अमेरिकी ट्रेजरी सचिव द्वारा द्वितीयक प्रतिबंधों के क्रियान्वयन को लेकर दी गई अस्पष्ट जानकारी और ट्रेजरी यील्ड में बदलाव के बीच वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की स्थिति नाजुक बनी हुई है। हालांकि ग्रीनबैक ने हाल की ट्रेडिंग में कुछ हद तक अपनी गिरावट को थामने की कोशिश की है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि बॉन्ड बाजार की अंदरूनी संरचना और बढ़ते अमेरिकी सार्वजनिक कर्ज के कारण डॉलर पर दीर्घकालिक दबाव बना रह सकता है। व्यापारी इस सप्ताह जारी होने वाले महत्वपूर्ण मुद्रास्फीति आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के बयानों से पहले सतर्क रुख अपना रहे हैं।
प्रतिबंधों पर अनिश्चितता और हेज फंड बेसिस ट्रेड का जोखिम
कॉमर्ज़बैंक के विश्लेषक वोल्कमार्क बाउर के अनुसार, सोमवार को अमेरिकी ट्रेजरी सचिव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में संभावित द्वितीयक प्रतिबंधों के बारे में बेहद कम विवरण सामने आए। इस बात का स्पष्ट खुलासा नहीं किया गया कि कौन से देश इन प्रतिबंधों से प्रभावित होंगे, इनका दायरा क्या होगा, या सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि इन्हें लागू करने की क्या समयसीमा होगी। इसी अनिश्चितता और स्पष्टता की कमी के कारण मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर को तात्कालिक स्थिरता मिली।
हालांकि, वित्तीय बाजार के जानकारों ने अमेरिकी ट्रेजरी बाजार में हेज फंडों की भारी भागीदारी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। बॉन्ड निवेशकों के बीच हेज फंडों का उच्च अनुपात और उनकी लीवरेज्ड बेसिस ट्रेड नीतियां किसी भी अचानक बदलाव के समय बॉन्ड बाजार में तेज उतार-चढ़ाव को जन्म दे सकती हैं। जब इन बेसिस ट्रेड्स को जल्दबाजी में समेटा (अनवाइंड) जाता है, तो अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स पर बिकवाली का भारी दबाव बन जाता है। अतीत की लिबरेशन डे जैसी घटनाओं से यह स्पष्ट हो चुका है कि वर्तमान परिवेश में ब्याज दरों में अचानक बढ़ोतरी भी अमेरिकी डॉलर को कमजोर कर सकती है। इसके अलावा, लगातार बढ़ता अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज और नए खरीदारों की तलाश डॉलर के लिए अनुकूल माहौल नहीं बना पा रही है।
मुद्रा बाजार की हलचल: पॉउंड और यूरो पर दबाव
विदेशी मुद्रा बाजार में प्रमुख मुद्रा जोड़ों पर भी इस अनिश्चितता का असर देखा जा रहा है। यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान GBP/USD जोड़ी 1.3650 के स्तर से नीचे मामूली नकारात्मक रुझान के साथ कारोबार करती दिखी। इससे पहले वाले कारोबारी दिन में मिली मजबूत बढ़त का कुछ हिस्सा इस गिरावट में डूब गया, हालांकि यह जोड़ी पिछले शुक्रवार को छुए गए अपने छह महीने के उच्चतम स्तर के करीब ही बनी हुई है। निवेशक नया दिशा-निर्देश पाने के लिए अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) मूल्य सूचकांक का इंतजार कर रहे हैं।
दूसरी ओर, EUR/USD भी दबाव में है और बुधवार के यूरोपीय सत्र में 1.1650 के स्तर के आसपास बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर में यह मामूली सुधार व्यापारियों द्वारा मुनाफावसूली और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण आया है। इसके साथ ही, निवेशकों की नजर अमेरिका के दूसरी तिमाही के GDP आंकड़ों के संशोधित संस्करण पर भी टिकी हुई है।
सोने में सुस्ती और मीम कॉइन्स में मुनाफावसूली
कीमती धातुओं के बाजार में सोना यूरोपीय सत्र की शुरुआत तक $4,650 प्रति औंस से नीचे हल्के नुकसान के साथ कारोबार कर रहा था। हालांकि, सोने में बिकवाली का दबाव बहुत गहरा नहीं है और यह पिछले दिन की व्यापक ट्रेडिंग रेंज के भीतर ही सीमित रहा। अमेरिकी डॉलर में आई हल्की रिकवरी और आगामी PCE डेटा से पहले निवेशकों की स्थिति पुनर्गठन से सोने की कीमतों पर दबाव देखा गया। इसके अलावा, शुक्रवार को जैक्सन होल सिंपोजियम में फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श के आगामी वक्तव्य से ब्याज दरों के भविष्य के रास्ते पर अहम संकेत मिल सकते हैं।
डिजिटल एसेट बाजार में, पिछले हफ्ते दो अंकों की शानदार तेजी दर्ज करने वाले प्रमुख मीम कॉइन्स—जैसे डॉजकॉइन (DOGE), शिबा इनु (SHIB) और पेपे (PEPE)—अपनी तेजी की गति खोते नजर आ रहे हैं। मुनाफावसूली के चलते DOGE और PEPE में आगे और गिरावट का जोखिम बना हुआ है, जबकि SHIB अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल पर टिके रहने का प्रयास कर रहा है।
अहम आर्थिक आंकड़े: PCE इन्फ्लेशन और जैक्सन होल के संकेत
अमेरिकी ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस (BEA) द्वारा जुलाई महीने का व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) मूल्य सूचकांक 12:30 GMT पर प्रकाशित किया जाना निर्धारित है। बाजार को उम्मीद है कि यह PCE मुद्रास्फीति डेटा दर्शाएगा कि मूल्य दबाव अभी भी उच्च स्तर पर बना हुआ है, जो फेडरल रिजर्व के 2% के लक्षित मानक से काफी ऊपर है। यदि मुद्रास्फीति उम्मीद से अधिक बनी रहती है, तो यह फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और डॉलर की भावी चाल को गहराई से प्रभावित कर सकती है।



















