जापान के किउची ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है कि उनका लक्ष्य एक मजबूत अर्थव्यवस्था और राजकोषीय स्थिरता के बीच सटीक संतुलन बनाना है। उन्होंने वित्तीय बाजारों की चिंताओं को पूरी तरह दूर करने और निवेशकों को आश्वस्त करने का इरादा जताया। इसके साथ ही उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार किसी भी तरह के लापरवाह राजकोषीय विस्तार के रास्ते पर नहीं चलेगी, हालांकि उन्होंने ब्याज दरों के आगामी रुख पर कोई भी टिप्पणी करने से पूरी तरह परहेज किया। इस बीच वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में हलचल तेज हो गई है और यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी 0.10 प्रतिशत की दैनिक गिरावट के साथ 156.10 के स्तर पर दर्ज की गई।
जापानी मुद्रा का स्वरूप और मूल्य तय करने वाले बुनियादी कारक
जापानी येन दुनिया की सबसे अधिक कारोबार वाली मुद्राओं में प्रमुख स्थान रखती है। विदेशी मुद्रा बाजार में येन की विनिमय दर मोटे तौर पर जापान की समग्र अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन से तय होती है, लेकिन कई तकनीकी और नीतिगत कारक इसकी चाल को गहराई से प्रभावित करते हैं। इनमें बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति का ढांचा, जापानी और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर और अंतरराष्ट्रीय व्यापारियों के बीच बाजार में जोखिम लेने की भावना सबसे महत्वपूर्ण हैं।
बैंक ऑफ जापान के मुख्य वैधानिक दायित्वों में मुद्रा का नियंत्रण शामिल है, जिस कारण केंद्रीय बैंक के हर कदम पर विदेशी मुद्रा कारोबारियों की पैनी नजर रहती है। बैंक ऑफ जापान ने जरूरत पड़ने पर अतीत में विदेशी मुद्रा बाजार में सीधी दखलंदाजी भी की है, जिसका प्राथमिक मकसद आमतौर पर येन के मूल्य को घटाना रहा है। हालांकि, प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की राजनीतिक और कूटनीतिक चिंताओं को देखते हुए जापानी केंद्रीय बैंक बार-बार या बहुत खुलकर इस तरह के सीधे हस्तक्षेप से बचता रहा है।
अल्ट्रा-लूज मौद्रिक नीति का दौर और नीतियों में बढ़ता टकराव
वर्ष 2013 से लेकर 2024 के लंबे दशक के दौरान बैंक ऑफ जापान ने अत्यंत उदार यानी अल्ट्रा-लूज मौद्रिक नीति पर दृढ़ता से अमल किया। इस दशक भर चली नीति के कारण जापानी येन अपनी प्रमुख प्रतिस्पर्धी वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले लगातार कमजोर होता चला गया। इस भारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह बैंक ऑफ जापान और दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों, विशेष रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बीच बढ़ता नीतिगत फासला था।
एक दशक से अधिक समय तक जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व और अन्य संस्थान ब्याज दरें बढ़ा रहे थे, तब बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी अत्यधिक ढीली नीति पर टिके रहने से 10 वर्षीय अमेरिकी और जापानी सरकारी बॉन्ड यील्ड का अंतर बहुत चौड़ा हो गया। यील्ड के इस भारी अंतर ने सीधे तौर पर अमेरिकी डॉलर को जापानी येन की तुलना में जबर्दस्त लाभ पहुंचाया। हालांकि वर्ष 2024 में बैंक ऑफ जापान ने इस अल्ट्रा-लूज नीति को धीरे-धीरे समाप्त करने और वापस खींचने का ऐतिहासिक फैसला लिया। अन्य प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में की जा रही कटौती के साथ मिलकर इस कदम ने बॉन्ड यील्ड के फासले को संकरा करना शुरू कर दिया, जिससे येन को हाल के दिनों में ठोस समर्थन मिला है।
वैश्विक उथल-पुथल में सुरक्षित ठिकाने के रूप में येन की साख
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में जापानी येन को पारंपरिक रूप से एक सुरक्षित निवेश यानी सेफ-हेवन मुद्रा के तौर पर देखा जाता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जब भी वैश्विक बाजार में भू-राजनीतिक तनाव, मंदी का डर या वित्तीय दबाव की स्थिति बनती है, तब निवेशक अपनी पूंजी को जापानी मुद्रा में लगाना अधिक सुरक्षित मानते हैं। येन की कथित विश्वसनीयता और वित्तीय स्थिरता कठिन समय में पूंजी को सुरक्षित रखने का माध्यम बनती है। बाजार के अनिश्चित और उथल-पुथल भरे दौर में जोखिम भरी मानी जाने वाली अन्य मुद्राओं की तुलना में येन के मूल्य में मजबूती आने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
जापान की दशकों पुरानी बेहद निचली ब्याज दरों ने दुनिया भर में खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश को वित्तीय संसाधन मुहैया कराने में मदद की थी। इस तंत्र ने जापानी येन को वैश्विक स्तर पर पूंजी जुटाने का दुनिया का सबसे सस्ता साधन बना दिया था। अब चूंकि बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति को फिर से सख्त करने की व्यापक उम्मीदें बनी हुई हैं, इसलिए सस्ते कर्ज का यह पुराना वैश्विक फायदा एक बिल्कुल नए दौर में प्रवेश कर रहा है। जब दुनिया की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरें तेजी से बढ़ा रही थीं, तब भी जापान वैश्विक स्तर पर सबसे अलग खड़ा रहा था।
एशियाई सत्र में मुद्रा और कमोडिटी बाजारों की ताजा स्थिति
गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में विदेशी मुद्रा बाजारों में डॉलर की रफ्तार पर कुछ ठहराव देखा गया। यूएसडी/जेपीवाई ने 156.00 के नीचे आई संक्षिप्त गिरावट को उलट दिया और पिछले कारोबारी दिन बने लगभग दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर दर्ज लगातार तीन दिनों की बढ़त के सिलसिले को तोड़ा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बाद सात सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंची डॉलर की रैली अब थमी है, जबकि बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति सामान्यीकरण की दिशा में तेजी से बढ़ने की उम्मीदों ने येन को मजबूती दी है। इस वजह से डॉलर/येन जोड़ी की बढ़त सीमित बनी हुई है और अब बाजार का पूरा ध्यान शुक्रवार को आने वाले बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले पर केंद्रित हो गया है।
दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने भी रफ्तार पकड़ी है। एशियाई सत्र में गुरुवार को नए खरीदारों के आने से एयूडी/यूएसडी जोड़ी ने 0.7100 का स्तर दोबारा हासिल कर लिया। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के दांव और अमेरिका तथा ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीदों ने बाजार की जोखिम धारणा को सहारा दिया है। इससे जोखिम-संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को बढ़त मिली। इस बीच कमोडिटी बाजार में सोने पर बिकवाली का दबाव देखा गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति घोषणाओं के ठीक बाद 4,235 डॉलर के छह सप्ताह के निचले स्तर को छूने वाला सोना उबरने की कोशिश में गुरुवार की शुरुआत में 4,300 डॉलर प्रति औंस से ऊपर नए विक्रेताओं के दबाव में आ गया, जिससे इसकी रिकवरी रुक गई।


















