मध्य पूर्व क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव उस समय अत्यधिक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया जब अमेरिकी सेंट्रल कमान (सेंटकॉम) के सैन्य बलों ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जारी ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाकर कई सटीक सैन्य हमले किए। अमेरिकी सेना द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सैन्य कार्रवाई ओमान की खाड़ी में तथा ईरान के रणनीतिक खार्ग द्वीप के समीप स्थित तेल जहाजों पर की गई। हमले को अंजाम देने से पहले अमेरिकी सैन्य कमान ने जहाजों पर मौजूद चालक दल के सदस्यों को तुरंत पोत खाली करने का स्पष्ट निर्देश दिया था ताकि जनहानि को रोका जा सके। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि निशाना बनाए गए यह तेल टैंकर अरबों डॉलर मूल्य के एक विशाल नेटवर्क का हिस्सा थे। यह नेटवर्क इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और उसके सहयोगी क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को वित्तीय संसाधन मुहैया कराने का काम करता था।
कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों पर आईआरजीसी की जवाबी हमले की चेतावनी
समुद्री जहाजों पर हुए इस अमेरिकी हमले के तुरंत बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और समुद्री यातायात को लेकर कड़ी चेतावनी जारी कर दी। आईआरजीसी के सैन्य नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि कुवैत और बहरीन के उन बंदरगाहों तथा वहां से गुजरने वाले जहाजों को जवाबी कार्रवाई में निशाना बनाया जा सकता है, जो अमेरिकी सैन्य टुकड़ियों को मेजबानी प्रदान करते हैं। इसी बीच सुरक्षा स्थिति और अधिक बिगड़ गई जब ईरान समर्थित हुथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर नए सैन्य हमले शुरू कर दिए। हुथी लड़ाकों ने सऊदी अरब की घरेलू बाजार आपूर्ति प्रणाली के साथ-साथ प्रतिदिन 4,00,000 बैरल शोधन क्षमता वाली रणनीतिक जाजान रिफाइनरी को फिर से निशाना बनाने का दावा किया।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट का दायरा
फारस की खाड़ी के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर तुरंत देखने को मिला। बाजार में कारोबार के दौरान वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड ऑयल वायदा में 0.13 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और इसका भाव $92.35 प्रति बैरल पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम व्यापार में वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट को ब्रेंट क्रूड और दुबई क्रूड के साथ विश्व का प्रमुख मूल्य बेंचमार्क माना जाता है। कम घनत्व और सल्फर की बेहद कम मात्रा के कारण इसे बाजार में हल्का और मीठा कच्चा तेल कहा जाता है। इन रासायनिक गुणों के कारण रिफाइनरियों के लिए WTI से पेट्रोल और डीजल बनाना काफी आसान और किफायती होता है। भौतिक रूप से WTI तेल का वितरण अमेरिका के ओक्लाहोमा स्थित कुशिंग हब के माध्यम से होता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा परिवहन का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।
अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल बाजार को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव मुख्य रूप से वैश्विक मांग और आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करता है। जब दुनिया भर में आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं तो ऊर्जा की मांग बढ़ती है, जिससे तेल की कीमतें ऊपर जाती हैं। इसके विपरीत वैश्विक आर्थिक सुस्ती मांग को घटा देती है। आर्थिक चक्र के अलावा भू-राजनीतिक उथल-पुथल, युद्ध की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करते हैं, जिससे कीमतों में अचानक उछाल आता है। इसके अलावा कच्चे तेल का उत्पादन करने वाले प्रमुख देशों का संगठन ओपेक भी उत्पादन कोटा तय करके कीमतों को नियंत्रित करता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की विनिमय दर में आने वाला बदलाव भी तेल की कीमतों को सीधे प्रभावित करता है।
एपीआई और ईआईए की साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट का महत्व
ऊर्जा बाजार के कारोबारी और विश्लेषक आपूर्ति और मांग की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए साप्ताहिक इन्वेंट्री आंकड़ों पर पैनी नजर रखते हैं। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (एपीआई) हर मंगलवार को अपनी साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट जारी करता है, जबकि सरकारी एजेंसी एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी (ईआईए) अगले दिन बुधवार को अपने आधिकारिक आंकड़े पेश करती है। ऐतिहासिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि दोनों संगठनों द्वारा जारी इन्वेंट्री आंकड़ों में लगभग 75 प्रतिशत मामलों में 1 प्रतिशत से भी कम का अंतर होता है। हालांकि, वित्तीय बाजार ईआईए के आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय मानते हैं क्योंकि यह एक सरकारी संस्था है। इन्वेंट्री में गिरावट मजबूत मांग का संकेत देती है जिससे कीमतें बढ़ती हैं, जबकि इन्वेंट्री में बढ़ोतरी आपूर्ति आधिक्य को दर्शाती है जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।
ओपेक और ओपेक प्लस की उत्पादन नीतियों का असर
दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातक देशों द्वारा अपनाई जाने वाली नीतियां वैश्विक बाजार में कीमतों की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ओपेक संगठन में 12 सदस्य देश शामिल हैं जो साल में दो बार बैठक करके कच्चे तेल के उत्पादन का कोटा निर्धारित करते हैं। जब ओपेक सदस्य देश उत्पादन में कटौती का फैसला करते हैं, तो बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता कम हो जाती है जिससे कीमतें बढ़ने लगती हैं। इसके विपरीत उत्पादन बढ़ाने के फैसले से आपूर्ति बढ़ती है और कीमतें नीचे आती हैं। ओपेक प्लस समूह में ओपेक के 12 सदस्यों के अलावा 10 अन्य गैर-ओपेक देश भी शामिल हैं, जिनमें रूस सबसे प्रमुख भागीदार देश के रूप में कार्य करता है।
अमेरिका में डीजल क्रैक स्प्रेड में रिकॉर्ड तेजी से रिफाइंड ईंधन की तंगी
कच्चे तेल के बेंचमार्क में मामूली उतार-चढ़ाव के बावजूद रिफाइंड ईंधन बाजार से एक अलग संकेत मिल रहा है। अमेरिका में डीजल क्रैक स्प्रेड, यानी WTI कच्चे तेल की तुलना में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल वायदा का प्रीमियम, इतिहास में पहली बार $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। इंट्राडे कारोबार के दौरान यह प्रीमियम $102.00 प्रति बैरल के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। क्रैक स्प्रेड में यह ऐतिहासिक उछाल रिफाइंड ईंधन की भारी तंगी और रिफाइनिंग क्षमताओं पर पड़ रहे दबाव को उजागर करता है।
विदेशी मुद्रा बाजार में AUD/USD और USD/JPY की हलचल
भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की भावी ब्याज दर नीतियों के बीच अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में मिश्रित रुझान देखने को मिला। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7200 के स्तर से ऊपर बना रहा, जो 14 मई के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने की संभावनाओं के बावजूद रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) द्वारा चालू माह में दरें बढ़ाने की उम्मीदों से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला। दूसरी ओर, अमेरिकी सत्र में USD/JPY जोड़ी 154.00 के आसपास कारोबार करती नजर आई, जो दिन के निचले स्तर 153.00 से उबरी थी। जापानी अर्थव्यवस्था में वेतन वृद्धि के मजबूत आंकड़ों और दूसरी तिमाही के संशोधित जीडीपी आंकड़ों ने बैंक ऑफ जापान (बीओजे) द्वारा अगले सप्ताह ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीदों को मजबूत किया है, जिससे जापानी येन को समर्थन मिल रहा है।


















