दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार के लिए सोमवार, 13 जुलाई 2026 का दिन बेहद खराब साबित हुआ। देश का प्रमुख सूचकांक कोस्पी करीब 9% लुढ़ककर 7000 के स्तर से नीचे आ गया। इस गिरावट की अगुवाई देश की दो सबसे बड़ी मेमोरी चिप कंपनियों एसके हाइनिक्स और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने की, जिनका इस सूचकांक में सबसे ज्यादा दबदबा है। खबर लिखे जाने तक एसके हाइनिक्स का शेयर 15% से ज्यादा गिर चुका था, जबकि सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स में 10% से ज्यादा की गिरावट रही। आइए समझते हैं कि आखिर हुआ क्या, और क्या इसकी आंच अमेरिकी बाजार तक भी पहुंच सकती है।
चिप दिग्गजों के शेयर क्यों धड़ाम हुए
इस गिरावट की एक बड़ी वजह मुनाफावसूली मानी जा रही है। पिछले कुछ सालों में AI से जुड़े शेयरों ने जबरदस्त तेजी दिखाई है, और इतनी लंबी उछाल के बाद अब कई निवेशक अपना मुनाफा भुनाकर पैसा दूसरी जगह लगा रहे हैं। रेलिएंट ग्लोबल एडवाइजर्स के फिलिप वूल का मानना है कि इस करेक्शन में रिस्क मैनेजमेंट की भी भूमिका है। उन्होंने कहा, "समझदारी भरा रिस्क मैनेजमेंट यही कहता है कि आपको इन्हें कम करना होगा।"
एसके हाइनिक्स की हाल ही में हुई नैस्डैक पर लिस्टिंग ने उलझन और बढ़ा दी है। इस लिस्टिंग का लंबे समय से इंतजार था और यह कामयाब भी रही, लेकिन अब इस बात पर असमंजस है कि अमेरिका में लिस्टेड शेयरों की कीमत मूल दक्षिण कोरियाई शेयर के मुकाबले कैसे तय की जाए। युआंता सिक्योरिटीज के ग्लोबल रणनीतिकार डैनियल यू ने साफ कहा, "हर कोई इस बात को लेकर बहुत उलझन में है कि मेमोरी की मांग का क्या होगा और सही कीमत कहां है।" यू ने यह भी बताया कि निवेशकों के लिए अब बाजार में ज्यादा शेयर उपलब्ध हो जाने से कीमतों में उतार-चढ़ाव और बढ़ा है।
अमेरिका और ईरान का टकराव
भू-राजनीति ने इस आग में घी का काम किया है। अमेरिका ने ईरान पर नए हमले किए हैं, और इस तनाव ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया है। कच्चे तेल की कीमतें 4% से ज्यादा उछल चुकी हैं, जो पहले से ही कमजोर चल रही बड़ी अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। इसी मिले-जुले असर ने एसके हाइनिक्स और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों की गिरावट को और गहरा कर दिया। निवेशकों को डर है कि अगर यह टकराव लंबा खिंचा तो सप्लाई चेन में दिक्कतें आ सकती हैं।
क्या अमेरिकी बाजार तक पहुंचेगी आंच
अब सबसे बड़ी चिंता इस गिरावट के फैलने की है। मेमोरी चिप AI की पूरी तेजी की रीढ़ हैं, इसलिए दक्षिण कोरिया में कीमतों का इतना बड़ा फेरबदल अकेले वहीं तक सीमित रहना मुश्किल है। अगर मुनाफावसूली, नैस्डैक लिस्टिंग को लेकर कीमत का असमंजस और तेल की बढ़ती कीमतें बनी रहीं, तो जिस घबराहट ने दक्षिण कोरियाई शेयरों को तोड़ा है, वह आने वाले दिनों में अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में भी दिख सकती है।











