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कच्चे तेल में उछाल और अमेरिकी डॉलर की भारी मांग से यूरो दबाव में, 1.1000 के स्तर पर टिकी नजरेंबाज़ार
9 अक्तू॰ 2026, 9:12 pm (56 मिनट पहले)· 0

कच्चे तेल में उछाल और अमेरिकी डॉलर की भारी मांग से यूरो दबाव में, 1.1000 के स्तर पर टिकी नजरें

मध्य पूर्व में जारी तनाव, महंगे क्रूड ऑयल और फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बीच यूरो में गिरावट जारी है। मुद्रा बाजार में डॉलर की बढ़ती मजबूती के चलते अब 1.1000 के अहम स्तर की परीक्षा हो सकती है।

EUR/USD━SMA20 ━SMA50 · RSI · MACD
Candles + SMA20/50 · RSI(14) · MACD(12,26,9) with buy/sell signals — live from Yahoo

तकनीकी विश्लेषण9 अक्टूबर 2026

मूविंग एवरेजEMA 20 / 50 / 200

यह क्या है

EMA यानी एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज कीमत को सहज बनाकर छोटी (20), मध्यम (50) और लंबी (200) अवधि का रुझान दिखाती हैं। कीमत इनके ऊपर और तीनों ऊपर की ओर हों तो तेजी का रुझान; नीचे और नीचे की ओर हों तो गिरावट का रुझान।

अभी यह कहाँ है

EUR/USD अभी 1.12 पर है, जबकि EMA20 1.14, EMA50 1.14 और EMA200 1.16 पर हैं।

आगे संभावित चाल

तेजी संभवतः EMA20 (1.14) के पास थम सकती है।

RSIRelative Strength Index (14)

यह क्या है

RSI 0 से 100 तक का मोमेंटम मापक है जो हालिया बढ़त बनाम गिरावट दिखाता है। 70 के ऊपर ओवरबॉट (खिंचा हुआ), 30 के नीचे ओवरसोल्ड (बिकवाली से थका), और 50 तटस्थ रेखा है।

अभी यह कहाँ है

EUR/USD का RSI 21 है।

आगे संभावित चाल

30 के ऊपर वापसी उछाल की पुष्टि करती है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में इन दिनों वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और केंद्रीय बैंकों के सख्त फैसलों का सीधा असर देखने को मिल रहा है। विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो बनाम अमेरिकी डॉलर यानी EUR/USD पर मंदी का दबाव लगातार गहराता जा रहा है। मध्य पूर्व के फारस की खाड़ी क्षेत्र में गहराते संकट और लगातार ऊंची बनी ऊर्जा कीमतों ने अमेरिकी डॉलर को निवेशकों की पहली पसंद बना दिया है। इसके विपरीत, यूरोजोन में छाई राजनीतिक अनिश्चितता और कमजोर आर्थिक सुधार की वजह से साझा यूरोपीय मुद्रा लगातार कमजोर पड़ रही है। मुद्रा व्यापारी अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या यह गिरावट आने वाले दिनों में 1.1000 के बेहद अहम मनोवैज्ञानिक स्तर का परीक्षण करेगी। मौजूदा सत्र में 1.12 के स्तर पर कारोबार कर रही यह जोड़ी पिछले बंद स्तर 1.12 से 0.05% की हल्की गिरावट दिखा रही है और अपने 52 हफ्तों के दायरे 1.12 से 1.20 के निचले छोर पर खड़ी है।

फारस की खाड़ी संकट और महंगे कच्चे तेल का वैश्विक असर

वित्तीय बाजारों की मौजूदा दिशा काफी हद तक मध्य पूर्व के हालात से तय हो रही है। फारस की खाड़ी क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों के दौरान कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर भारी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सप्ताह के मध्य में स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह ईरान के साथ किसी भी तरह का समझौता करने के पक्ष में नहीं हैं। उनके इस बयान के बाद बाजार में ईरान पर संभावित सैन्य हमले की अटकलें अचानक काफी तेज हो गईं, जिससे घबराहट का माहौल बन गया। हालांकि, बाद में राष्ट्रपति ट्रंप ने यह संकेत देकर तनाव को कुछ हद तक शांत किया कि वह 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर कोई सैन्य हमला नहीं करेंगे।

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बाजार को मिली इस संक्षिप्त राहत के बावजूद अमेरिकी मतदाताओं की चिंताएं जस की तस बनी हुई हैं। अमेरिकी नागरिक लगातार पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं, जिससे उपभोक्ता धारणा पर सीधा नकारात्मक असर पड़ा है। युद्ध के प्रति जनता का समर्थन लगातार घट रहा है, और माहौल बिगड़ने से रिपब्लिकन पार्टी के सामने संसद में अपना नियंत्रण खोने का गंभीर जोखिम खड़ा हो गया है। इसी बीच कच्चे तेल की कीमतें युद्ध से पहले के स्तरों की तुलना में काफी ऊंची बनी हुई हैं। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा तेहरान के साथ समझौते से इनकार करने के बाद कच्चे तेल का भाव प्रति बैरल 100 डॉलर के पार निकल गया था।

खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति युद्ध-पूर्व स्तरों के करीब रहने के बावजूद अमेरिकी नागरिकों को अपने वाहनों की टंकी भरवाने के लिए लगभग 40% अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। आपूर्ति मार्गों में भी भारी बदलाव आया है और इस क्षेत्र से निकलने वाले कच्चे तेल के हर दस में से लगभग चार बैरल अब होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे बिना बाहर जा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाले यातायात में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। ऊर्जा बाजार में इस विसंगति का सबसे सीधा कारण परिवहन और माल ढुलाई की बढ़ी हुई लागत है। मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी व्यवधानों ने प्रमुख तेल निर्यातकों को कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक और काफी महंगे रास्ते अपनाने पर मजबूर कर दिया है, और निर्यातक इन बढ़ी हुई परिवहन लागतों का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डाल रहे हैं।

अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती

भू-राजनीति के अलावा अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े भी डॉलर की मजबूती को लगातार आधार प्रदान कर रहे हैं। हाल ही में अमेरिका ने सितंबर महीने का ISM सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जारी किया, जो पिछले 55.4 से घटकर 54.9 पर आ गया। यह आंकड़ा 55 के बाजार अनुमान से थोड़ा कमजोर रहा। हालांकि, इस रिपोर्ट के भीतर छिपे मुद्रास्फीति के संकेत बेहद मजबूत थे। प्राइसेज पेड इंडेक्स अगस्त के 72.6 से बढ़कर सितंबर में 74 पर पहुंच गया, जो यह दर्शाता है कि सेवा क्षेत्र में कीमतों का दबाव अब भी ऊंचा बना हुआ है। सेवा सूचकांक में आई मामूली नरमी के बावजूद अमेरिकी डॉलर के व्यापक दबदबे पर कोई आंच नहीं आई।

इसके तुरंत बाद फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने अपनी सितंबर की बैठक के मिनट्स जारी किए। इन मिनट्स से साफ हुआ कि समिति के सभी वोटिंग सदस्यों ने ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का पूरा समर्थन किया था। इसके साथ ही फेड अधिकारियों का झुकाव सख्त मौद्रिक नीति की ओर दिखा। अधिकांश सदस्यों का मानना था कि चालू वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी करना पूरी तरह उचित रहेगा। नीति निर्माता जहां ऊंची मुद्रास्फीति को लेकर लगातार सतर्क हैं, वहीं श्रम बाजार को लेकर उनका आत्मविश्वास मजबूत बना हुआ है, क्योंकि वह पूर्ण रोजगार की स्थिति के करीब माना जा रहा है। अमेरिका में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आगामी आंकड़े अब बाजार का केंद्र बिंदु बन गए हैं।

यूरोप में राजनीतिक संकट और कमजोर आर्थिक बुनियाद

दूसरी तरफ, साझा यूरोपीय मुद्रा यूरो की कमजोरी के कारण आर्थिक आंकड़ों से कहीं आगे बढ़कर राजनीतिक संकटों में उलझे नजर आते हैं। यूरोप के प्रमुख देशों में राजनीतिक उथल-पुथल तेजी से फैल रही है। फ्रांस और स्पेन में आवास, वित्तीय नीतियों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। मध्य पूर्व संकट के चलते ऊर्जा की वैश्विक कीमतों में आए उछाल और प्रवासन से जुड़ी चुनौतियों ने पुराने महाद्वीप की मुश्किलों को और ज्यादा बढ़ा दिया है।

राजनीतिक मोर्चे पर फ्रांस में अगले साल होने वाले चुनावों से पहले धुर दक्षिणपंथी दल अपनी पकड़ मजबूत करते दिख रहे हैं। वहीं स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने संसद को भंग करते हुए समय से पहले नए चुनावों का ऐलान कर दिया है। जर्मनी में चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की अप्रूवल रेटिंग रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है, जिसके चलते वहां भी दक्षिणपंथी दलों का जनाधार तेजी से बढ़ रहा है। इन राजनीतिक तनावों ने अर्थव्यवस्था से ध्यान भटका दिया है, जो पहले से ही बेहद सुस्त रफ्तार से आगे बढ़ रही है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) द्वारा मौद्रिक नीति को सख्त करने के शुरुआती कदमों के बावजूद यूरोजोन में मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के 2% के लक्ष्य से काफी ऊपर टिकी हुई है। हालांकि मंदी की सीधी आशंका फिलहाल टल गई है, लेकिन आर्थिक स्थिति किसी भी तरह से संतोषजनक नहीं कही जा सकती, जिससे वैश्विक निवेशकों के लिए यूरो का आकर्षण लगभग खत्म हो चुका है।

तकनीकी विश्लेषण: चार्ट्स पर मंदी का स्पष्ट दबदबा

दैनिक मूल्य चार्ट पर EUR/USD अपनी मंदी के दौर को लगातार आगे बढ़ा रहा है। मुद्रा जोड़ी का मौजूदा भाव 1.1361 से 1.1596 के बीच स्थित 20-दिन, 100-दिन और 200-दिन के सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) के काफी नीचे बना हुआ है। मौजूदा भाव के ऊपर शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज का यह संरेखण साफ संकेत देता है कि बिकवाली का दबाव निरंतर कायम है। तकनीकी संकेतकों में मोमेंटम इंडिकेटर नकारात्मक दायरे में बना हुआ है, जबकि रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) गिरकर 25 के आसपास आ गया है। यह गिरावट बिकवाली की थकान के बजाय मौजूदा अधोमुखी रुझान की मजबूती को दर्शाती है।

दीर्घकालिक साप्ताहिक चार्ट भी इसी मंदी के परिदृश्य की पुष्टि करते हैं। साप्ताहिक चार्ट पर EUR/USD 1.1364 पर स्थित 100-सप्ताह के SMA और 1.1486 पर स्थित 20-सप्ताह के SMA के नीचे कारोबार कर रहा है, जबकि यह 1.1099 पर मौजूद 200-सप्ताह के SMA से मामूली ऊपर टिका हुआ है। साप्ताहिक RSI 34 के स्तर की ओर गिर रहा है और मोमेंटम अपनी मध्य रेखा के नीचे लगातार गति पकड़ रहा है, जो आने वाले समय में नए निचले स्तर बनने की संभावना को मजबूत करता है।

लाइव तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, इस समय EUR/USD 1.12 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। 14-अवधि का दैनिक RSI 21 पर ओवरसोल्ड क्षेत्र में है। MACD -0.01 पर सिग्नल लाइन -0.01 के साथ मंदी का रुख दिखा रहा है, जबकि 20-दिवसीय EMA 1.14, 50-दिवसीय EMA 1.14 और 200-दिवसीय EMA 1.16 पर स्थित हैं। 50-दिवसीय EMA का 200-दिवसीय EMA से नीचे होना डेथ क्रॉस की पुष्टि करता है, जो दीर्घकालिक गिरावट का प्रमाण है। बॉलिंजर बैंड 1.11 से 1.16 के बीच विस्तृत हैं और ADX 49 पर एक मजबूत ट्रेंडिंग बाजार की ओर इशारा कर रहा है। औसत ट्रू रेंज (ATR) 0.01 पर है।

अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर

ऊपरी स्तरों पर सुधार की स्थिति में पहला तात्कालिक प्रतिरोध 1.1361 के पास 20-दिवसीय SMA पर बनता है, जो कि 100-सप्ताह के SMA के बेहद करीब है। यदि शॉर्ट कवरिंग या मुनाफावसूली के कारण जोड़ी में उछाल आता है, तो यह क्षेत्र एक आकर्षक बिकवाली बिंदु साबित हो सकता है। यदि यहां से खरीदारी आगे बढ़ती है, तो जोड़ी 1.1470 के मजबूत तकनीकी क्षेत्र की ओर बढ़ सकती है।

नीचे की तरफ, मौजूदा बाजार क्षेत्र में 1.1190 के आसपास तात्कालिक समर्थन स्थित है। इसके नीचे 1.1099 पर 200-सप्ताह का SMA एक अत्यंत महत्वपूर्ण संरचनात्मक आधार प्रदान करता है। यदि किसी साप्ताहिक सत्र का समापन 1.1099 के नीचे होता है, तो यह गिरावट को और गहरा कर देगा और जोड़ी सीधे 1.1000 के मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर फिसल सकती है।

अन्य प्रमुख मुद्राओं और सोने की स्थिति

विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजार के अन्य क्षेत्रों में भी डॉलर के रुख का असर देखा गया। एशियाई सत्र में AUD/USD ने सप्ताह के निचले स्तर से उछाल दर्ज करते हुए 0.7000 के स्तर को छूने की कोशिश की। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने डॉलर को 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे रखा, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कुछ समर्थन मिला, जिसे रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों से भी बल मिल रहा है।

उधर USD/JPY 158.00 के आसपास अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। जापान के घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिससे येन पर दबाव बना। अंत में, सोने की कीमतों में शुरुआती तेजी के बाद गिरावट आई और पीली धातु 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे फिसल गई। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ट्रेजरी यील्ड में बढ़त के कारण कीमती धातुओं में बढ़त सीमित बनी हुई है।

सवाल-जवाब

EUR/USD मुद्रा जोड़ी पर इस समय गिरावट का दबाव क्यों बना हुआ है?
मध्य पूर्व तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर हैं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरें और बढ़ाने के संकेत दे रहा है, जिससे डॉलर को भारी मजबूती मिल रही है।
क्या राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर हमले को लेकर कोई समयसीमा बताई है?
राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर कोई सैन्य हमला नहीं करेंगे।
कच्चे तेल की आपूर्ति सामान्य होने के बावजूद पेट्रोल-डीजल महंगा क्यों है?
खाड़ी क्षेत्र से लगभग 40% तेल अब होर्मुज जलडमरूमध्य के बजाय लंबे और महंगे वैकल्पिक मार्गों से भेजा जा रहा है, जिससे परिवहन लागत बढ़ गई है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महंगाई को लेकर नए आंकड़े क्या संकेत देते हैं?
सितंबर के ISM सर्विसेज PMI में प्राइसेज पेड इंडेक्स 72.6 से बढ़कर 74 हो गया है, जो यह दर्शाता है कि सेवा क्षेत्र में कीमतों का दबाव लगातार ऊंचा बना हुआ है।
यूरोप में राजनीतिक संकट किन देशों में सबसे ज्यादा दिख रहा है?
फ्रांस और स्पेन में आवास व वित्तीय नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, स्पेन में संसद भंग कर दी गई है और जर्मनी में चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की रेटिंग रिकॉर्ड निचले स्तर पर है।
चार्ट पर EUR/USD के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर कौन से हैं?
नीचे की तरफ 1.1190 और 200-सप्ताह का SMA 1.1099 प्रमुख सपोर्ट हैं, जबकि ऊपर की ओर 1.1361 पर 20-दिन का SMA तात्कालिक रेजिस्टेंस है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Rohan Gupta@rohan-gupta·6 मिनट पहले

डॉलर की इतनी मांग सिर्फ चुनाव और तेल की वजह से है, इस पर पूरा यकीन नहीं होता।

Kavya Nair@kavya-nair·6 मिनट पहले

रोहन, बात सिर्फ चुनाव की नहीं है। जब ईरान को लेकर ऐसा माहौल बनता है, तो तेल के दाम और डॉलर दोनों पर असर पड़ता ही है।

Michael Anderson@michael-anderson·27 मिनट पहले

100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकला कच्चा तेल और टंकी भरवाने के लिए 40% ज़्यादा जेब ढीली करना—यही वो चीज़ है जो सीधे आम अमरीकी की ज़िंदगी पर भारी पड़ रही है। चुनाव से पहले ये गुस्सा बहुत कुछ तय करेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·27 मिनट पहले

माइकल, बात तो सही है आम आदमी की जेब पर असर पड़ रहा है, पर क्या आपको लगता है कि मिडटर्म चुनाव सच में इस नीति को बदल पाएंगे?

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