ग्लोबल फाइनेंशियल बाजारों में उस समय हलचल काफी बढ़ गई है जब अमेरिका का ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस बुधवार को दोपहर 12:30 GMT पर जुलाई महीने के पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स आंकड़े जारी करने जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों और मौद्रिक नीति के लिहाज से यह आर्थिक रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण समय पर आ रही है। अनुमान जताया गया है कि जुलाई के लिए हेडलाइन PCE मुद्रास्फीति में महीने-दर-महीने 0.1% की मामूली बढ़त देखने को मिल सकती है। यह संभावित वृद्धि जून महीने में दर्ज की गई 0.1% की गिरावट से पलटाव का संकेत देती है, जो यह दर्शाती है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव लगातार बना हुआ है। मुद्रास्फीति के आंकड़ों के साथ-साथ अमेरिकी सरकार दूसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का पहला अनुमान और जुलाई के ड्यूरेबल गुड्स ऑर्डर्स के आंकड़े भी जारी करेगी। एक साथ कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों के आने से वैश्विक बाजारों में ब्याज दरों, विदेशी मुद्रा विनिमय दरों, शेयर बाजारों और कमोडिटी की कीमतों पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर प्राइस डिफ्लेटर फेडरल रिजर्व का सबसे पसंदीदा मुद्रास्फीति पैमाना है, जिसका उपयोग केंद्रीय बैंक अपनी आधिकारिक मौद्रिक नीति तय करने के लिए करता है। दुनिया भर के निवेशक और वित्तीय विश्लेषक इस बात का गहराई से आकलन कर रहे हैं कि क्या लगातार बनी हुई महंगाई फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वारश को लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति अपनाए रखने के लिए मजबूर करेगी। खाद्य और ऊर्जा की कीमतों को छोड़कर आंकी जाने वाली कोर मुद्रास्फीति दर, जो अपनी अस्थिरता के कारण अलग रखी जाती है, केंद्रीय बैंक के 2% के वार्षिक लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई है। इसके परिणामस्वरूप, अंतरराष्ट्रीय निवेशक आने वाले महीनों में उधारी लागत और संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी के रास्ते को लेकर अत्यधिक असमंजस की स्थिति में हैं।
केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है कोर PCE मुद्रास्फीति
जुलाई महीने के लिए कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों में महीने-दर-महीने आधार पर 0.2% की बढ़ोतरी का अनुमान व्यक्त किया गया है, जो जून में दर्ज 0.1% की वृद्धि से अधिक है। वहीं अगर सालाना आधार पर देखा जाए तो कोर PCE मुद्रास्फीति के 3.3% पर स्थिर रहने की संभावना है, जो पिछले साल जुलाई से इसी स्तर पर बनी हुई है। यद्यपि 3.3% का यह आंकड़ा मई में दर्ज 3.4% के उच्चतम स्तर से थोड़ा नीचे है, लेकिन यह फेडरल रिजर्व के 2% के तय लक्ष्य से काफी अधिक है। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष और ईंधन की ऊंची कीमतों ने अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के दबाव को लगातार बनाए रखा है, जिसका कोई त्वरित समाधान फिलहाल नजर नहीं आ रहा है।
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के फैसलों को सही ढंग से समझने के लिए हेडलाइन और कोर मुद्रास्फीति के बीच के अंतर को जानना अनिवार्य है। हेडलाइन PCE आम उपभोक्ताओं द्वारा खरीदे जाने वाले वस्तुओं और सेवाओं के व्यापक बास्केट की कुल लागत को मापता है। हालांकि, कृषि उत्पादों में अस्थायी आपूर्ति बाधाओं या कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव से हेडलाइन आंकड़े काफी प्रभावित हो जाते हैं। इसके विपरीत, कोर PCE जानबूझकर खाद्य और ऊर्जा घटकों को बाहर रखता है, जिससे अर्थशास्त्रियों और नीति निर्माताओं को दीर्घकालिक मूल्य प्रवृत्तियों का एक स्पष्ट और निष्पक्ष चित्र मिलता है। क्योंकि कोर आंकड़े अल्पकालिक अस्थिरता को दूर करते हैं, केंद्रीय बैंक के शीर्ष अधिकारी इसी पैमाने को आधार बनाकर यह निर्णय लेते हैं कि अर्थव्यवस्था में मांग को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को उच्च स्तर पर रखना आवश्यक है या नहीं।
कोर मुद्रास्फीति का 3.3% पर लगातार बने रहना मूल्य स्थिरता के सामने खड़ी ढांचागत चुनौतियों को रेखांकित करता है। केंद्रीय बैंक द्वारा पहले की गई ब्याज दर बढ़ोतरी के बावजूद उपभोक्ता मांग और सेवा क्षेत्र की लागत में काफी मजबूती देखी गई है। केंद्रीय बैंक के अधिकारी इसलिए भी अधिक सतर्क हैं क्योंकि लंबे समय तक उच्च मुद्रास्फीति बने रहने से व्यवसायों और आम जनता के मन में उच्च महंगाई की आशंकाएं गहरी जड़ें जमा लेती हैं। यदि एक बार मुद्रास्फीति की उम्मीदें अनियंत्रित हो जाती हैं, तो मूल्य वृद्धि को वापस 2% के लक्ष्य पर लाना आर्थिक उत्पादन और रोजगार के दृष्टिकोण से अत्यधिक कठिन और नुकसानदेह साबित हो सकता है।
जैक्सन होल संबोधन और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति का अनुमान
वित्तीय बाजारों की निगाहें अब जैक्सन होल में आयोजित होने जा रही संगोष्ठी में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वारश के आगामी मुख्य संबोधन पर टिकी हुई हैं। डीबीएस बैंक के वित्तीय रणनीतिकारों का कहना है कि चेयरमैन द्वारा पारंपरिक फॉरवर्ड गाइडेंस को खत्म करने के फैसले से वैश्विक परिसंपत्ति बाजारों में उतार-चढ़ाव काफी बढ़ गया है। डीबीएस बैंक के विश्लेषकों के अनुसार, केविन वारश को यह स्पष्ट करना होगा कि फॉरवर्ड गाइडेंस के बिना फेडरल रिजर्व लंबी अवधि की बाजार उम्मीदों को कैसे स्थिर रखेगा। इसके अलावा, निवेशकों को यह भी जानने की आवश्यकता है कि लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के माध्यम से केंद्रीय बैंक कितनी सख्त नीति को सहन करने के लिए तैयार है और फेडरल रिजर्व व अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के बीच नीतिगत सीमाएं क्या हैं।
केंद्रीय बैंक की भावी रणनीति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने आगामी मौद्रिक नीति बैठकों के लिए अपनी प्रत्याशाओं को बदल दिया है। CME फेडवॉच टूल के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि सितंबर की नीतिगत बैठक में 0.25% ब्याज दर वृद्धि की बाजार-आधारित संभावना गिरकर 38% पर आ गई है, जो केवल एक महीने पहले 55% के स्तर पर थी। नीति निर्माताओं की ओर से स्पष्ट फॉरवर्ड गाइडेंस न मिलने के कारण बाजार में इस बात को लेकर संदेह पैदा हो गया है कि केविन वारश मुद्रास्फीति से निपटने के लिए किस हद तक कड़े कदम उठाएंगे। इस स्थिति में, यदि बुधवार को जारी होने वाले कोर PCE आंकड़े उम्मीद से अधिक गर्म आते हैं, तो यह बाजार की धारणा को तुरंत बदल सकता है और ट्रेडर्स को फिर से दर बढ़ोतरी की संभावनाओं को नए सिरे से आंकने पर मजबूर कर सकता है।
केंद्रीय बैंक के संचार और वित्तीय बाजार की स्थिरता के बीच बेहद गहरा संबंध होता है। जब केंद्रीय बैंक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करते हैं, तो वित्तीय संस्थान परिसंपत्तियों के जोखिम का अधिक सटीकता से आकलन कर पाते हैं। लेकिन जब नीति निर्माता केवल आंकड़ों पर निर्भर रहने का रुख अपनाते हैं और पूर्व दिशा-निर्देश देना बंद कर देते हैं, तो हर नई आर्थिक रिपोर्ट के साथ बाजारों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इस समय वैश्विक निवेशक एक तरफ लगातार बनी हुई महंगाई के डर और दूसरी तरफ अत्यधिक सख्ती से आर्थिक मंदी आने की आशंका के बीच फंसे हुए हैं, जिससे चेयरमैन केविन वारश का जैक्सन होल भाषण वैश्विक पूंजी निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गया है।
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स का रुझान और विदेशी मुद्रा बाजार का विश्लेषण
छह मुख्य अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा के मूल्य को मापने वाला US डॉलर इंडेक्स (DXY) हाल के हफ्तों में निरंतर दबाव का सामना कर रहा है। DXY में पिछले एक महीने में 0.75% की गिरावट आई है और यह जुलाई के अंत में दर्ज अपने उच्चतम स्तर से 2.5% से अधिक नीचे कारोबार कर रहा है। विदेशी मुद्रा विश्लेषकों का मानना है कि यदि फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की ओर से सख्त मौद्रिक नीति का स्पष्ट समर्थन नहीं मिलता है, तो केवल मजबूत PCE आंकड़े अमेरिकी डॉलर में लंबे समय तक टिकने वाली तेजी नहीं ला सकते। ओसीबीसी के विश्लेषकों ने जोर देकर कहा है कि अमेरिकी डॉलर को महत्वपूर्ण समर्थन प्राप्त करने के लिए केविन वारश और अन्य केंद्रीय बैंक अधिकारियों को मुद्रा अवमूल्यन की बढ़ती चिंताओं को खारिज करना होगा और मुद्रास्फीति को 2% के लक्ष्य पर वापस लाने के संकल्प को फिर से दोहराना होगा।
करंसी पेयर्स के कारोबार में EUR/USD में हालिया तेजी के बाद हल्का सुस्ती का दौर देखा गया है, क्योंकि तकनीकी चार्ट्स पर कीमतें ओवरबॉट जोन में पहुंच गई थीं। इस अल्पकालिक पुलबैक के बावजूद, 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) 1.1630 के ऊपर इस पेयर का ढांचागत रुख अभी भी सकारात्मक बना हुआ है। डेली मोमेंटम इंडिकेटर्स तेजी के संकेत का समर्थन कर रहे हैं, जिसमें रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 70.00 के आसपास है और मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) इंडिकेटर शून्य से काफी ऊपर बना हुआ है।
नीचे की तरफ, EUR/USD के लिए पहला तकनीकी सपोर्ट 1.1630 के 200-दिवसीय SMA और 1.1615 के पुराने रेजिस्टेंस क्षेत्र के बीच स्थित है। यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है, तो अगला सपोर्ट 19 अगस्त के निचले स्तर 1.1570 पर और फिर उसके बाद अगस्त की शुरुआत के निचले स्तर 1.1500 के आसपास मिलेगा। वहीं दूसरी ओर, GBP/USD बुधवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान 1.3650 के नीचे हल्के नकारात्मक रुझान के साथ कारोबार कर रहा है, जिसने अपनी हालिया बढ़त का कुछ हिस्सा गंवा दिया है। इसके बावजूद GBP/USD पिछले शुक्रवार को बने अपने छह महीने के उच्चतम स्तर के करीब बना हुआ है, क्योंकि ट्रेडर्स अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।
कीमती धातुओं का बाजार और सोने का लाइव तकनीकी विश्लेषण
कीमती धातुओं के बाजार में खासी गतिविधि देखी जा रही है क्योंकि ट्रेडर्स अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों से पहले अपने पोर्टफोलियो को रीसेट कर रहे हैं। यूरोपीय सत्र की शुरुआत में सोना $4,650 के नीचे थोड़ा गिर गया था, लेकिन इसके बाद निचले स्तरों पर जोरदार खरीदारी देखने को मिली जिसने कीमतों को ऊपर धकेल दिया। बाजार बंद होने के समय के लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, सोना (GC=F) $4,685 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है, जो अपने पिछले बंद भाव $4,638 की तुलना में 1.01% की दैनिक बढ़त दर्शाता है। कारोबार का वॉल्यूम 20-दिन के औसत से 10.58 गुना अधिक बढ़ गया, जो इसके $3,371 से $5,586 के 52-सप्ताह के ट्रेडिंग दायरे में बड़े संस्थागत निवेशकों की भारी खरीदारी का संकेत देता है।
सोने का विस्तृत तकनीकी आकलन मजबूत बुलिश मोमेंटम के साथ ओवरबॉट स्थितियों की पुष्टि करता है। 14-दिन का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 76 पर है जो ओवरबॉट स्थिति दिखाता है, जबकि MACD की मुख्य लाइन 130.73 पर है और सिग्नल लाइन 96.62 पर है, जिससे 34.11 का सकारात्मक हिस्टोग्राम बन रहा है। एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज के आंकड़ों के अनुसार, 20-दिवसीय EMA $4,417, 50-दिवसीय EMA $4,323 और 200-दिवसीय EMA $4,338 पर बना हुआ है। सिंपल मूविंग एवरेज में 50-दिवसीय SMA $4,203 और 200-दिवसीय SMA $4,509 पर स्थित है, जो 50-दिन और 200-दिन के EMA में डेथ क्रॉस के बावजूद लंबी अवधि के अपट्रेंड को दर्शाता है। बोलिंगर बैंड $3,983 से $4,755 के दायरे में है जिसका मध्य स्तर $4,369 है, जिससे हाजिर कीमत बैंड के भीतर सुरक्षित बनी हुई है। ट्रेंड की मजबूती मापने वाला ADX इंडिकेटर 31 पर है, जबकि स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 90 और सिग्नल लाइन 92 पर है। 14-दिन का एवरेज ट्रू रेंज (ATR) 77.04 पर है। दैनिक पिवट स्तरों में मुख्य पिवट पॉइंट $4,699, रेजिस्टेंस R1 $4,717 व R2 $4,749 और सपोर्ट S1 $4,667 व S2 $4,649 पर हैं, जबकि 20-दिवसीय सपोर्ट $4,022 और रेजिस्टेंस $4,731 के आसपास स्थित हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच सोने का $4,700 का मनोवैज्ञानिक स्तर एक बार फिर खरीदारों की नजर में आ गया है।
सोने में निवेश के मैक्रोइकोनॉमिक कारणों को समझने के लिए पूंजी की अपॉर्च्युनिटी कॉस्ट का मूल्यांकन करना आवश्यक है। ऐतिहासिक रूप से, सोने को मुद्रास्फीति के दौर में मूल्य संचय के एक सुरक्षित साधन के रूप में देखा जाता रहा है। हालांकि, आधुनिक वित्तीय बाजार जटिल स्थितियां पैदा करते हैं। जब केंद्रीय बैंक महंगाई पर काबू पाने के लिए मानक ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों को नकदी जमा और सरकारी बॉन्ड से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जो आकर्षक रिटर्न देते हैं। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति कम होती है या केंद्रीय बैंक दर कटौती का संकेत देते हैं, तो बॉन्ड यील्ड घटने से सोना रखने की अपॉर्च्युनिटी कॉस्ट कम हो जाती है, जिससे निवेशक कीमती धातुओं की ओर रुख करते हैं।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सुस्ती और मीम कॉइन्स का प्रदर्शन
विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों के अलावा डिजिटल एसेट्स के बाजार में भी मूल्य संशोधन देखा गया है। लोकप्रिय मीम क्रिप्टोकरेंसी जैसे डॉगकॉइन (DOGE), शीबा इनु (SHIB) और पेपे (PEPE) ने पिछले सप्ताह दर्ज की गई दोहरे अंकों की जोरदार बढ़त के बाद अपनी तेजी खो दी है। मुनाफावसूली के कारण DOGE और PEPE में और गिरावट का खतरा बना हुआ है, जबकि शीबा इनु (SHIB) अपने मुख्य तकनीकी सपोर्ट स्तरों पर टिका हुआ है क्योंकि क्रिप्टो निवेशक व्यापक मैक्रोइकोनॉमिक रुझानों पर नजर बनाए हुए हैं।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार की मैक्रोइकोनॉमिक आंकड़ों के प्रति संवेदनशीलता हाल के वर्षों में संस्थागत भागीदारी बढ़ने के साथ काफी बढ़ी है। जब मौद्रिक नीति उदार होती है, तो डिजिटल परिसंपत्तियां अक्सर शेयर बाजार के साथ तेजी से आगे बढ़ती हैं। लेकिन जब केंद्रीय बैंक उच्च ब्याज दरें बनाए रखते हैं या सख्त नीति का संकेत देते हैं, तो सट्टा परिसंपत्तियों में लिक्विडिटी कम हो जाती है। क्रिप्टो ट्रेडर्स बुधवार को जारी होने वाले PCE आंकड़ों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं ताकि यह समझ सकें कि क्या सख्त मौद्रिक स्थितियां क्रिप्टो लिक्विडिटी को सीमित करेंगी या बाजार में नए रुझान को जन्म देंगी।
मुद्रास्फीति माप का गणित, PCE डिफ्लेटर और विदेशी मुद्रा संबंध
यह गहराई से समझने के लिए कि मुद्रास्फीति के आंकड़े वैश्विक मुद्रा मूल्यों को कैसे प्रभावित करते हैं, उपभोक्ता मापन पद्धतियों का विश्लेषण करना जरूरी है। पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर प्राइस इंडेक्स अपनी संरचना में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) से भिन्न होता है। जबकि CPI समय के साथ वस्तुओं और सेवाओं के एक स्थिर बास्केट में मूल्य परिवर्तनों को मापता है, PCE डिफ्लेटर उपभोक्ता प्रतिस्थापन व्यवहार को गतिशीलता से शामिल करता है। जब किसी विशेष वस्तु की कीमत में तेज बढ़ोतरी होती है, तो उपभोक्ता स्वाभाविक रूप से सस्ते विकल्पों की ओर शिफ्ट हो जाते हैं। PCE इंडेक्स उपभोक्ता व्यवहार में आए इस बदलाव को दर्ज करता है, जिससे केंद्रीय बैंक के अधिकारियों को जीवन यापन की लागत के दबाव का अधिक सटीक और व्यावहारिक आकलन प्राप्त होता है।
हालांकि यह विरोधाभासी लग सकता है कि उच्च घरेलू मुद्रास्फीति से किसी देश की मुद्रा मजबूत हो सकती है, लेकिन विदेशी मुद्रा बाजार ब्याज दर समानता और पूंजी प्रवाह के सिद्धांतों पर काम करते हैं। जब मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से ऊपर निकलती है, तो बाजार के प्रतिभागी उच्च ब्याज दरों के रूप में मौद्रिक सख्ती की उम्मीद करते हैं। ऊंची ब्याज दरें बेहतर रिटर्न की तलाश में अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह को आकर्षित करती हैं। इन उच्च-उपज वाली घरेलू प्रतिभूतियों में निवेश करने के लिए विदेशी निवेशकों को घरेलू मुद्रा खरीदनी पड़ती है, जिससे उसकी विनिमय दर में मजबूती आती है। जैसे ही अमेरिका का ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस जुलाई के PCE आंकड़े जारी करेगा, वैश्विक बाजार विदेशी मुद्रा, बॉन्ड, शेयर और कमोडिटीज में अगली बड़ी रणनीति तय करने के लिए आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के बयानों का बारीकी से अध्ययन करेंगे।



















