्रीवा ने बैंक की नीतिगत सोच पर प्रकाश डाला। बुधवार को मौद्रिक नीति पर बात करते हुए, एस्क्रीवा ने जोर देकर कहा कि ECB को भविष्य के लिए अपने सभी नीतिगत विकल्पों को खुला रखना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक आमतौर पर ब्याज दरों के निर्धारण में ऊर्जा की कीमतों में आने वाले अस्थायी और एकमुश्त झटकों को नजरअंदाज करके आगे बढ़ते हैं, क्योंकि आपूर्ति श्रृंखला में आने वाले ऐसे व्यवधान हमेशा दीर्घकालिक मुद्रास्फीति के अंतर्निहित रुझान को नहीं दर्शाते हैं। इस बयान के बावजूद, यूरो की सेहत पर कोई खास सकारात्मक या नकारात्मक असर नहीं पड़ा और यह व्यापक भू-राजनीतिक प्रवाह के बीच काफी हद तक स्थिर बना रहा।

ईरान पर ट्रंप की घोषणा से मचेगा हड़कंप

नाटो शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान समझौते के समाप्त होने की पुष्टि किए जाने के बाद वैश्विक राजनीति का पूरा परिदृश्य बदल गया है। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह अब तेहरान के साथ किसी भी तरह का संपर्क या जुड़ाव नहीं रखना चाहते हैं। इस तीखे बयान ने मध्य पूर्व में एक बड़े सैन्य संघर्ष की आशंकाओं को दोबारा जिंदा कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर बाधा आने का जोखिम काफी बढ़ गया है। इसके परिणामस्वरूप, वित्तीय बाजारों में जोखिम से बचने की भावना तेजी से फैल गई और निवेशकों ने जोखिम भरी संपत्तियों से हाथ खींचते हुए अपनी पूंजी को सुरक्षित अमेरिकी डॉलर की ओर स्थानांतरित करना शुरू कर दिया, जिससे अन्य प्रमुख संपत्तियों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

प्रमुख करेंसी पेयर्स पर प्रभाव

अमेरिकी डॉलर में आई इस अचानक तेजी ने अन्य प्रमुख करेंसी पेयर्स को बैकफुट पर धकेल दिया। GBP/USD की जोड़ी अपनी जमीन तलाशने के लिए संघर्ष करती नजर आई और 1.3350 के स्तर से नीचे नकारात्मक दायरे में कारोबार करती दिखी। भू-राजनीतिक चिंताओं के अलावा, पाउंड के ट्रेडर्स अमेरिकी सत्र में बाद में जारी होने वाले फेडरल रिजर्व की जून नीति बैठक के मिनट्स का भी इंतजार कर रहे थे। दूसरी ओर, EUR/USD जोड़ी भी बुधवार को भारी बिकवाली के दबाव में आ गई और अमेरिकी डॉलर की चौतरफा मजबूती के कारण 1.1400 के स्तर की तरफ नीचे गिर गई, जो वैश्विक स्तर पर पूंजी को सुरक्षित रखने की निवेशकों की बेताबी को दर्शाता है।

सोने और कच्चे तेल की चाल में बड़ा अंतर

भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर कमोडिटी बाजार में दो बिल्कुल विपरीत तस्वीरें देखने को मिलीं। सोना, जिसे आमतौर पर अनिश्चितता के समय सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है, बुधवार को अचानक नीचे की ओर मुड़ गया और भारी गिरावट के साथ $4,050 के करीब कारोबार करने लगा। सोने की इस गिरावट के पीछे अमेरिकी डॉलर की असाधारण मजबूती थी, जिसने विदेशी खरीदारों के लिए इस पीली धातु को काफी महंगा बना दिया। इसके विपरीत, वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल यूरोपीय सत्र के दौरान 3.2% की भारी उछाल के साथ $74.30 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। यह पिछले दो हफ्तों में अमेरिकी कच्चे तेल का उच्चतम स्तर था, क्योंकि तेल व्यापारियों को डर था कि ईरान समझौते के खत्म होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर सीधा और प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

दबाव में डिजिटल संपत्ति और पाई नेटवर्क

मंदी का यह माहौल सिर्फ पारंपरिक बाजारों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि डिजिटल संपत्तियों में भी इसका असर साफ दिखा। पाई नेटवर्क (PI) की कीमत नीचे खिसक कर $0.1000 के स्तर की ओर बढ़ती दिखी, जिससे इसकी गिरावट का सिलसिला लगातार पांचवें दिन भी जारी रहा। इस क्रिप्टोकरेंसी को लेकर खुदरा निवेशकों की धारणा लगातार नकारात्मक होती जा रही है, जो ओपन इनवेस्टमेंट और घटती फंडिंग दर से साफ जाहिर है। हालांकि तकनीकी चार्ट यह दिखा रहे हैं कि PI टोकन वर्तमान में ओवरसोल्ड जोन में है, लेकिन इसके बावजूद बिकवाली का दबाव लगातार बना हुआ है, जिससे इस डिजिटल एसेट का अल्पकालिक दृष्टिकोण बेहद कमजोर नजर आ रहा है।

फॉरवर्ड गाइडेंस का बदलता दौर

व्यापक आर्थिक स्तर पर देखें तो केंद्रीय बैंकों के संवाद करने के तरीकों में एक बड़ा नीतिगत बदलाव आ रहा है। सालों से फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंग्लैंड जैसे प्रमुख संस्थान फॉरवर्ड गाइडेंस पर बहुत अधिक निर्भर रहे हैं, जिसके तहत वे बाजारों को पहले से ही यह बता देते थे कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर उनकी क्या योजना है। लेकिन अब ट्रेडर्स को एक नए दौर का सामना करना पड़ रहा है, जहां नीति निर्माता इस फॉरवर्ड गाइडेंस से दूरी बना रहे हैं। केंद्रीय बैंक अब भविष्य के कदमों पर कम से कम बोलने या पूरी तरह शांत रहने की रणनीति अपना रहे हैं, जिससे बाजारों को बिना किसी केंद्रीय सरकारी सहारे के खुद ही अनिश्चितताओं का मुकाबला करना होगा।

इसका आप पर असर

पाठकों पर प्रभाव:

  • वैश्विक निवेशकों के लिए: भू-राजनीतिक अस्थिरता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, जिससे पोर्टफोलियो जोखिम बढ़ गया है।
  • कच्चे तेल के खरीदारों के लिए: ईरान समझौते के समाप्त होने से वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे आने वाले दिनों में परिवहन लागत और मुद्रास्फीति में वृद्धि हो सकती है।

सवाल-जवाब

EUR/GBP की वर्तमान स्थिति क्या है?
बुधवार को EUR/GBP 0.8635 और 0.8650 के बीच कंसोलिडेशन के दौर से गुजर रहा था, जिसमें तकनीकी संकेतक बुलिश डाइवर्जेंस प्रदर्शित कर रहे थे।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल क्यों आया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) समाप्त करने की घोषणा के बाद आपूर्ति में व्यवधान की आशंकाओं के कारण WTI कच्चा तेल 3.2% उछलकर $74.30 के पास पहुंच गया।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बारे में क्या फैसला लिया है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की कि ईरान के साथ संघर्ष समाप्त करने के लिए किया गया समझौता अब खत्म हो चुका है और वह तेहरान के साथ कोई बातचीत नहीं चाहते हैं।
केंद्रीय बैंकों के फॉरवर्ड गाइडेंस में क्या बदलाव आ रहा है?
फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंग्लैंड जैसे प्रमुख नीति निर्माता अब फॉरवर्ड गाइडेंस को कम कर रहे हैं और नीतिगत फैसलों के बारे में कम बोलने की रणनीति अपना रहे हैं।
सोने की कीमतों पर इस भू-राजनीतिक तनाव का क्या असर हुआ?
सुरक्षित निवेश के माहौल के बावजूद, मजबूत होते अमेरिकी डॉलर के कारण सोना बुधवार को भारी बिकवाली के दबाव में आ गया और $4,050 के करीब आ गया।
अमित पटेल
लेखक के बारे मेंअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता दिल्ली
विशेषज्ञताबिज़नेस समाचार, वित्तीय बाज़ार, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट मामले, स्टार्टअप, उद्यमिता, आर्थिक रुझान, टेक्नोलॉजी बिज़नेस, निवेश, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, स्टार्टअप, तकनीक और आर्थिक रुझानों को कवर करते हैं। वे आधुनिक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले कारोबार और उद्योगों की ख़बरें, बाज़ार विश्लेषण और अंतर्दृष्टि देते हैं।

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, उद्यमिता, तकनीक और आर्थिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे ब्रेकिंग बिज़नेस न्यूज़, कॉर्पोरेट रणनीतियों, शेयर बाज़ार के रुझानों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले औद्योगिक नवाचारों पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, स्पष्टता और गहन विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए अमित पाठकों को जटिल कारोबारी विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करते हैं। उनकी कवरेज वित्तीय बाज़ार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, उभरते उद्योगों, आर्थिक नीति, निवेश रुझानों और डिजिटल बदलाव तक फैली है।

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